वर्तमान का दस्तावेजीकरण

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‘मैं में हम हम में मैं’ कविता दरअसल महानगरीय जीवन की त्रासदियों का आख्यान है. छोटे गांव-कस्बों से महानगर आने वाले युवाओं को बाहरी और अंतर्मन के स्तर पर दोहरी समस्याओं का सामना करना पड़ता है. निशान्त की कविताएं इस अंतर्द्वंद्व को बखूबी प्रकट करती हैं. हिंदी की युवा कविता में इस समय एक ही तरह की कविताएं लिखी जा रही हैं. उनकी चिंताएं एक सी हैं. ऐसे में निशान्त की कविताओं में कोलकाता का विक्टोरिया मेमोरियल है और सूजा और विसेंट वॉन गॉग से लेकर तमाम चित्रकार तक उनके विषय हैं.

‘फिलहाल सांप कविता’ के जरिए वे बताते हैं कि उत्साह से भरे एक युवा का कथित अनुभवी लोग क्या हश्र करते हैं. यह दुनिया जो बहुत खूबसूरत हो सकती थी वह किन लोगों के चलते इतनी कुरूप हो गई है इसका यह कविता पूरा हिसाब करती है. अगर हमें अपने समय के युवा मन को समझना है तो निशान्त की कविताओं को पढ़ा जाना चाहिए क्योंकि ये हमारे वक्त का दस्तावेज हैं.

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