विपक्षी दलों ने देश को एकजुट रखने के लिए दिखाई एकता

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अमूमन यह कहा जाता है कि बंगाल के लोग आज जो सोचते है। वह पूरे हिंदुस्तान में कल सोचा जाएगा’। यह बरसों से कही जा रही लोकोक्ति है। ज़रूरी नहीं कि यह सही ही हो। लेकिन अभी 19 जनवरी को ब्रिगेड परेड ग्राउंड पर एक महा रैली के आयोजन में मौजूद जनसमुद्र की समवेत हुंकार यह संकेत तो देती है। यह संकेत परिवर्तन का है। वह परिवर्तन जो 34 साल से राज्य में चल रहे वाममोर्चा राज को तीन तेरह कर गया। आज की तारीख में वाम मोर्चा पूरे देश में सिर्फ एक राज्य में सिमट गया है। इस महा रैली में भी वाम नहीं था। लेकिन वे कहते हैं कि वे प्रतिपक्ष का सम्मान रखेंगे। महा रैली में मौजूद सभी नेताओं ने शपथ ली कि एकजुट हो कर वे देश में राज कर रहे वर्तमान गठबंधन से देश को मुक्त कराएंगे।

इस महा रैली में विभिन्न विचारधाराओं की पार्टियों के नेता मौजूद थे। पूर्व प्रधानमंत्री देवगौडा, भाजपा के विद्रोही नेता शत्रुघ्न सिन्हा, अरूण शौरी और यशवंत सिन्हा। वहीं बसपा, राष्ट्रीय लोकदल, समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल के तेजस्वी यादव, गोरखालैंड नेशनल फ्रंट, असम और उत्तरपूर्वी राज्यों की पार्टियों के नेता और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खडग़े और अभिषेक मनु सिंघवी भी थे। इन सभी नेताओं को सुनने के लिए सुबह से शाम तक अपार जनसमूह जमा रहा।

वक्ताओं ने इस आम चुनाव को बेहद महत्वपूर्ण माना। चुनाव के बाद देश में एक ऐसी लोकप्रिय सरकार बनाने पर ज़ोर दिया जो विभिन्न विचारों, धर्मों जातियों, समुदायों का सम्मान करती हुई जनता की आकांक्षाओं के अनुरूप बने। देश को अलग-अलग बांटने की बजाए ऐसा संयुक्त भारत बनाने की बात की गई जहां सहिष्णुता का माहौल हो। महागठबंधन का नेता कौन होगा उस पर भाजपा को चिंता न करने की सलाह देते हुए वक्ताओं ने कहा कि आज इस रैली में मौजूद लोगों ने जनसमुद्र के सामने यह जता दिया है कि देश में भाजपा का भी मजबूत विकल्प है और महागठबंधन में नेता भी हैं। भाजपा को उसे इस बात पर लोगों को गुमराह नहीं करना चाहिए।

इस महा रैली के मंच पर राजनेताओं के अलावा बुद्धिजीवी भी थे। इनमें शिक्षा साहित्य, पत्रकारिता, संगीत, फिल्म,शिल्प, उद्योग, खेल से जुड़े व्यक्तित्व भी थे। बंगाल में राजनीति के साथ ही साहित्य,संगीत, कला को भी साथ रखने का कौशल अतुलनीय है लेकिन दूसरे प्रदेशों में भी इस ओर अब ध्यान दिया जाने लगा है।

विशाल परेड ब्रिगेड ग्राउंड भी जब छोटा पडऩे लगा तो देखा गया कि वक्ताओं को सुनने के लिए लोग सड़कों पर, आस-पास की गलियों में इक_े हो गए थे। मंच से मुख्यमंत्री कीे मैदान में बैठे लोगों से यह कहना पड़ा कि सारे रास्तों पर लोग हैं। गाडियां नहीं आ-जा सकती। बेहतर यही है कि चार बजे तक श्रोता पूरे देश से आए वक्ताओं को सुने फिर लौटें। सबको तभी लौटना है। एक साथ।

इस महा रैली में बांग्ला, उर्दू, तमिल, कन्नड़, अंग्रेजी और हिंदी की गूंज रही। इतनी बड़ी तादाद में विविध भाषाओं के लोगों की सुविधा के लिए अनुवाद की भी व्यवस्था की गई थी। बंगाल के पुलिस-प्रशासन ने हर तरह से उचित बंदोबस्त किया था।

विविध संस्कृति, धर्म, और जातियों वाले देश में आज जो गठबंधन दिख रहा है वह देश को बचाने के लिए है। इससे देश के लोगों को न्याय मिलेगा। आज देश को बचाने की खातिर ही इतनी बड़ी तादाद में लोग एकजुट हुए हैं। ऐसे में जो पार्टी जिस राज्य में भी ताकतवर है उसे हम सबको मिलकर मजबूत करना चाहिए जिससे भाजपा का मुकाबला किया जा सके। इस समय एक शहर या एक राज्य महत्वपूर्ण नहीं है बल्कि देश महत्वपूर्ण है। इस कारण आज संगठित नेतृत्व की ज़रूरत है। जब चुनाव हो जाएगा तो उपयुक्त प्रधानमंत्री का भी चयन हो जाएगा। आज ज़रूरत है कि भाजपा विरोधी वोट न बंटे। हमें इस तरह से चुनाव में भाग लेना है कि भाजपा की बुरी तरह से पराजय हो।

इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन को चोर मशीन बताया गया। दुरूपयोग न हो इसके लिए वक्ताओं ने संयुक्त कमेटी के जरिए उस संबंध में चुनाव आयोग और राष्ट्रपति के पास प्रतिवेदन की बात की। यदि हर ईवीएम के साथ वीआईपीटी का उचित बंदोबस्त नहीं होता तो चुनाव आयोग फिर पेपर का इस्तेमाल कर मत पत्र की पुरानी भारतीय परंपरा पर लौटने का फैसला ले। क्योंकि आज दुनिया के अधिकांश देश चुनाव में ईवीएम मशीनों का इस्तेमाल नहीं करते। इस कमेटी में अखिलेश यादव (सपा), सतीश मिश्र (बसपा), और अभिषेक सिंघवी (कांग्रेस) होंगे।

भाजपा की उस अनैतिक राजनीति जिसमें समाज में फूट डालना, जातियों में आपसी लांग-डांट बढ़ाना, ध्रुवीकरण और धर्म को राजनीति में लाने की कोशिशों से जनता को सजग रहने की अपील की गई। बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल की राष्ट्रीय अध्यक्ष ममता बनर्जी ने कहा जब और जहां भाजपा प्रचार कार्यक्रम करती है वहां तत्काल प्रतिपक्ष को पहुंच कर दूध का दूध और पानी का पानी करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि इस महा रैली के बाद अब हर राज्य में रैलियां की जाएंगी। आंध्र प्रदेश के मुख्य मंत्री चंद्र बाबू नायडू ने हम सबको आंध्रप्रदेश में अमरावती बुलाया है। वहां वे ऐसी ही बड़ी रैली करेंगे। दिल्ली में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने और जम्मू – कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूख अब्दुल्ला ने कश्मीर में इस तरह की रैली करने की बात कही है। हम उसमें जाएंगे। इन रैलियों के बाद हम सब दिल्ली में बैठेगें। एक कमेटी बनाएंगे जो आम चुनाव के हिसाब से संयुक्त नीति प्रपत्र तैयार करेगी।

इस महा रैली में क्षेत्रीय दलों के महत्व पर बात की गई। साथ ही उत्तरप्रदेश में हुए सपा-बसपा समझौते को सराहा गया। यह कहा गया कि सीटों के बंटवारे पर भी दोनों दलों को जल्दी ही एक राय बनानी चाहिए। यह इसलिए भी ज़रूरी है क्योंकि केंद्र सरकार, राज्य सरकारों के हितों की अनदेखी करके संवैधानिक एजेंसियों के जरिए क्षेत्रीय दलों के नेताओं को डरा-धमका रही है। कर्नाटक में जनता दल और कांग्रेस की मिली -जुली सरकार को अस्थिर करने के लिए भाजपा पूरा जोर लगा रही है। राज्य के विधायकों को लालच देकर उनकी खरीद फरोख्त भाजपा कर रही है। भाजपा जिस नैतिकता की दुहाई देती थी वह कहां गई। पूछा कर्नाटक के मुख्यमंत्री कुमारस्वामी ने।

पूर्व प्रधानमंत्री और कर्नाटक के मुख्यमंत्री रहे देवगौडा ने कहा,’समय आज बहुत कम है। हम कितनी जल्दी एक दूसरे से जुड़ पाते हैं यह एक बड़ा सवाल है। हमारी क्या नीतियां होंगी और कार्यक्रम। मेरी सलाह है एक छोटा समूह बनाकर मैनीफेस्टो और नीति दस्तावेज बना लिया जाए। वरिष्ठ नेता सीट के बंटवारे पर बातचीत करें। हमें जनता को यह संदेश देना है कि गठबंधन की सरकारें भी टिकाऊ होती हैं और विकास के लिए सक्रिय रहती हैं। उत्तर-पूर्व में बना पुल और कश्मीर में बड़ी सुरंग में राह दोनों योजनाएं पिछली मिली-जुली सरकारों के दौर की हैं।

द्रमुक नेता और अध्यक्ष एम के स्टालिन ने कहा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ममता बनर्जी से खासा खौफ खाते हैं। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्र बाबू नायडू ने कहा कि देश अब ऐसा प्रधानमंत्री चाहता है जो विकास की सिर्फ बात न करे बल्कि वाकई कुछ कर दिखाए।

आप नेता और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि , ‘ जो काम पाकिस्तान भारत में 70 साल में न कर पाया वह भाजपा ने सिर्फ साढे चार साल में कर डाला। भाजपा ने देश को बड़ी कामयाबी के साथ विभाजित कर दिया है और यदि फिर ये सत्ता में आ गए तो ये अब इसके टुकडे-टुकडे करना चाहते हैं।

इस महा रैली में पहुंचे असम और उत्तरपूर्व के नेताओं ने कहा आज देश की आज़ादी की यह दूसरी बड़ी लड़ाई है। अभी हाल भाजपा से इस्तीफा देने वाले अरूणाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री गियोग अपांग ने कहा,’ भाजपा यदि उत्तर-पूर्व की लोक संस्कृति खान-पान और उनकी जिंदगी में दखल देना बंद नहीं करेगी तो इसे वहां बुरी तरह नुकसान उठाना पड़ेगा।’

महा रैली में मौजूद पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा और अरूण शौरी भी बोले शौरी ने कहा कि, ‘केंद्र में बैठी झूठ बोलने वाली सरकार को उखाड़ फेंकना कठिन नहीं है। खुद मोदी को भी यह जानकारी है कि उनकी पकड़ कितनी ढीली हो चुकी है। विपक्षी दलों को ऐसी रैलियां हर राज्य की राजधानी में करनी चाहिए और विपक्षी दलों के नेताओं को खुद भी वहां पहुंचना चाहिए। जिस तरह यह शर्मनाक है कि देश की विभिन्न संवैधानिक संस्थाओं मसलन आरबीआई, सीबीआई, मीडिया, जुडीशियरी, रक्षा को इन्होंने तोड़ा है।

लोकसभा में दो बार सांसद रहे शत्रुध्न सिन्हा ने कहा कि प्रधानमंत्री को खुद राफेल लडाकू जेट विमान पर हुए समझौते और सौदे पर पूछे जा रहे सवालों का जवाब देना चाहिए। वे चीजों को छिपाने की जितनी कोशिश करेंगे उतना ही लोग कहेंगे, चौकीदार चोर है।

विपक्षी दलों के युवा नेताओं में जयंत चौधरी, तेजस्वी यादव, के अलावा हार्दिक पटेल और जिग्नेश मेवानी भी महा रैली में मौजूद थे। गुजरात के निर्दलीय विधायक जिग्नेश मेवानी ने विपक्षी गठबंधन को समर्थन देते हुए कहा देश बड़े संकट के दौर से गुज़र रहा है। गरीबों, अल्पसंख्यकों आर दलितों का शोषण हो रहा है इस भाजपा राज में। यह ज़रूरी है कि इन्हें परास्त किया जाए। चुनाव बाद गठबंधन केंद्र में आकर यह व्यवस्था ज़रूर करे कि संविधान का आदर रहे। भारत लोकतांत्रिक समाजवादी देश बना रहे।

गुजरात के दूसरे युवा शेर और पाटीदार नेता हार्दिक पटेल ने कहा, वे तैयार है दूसरे दलों के साथ मिलकर एनडीए से लडऩे के लिए। नेता सुभाष चंद्र बोस  ने ‘गोरों’ (ब्रिटिश शासकों) के खिलाफ लडऩे को कहा था। हमें अब ‘उन चोरों से’ अपने ही देश में लडऩा पड़ रहा है क्योंकि वे कम खतरनाक नहीं हैं।

बिहार से आए तेजस्वी यादव ने कहा,’ मोदी की नींद अब इस रैली को देखने के बाद उड़ जाएगी। चौकीदार यदि कुछ गलत करता है तो लोग या जनता ही थानेदार का काम करती है। उसे माफ नहीं करती।’