‘राजनीतिक तौर पर मुझे खत्म करने की साजिश’

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सुखराम आपको छोड़ कांग्रेस में चले गए। उन्होंने यह आरोप भी लगाया है कि उनके घर पर जो पैसे मिले थे वे आपने रखवाए थे। उनके जाने से कांग्रेस को कोई फर्क नहीं पडेगा। पिछले सालों में कांग्रेस में उनका क्या रोल रहा? रही बात पैसे की तो सुखराम कोई बैंक आफ मंडी हैं जो वे उनके पास पार्टी का पैसा जमा करवाएंगे। कांग्रेस पार्टी देश की सबसे पुरानी पार्टी है यदि उसे पैसा रखना होता तो वे बैंक में रखते, न कि किसी के घर में और वो भी मंडी में। सुखराम के घर पर जो पैसा मिला, वह कहां से आया है, सब जानते हैं। सुखराम के बीजेपी में जाने से कांग्रेस को कोई नुकसान होने वाला नहीं है।

आलाकमान ने आपका हलका बदल दिया। क्या दिक्कत नहीं आएगी नए हलके में आपको। अर्की से कांग्रेस काफी साल से हार रही है। मेरे वहां से लडऩे से पार्टी को मजबूती मिलेगी। अर्की के लोगों का मुझसे बहुत प्यार रहा है। अर्की से चुनाव को मैंने एक चैलेंज के रूप में लिया है। अर्की सीट ही नहीं, सोलन जिले की सभी सीटें कांग्रेस जीतेगी। अर्की सीट पिछले 15 साल से कांग्रेस नहीं जीती और इसलिए मैं इस सीट पर अपनी इच्छा से उतरा हूँ।

किस मुद्दे पर आप जनता के बीच हैं और कितनी संभावनाएं कांग्रेस के लिए देखते हैं। कुछ बागी भी मैदान में हैं। कांग्रेस पार्टी विकास के मुद्दे पर जनता के बीच जाएगी और फिर से मजबूत सरकार बनाएगी। राज्य में अथाह विकास हुआ है और इसके बूते हम सत्ता में फिर आएंगे। चुनाव में टिकट को लेकर खींचतान रहती है और कई नाराज़ होकर निर्दलीय चुनाव में उतर जाते हैं। यह केवल कांग्रेस में ही नहीं होता, बल्कि हर दल में ऐसा होता है।

मैदान में 338 उम्मीदवार

विधानसभा चुनाव में इस बार कुल 338 प्रत्याशी अपना भाग्य आजमाएंगे। भाजपा और कांग्रेस ने अपनी-अपनी पार्टी के बागियों को मनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। इनमें से कुछ ने तो नामांकन वापस ले लिया पर कुछ अभी भी मैदान में डटे हुए हैं। कुल मिलाकर इस बार प्रदेश की 68 सीटों के लिए 338 उम्मीदवार मैदान में है। शिमला जिला से 38 उम्मीदवार चुनावी मैदान में रह गए हैं। सिरमौर जिला में 19, चंबा जिला में 21 जबकि ऊना जिला में 22 उम्मीदवार मैदान में रह गए हैं। अतिरिक्त निर्वाचन अधिकारी डीके रतन के मुताबिक हमीरपुर में 28, मंडी जिला में 58, सोलन जिला में 21, बिलासपुर से 14, किन्नौर और लाहौल स्पीति में क्रमश: 5 और 4 उम्मीदवार, कुल्लू से 14, कांगड़ा जिला में सबसे ज्यादा 94 उम्मीदवार मैदान में रह गए हैं। गौरतलब है 2012 में विधानसभा चुनाव के लिए459 उम्मीदवार मैदान में कूदे थे।

सुखविंदर सिंह सुक्खू प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष

पिछले पांच साल में हमने जो काम किया है वह प्रदेश में पार्टी की सरकार दुबारा बनाने का लिए हमारा मुख्य आधार है। केंद्र में मोदी सरकार के प्रति लोगों में बहुत नाराज़गी है और जनता फिर भाजपा को वोट नहीं देना चाहती। हिमाचल के चुनाव नतीजे भाजपा के लिए राष्ट्रीय स्टार पर असर डालेंगे। कांग्रेस हिमाचल में बहुत एकजुट होकर चुनाव में उतरी है। हमारी तरफ से मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार की घोषणा भी हो चुकी है जिसका हमें लाभ मिलेगा। जबकि भाजपा का चेहरा कौन होगा यही वह तय नहीं कर पाई है जिससे साफ लगता है उसे अपनी जीत की उम्मीद ही नहीं है। हमारे कार्यकर्ताओं में जोश है और हम भाजपा के मुकाबले मैदान में प्रचार में बहुत आगे हैं। अगले महीने के शुरू में हमारे राष्ट्रीय नेता प्रचार के लिए आने वाले हैं जिनमें सोनिया गांधी और राहुल गांधी शामिल हैं। इसके अलावा बहुत से पूर्व मुख्यमंत्री पार्टी के प्रचार के लिए अक्तूबर के तीसरे पखवाड़े से ही हिमाचल आ चुके हैं। खुद मैंने अध्यक्ष के नाते तमाम हलकों के लिए नेताओं को जिम्मेवारी सौंपी है और संगठन को चुनाव प्रचार में गति दे रखी है। भाजपा के खिलाफ बहुत से मुद्दे हैं इन्हें हम लोगों के सामने उठा रहे हैं। हमारे बागी चुनाव मैदान से हट चुके हैं। आधिकारिक उम्मीदवार पूरी ताकत से मैदान में जुटे हैं।