रूस

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विश्व रैंकिंग: 37
सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन : चौथा स्थान (1966)

खास बात
एलेग्जेंडर कोकोरिन के चर्चा में आने का मुख्य कारण उनका जस्टिन बीबर की तरह दिखना था. विशेष तौर से विश्व-भर के अखबारों में वे इसी कारण से सुर्खियों में बने रहे. लेकिन मास्को के इस आक्रामक स्ट्राइकर को आने वाले वक्त का सितारा भी माना जाता है. रूस के कई फुटबॉल पंडितों का मानना है कि कोकोरिन ब्राजील की धरती पर अपना जादू दिखा सकते हैं

फेबिओ कपेलो की बेहतरीन रणनीतियां इस बार बिखरती हुई नजर आ रही हैं. कप्तान रोमन शिरोकोव के चोटिल होने से न सिर्फ टीम में एक प्रभावशाली खिलाड़ी कम हुआ है बल्कि टीम का सहारा भी खो चुका है. शिरोकोव के रहते रूस ने क्वालीफाइंग मैचों में कमाल का प्रदर्शन किया था और पुर्तगाल जैसी टीम पर भी जीत हासिल की थी. लेकिन आज वे टीम में नहीं हैं. ऐसे में कोच फेबिओ को अपनी रणनीतियों पर पुनर्विचार करना होगा. अब भी रूस के पास डिफेन्स में कुछ जाने-पहचाने चेहरे जरूर हैं. गोलकीपर इगोर एकिनफीव सालों से अपनी जिम्मेदारी बखूबी संभाले हुए हैं और कोई भी उनकी जगह नहीं ले सका है. साथ ही सेर्गेय इगानशेविच भी पूरे साहस के साथ रक्षण में मौजूद हैं. लेकिन कोच फेबिओ के सामने सबसे बड़ी चुनौती मिडफील्ड और फॉरवर्ड को साधने की है. सेंट्रल-मिडफील्ड पर इगोर डेनिसोव और विक्टर फैजलिन कुछ सार्थक कर सकते हैं, लेकिन बाकी खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर सवालिया निशान उठ रहे हैं. यूरो 2012 में अपनी प्रतिभा से सबको चौंकाने वाले आक्रामक मिडफील्डर एलान जागोएव भी इस टीम में हैं, लेकिन अब उनकी चमक कुछ फीकी पड़ती नजर आ रही है. अग्रणी पंक्ति में एलेग्जेंडर कोकोरिन हैं जिनका अनुभव भले ही कम है लेकिन वे बॉल को गोल पोस्ट के पार पहुंचाने की उम्मीद जरूर जगाते हैं. इनके अलावा फुर्तीले एलेग्जेंडर करझाकोव भी हैं जिनमें विपक्षियों को छकाने की प्रतिभा तो है लेकिन वे इसे गोल में कम ही तब्दील कर पाते हैं.

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