युवाओं का साथ पाने के लिए हुई हुंकार रैली

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विधायक जिग्नेश मेवाणी ने कहा, संसद मार्ग पर रैली होने देना लेकिन जंतर-मंतर पर युवा हुंकार रैली को अनुमति न देना मोदी का गुजरात मॉडल है। देश के संविधान और लोकतंत्र के लिए यह सरकार खतरा है। जब भी वे गुजरात आते हैं, मुझे हिरासत में ले लिया जाता है। दिल्ली में रैली करने आता हूं तो अनुमति नहीं मिलती। देश की 125 करोड़ जनता देख रही है कि लोगों को बोलने नहीं दिया जा रहा।

उन्होंने दलित नेता चंद्रशेखर आजाद रावण की रिहाई की मांग की। उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में हुई ठाकुरों और दलितों के बीच हिंसक झड़प में तीस साल के आजाद को पिछले साल जून में गिरफ्तार किया गया। वे जमानत पर छूटे फिर उन्हें रासुका में बंद कर दिया गया।

उन्होंने कहा कि हम यहां जोडऩे की बात करने आए हैं। वे लव जिहाद में गिरफ्तारी करते हैं। हम 14 फरवरी को ‘वैलेटाइन डेÓ भी सेलिब्रेट करेंगे। दलित-आदिवासी को ज़मीन दो ,अच्छी शिक्षा, स्वास्थ्य और नौकरियां दो। लेकिन ये उसके लिए तैयार नहीं हैं। युवा वर्ग की अगुवाई में इनको चुनौती दी इसलिए हमें टारगेट किया जा रहा है। हम किसी भी समुदाय, जाति और धर्म के खिलाफ नहीं हैं। हम प्यार-मुहब्बत का ही गाना गाएंगे।

प्रधानमंत्री जवाब दें कि कोरेगांव की हिंसा क्यों कराई गई। अखिल गोगई पर मुकदमा क्यों दर्ज हुआ। सहारनपुर, भीमा कोरेगांव क्यों हो रहा है। मध्यप्रदेश के किसानों पर गोलियां क्यों दागी गईं। रोहित की हत्या क्यों हुई।

हम प्रधानमंत्री से सवाल पूछेंगे। उनसे ये सवाल गुजरात विधानसभा और सड़कों पर भी पूछेंगे। हम लोकतंत्र और संविधान बचाना चाहते हैं। मेरे एक हाथ में मनुस्मृति और दूसरे में संविधान है। हमारा एक प्रतिनिधिमंडल लोक कल्याण मार्ग पर उनके घर तक जाएगा और उनसे दोनों में से किसी एक को चुनने को कहेगा।

आज प्रधानमंत्री मोदी को मनुस्मृति और संविधान में से किसी एक को चुनना होगा और रोहित वेमुला की हत्या और नजीब अहमद के लापता होने और चन्द्रशेखर की रिहाई पर जवाब देना होगा।

 

हुंकार रैली क्या वाकई थी फ्लाप शो

देश का युवा जिग्नेश मेवाणी, कन्हैया, उमर, अखिल गोगई, शेहला और दूसरे कई और युवा नेताओं ने जंतर-मंतर पर नौ जनवरी को रैली की। ज़्यादातर मीडिया के लिए यह ‘फ्लाप शो था लेकिन देश और लोकतंत्र की खातिर युवाओं की यह जन-सामाजिक रैली थी। देश का युवा अब गंभीर चुनौतियां खड़ी कर रहा है और सत्ता राजनीति के खेल को समझ रहा है।

अजय कुमार सिंह

जामिया मिलिया उस्मानिया विश्वविद्यालय