योगी सरकार के एक साल बाद भी विकास को तरसती जनता

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किसान अब सरकार की नीतियों से निराश हैं क्योंकि उनकी आय नहीं बढ़ी और अब गन्ना, आलू, गेंहू, चावल, दालों की फसलों का समर्थन मूल्य बढ़ाकर निर्धारित नहीं हुआ है। प्रधानमंत्री मोदी ने किसानों की आय दुगुना करने का वादा किया था। परन्तु कजऱ् के कारण किसान आत्महत्या कर रहे हैं। राज्य में योगी सरकार बनने के बाद भी लगभग 100 किसान आत्महत्या कर चुके हैं। बुंदेलखंड सबसे ज़्यादा प्रभावित क्षेत्र है जहां आंधी तूफान के कारण फसलें बर्बाद हो गई थी। इस कारण कजऱ् के बोझ से दबे दर्जन से ज़्यादा किसानों ने आत्महत्या कर ली थी। बुंदेलखंड क्षेत्र के भारतीय किसान यूनियन के प्रधान एसएनएस परिहार ने यह जानकारी दी।

भाजपा ने अपने चुनावी अभियान के दौरान बेहतर कानून व्यवस्था का वादा अपने नारे ‘न गुंडाराज, न भ्रष्टाचारÓ के साथ किया था। लेकिन राज्य में कानून व्यवस्था और भ्रष्टाचार की स्थिति अच्छी नहीं है। अपराध के बढ़ते ग्राफ के साथ मुख्यमंत्री ने अपराधों की रोकथाम के लिए पुलिस को अधिक शक्ति दी। इस शक्ति के दुरूपयोग के कारण मानव अधिकार कमीशन आयोग ने राज्य के मुख्य सचिव राजीव कुमार को नोटिस जारी किया कि क्या कथित मुठभेड़ें अपराध को खत्म कर देंगी।

भाजपा के शासन काल में उत्तरप्रदेश पुलिस ने अपराध को रोकने के लिए 1309 ऑपरेशन किए जिनमें 42 अपराधी मारे गए और 3068 को पकड़ लिया गया। पुलिस के डीजी (डिप्टी जनरल) ने बताया कि अच्छे कार्य के लिए हमने 1574 पुलिस कर्मचारियों को पुरस्कृत किया। पुलिस में सुधार के लिए उच्चतम न्यायालय के निर्देशों को लागू करने के बारे में डीजी ने कहा कि पहले मैं इनका अध्ययन करूंगा फिर जवाब दूंगा।

कानून व्यवस्था में सुधार का दावा करने के बाद भी राज्य के विभिन्न हिस्सों में सांप्रदयिक हिंसा की घटनाएं सत्तारूढ़ पार्टी के कार्यकर्ताओं के उकसाने और सरकारी मशीनरी की हिंसा को रोकने में हुई लापरवाही के कारण हुई।

लगभग 45 वर्षीय आदित्यनाथ गोरखपुर से पांच बार सांसद बने। उनकी प्रतिष्ठा उनके द्वारा खाली की गई संसदीय सीट के लिए हुए उप-चुनाव में दांव पर थी। 1998 से वे इस संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे थे जब वे सिर्फ 26 वर्ष के थे। अपनी विशेष राजनीतिक शैली के लिए वे उत्तरप्रदेश के पूर्वी इलाकों में काफी लोकप्रिय हैं। जहां उन्होंने हिंदू भावनाओं को उकसाने और मज़बूत करने के लिए अपने अभियानों ‘घर वापसीÓ और ‘लव जिहादÓ को राष्ट्रव्यापी बनाया।

योगी ने गायों के वध का विरोध किया और इसे उत्तरप्रदेश में प्रतिबंधित भी किया। लेकिन पूर्वी उत्तरप्रदेश में यह अवैध रूप से चलता रहा। इसने उन्हें गाय सतर्कता आंदोलन का नेता बना दिया उन्होंने गाय वध और अवैध कसाई घर बंद करवा दिए। इस सांप्रदायिक उन्माद ने दादरी मामला और गाय जागरूकता के नाम पर सांप्रदायिक हिंसा को जन्म दिया। यह सही है कि गाएं फसलों के लिए बहुत खतरा हो गई क्योंकि वे फसलों को नष्ट कर देती थीं जिससे किसानों को भारी वित्तीय नुकसान होने लगा।

योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में भाजपा की सरकार उत्तरप्रदेश में 2017 में बनी लेकिन उनकी सरकार किसानों, शिक्षा स्वास्थ्य देखभाल, भ्रष्टाचार, कानून-व्यवस्था के प्रति किए गए अपने वादे पूरे नहीं कर पाई। उनका प्रदर्शन पूरी तरह से हिंदुत्व के एजेंडे के लिए प्रतिबद्ध था। बेरोज़गारी और आजीविका जैसे वास्तविक मुद्दे पीछे रह गए। अधिकांश समय नेता हिंदू-मुस्लिम विवादों में ही उलझे रहे। हालांकि सरकार ने नौकरी सृजन को बढ़ावा देने के लिए निवेशकों का एक सम्मेलन आयोजित किया और उत्तरप्रदेश में औद्योगिकरण को तेज करने के लिए 4.23 लाख करोड़ के समझौते वास्तव में एक बड़ा लक्ष्य और अत्यंत कठिन कार्य है।