यह फिल्म समीक्षा नहीं है

एक सुंदर स्पैनिश प्रेमकहानी है, ‘लवर्स ऑफ द आर्कटिक सर्कल’. संयोगों और दुर्योगों के बीच, याद में कल्पना के रास्ते घुसते दो प्रेमी. उसे हम रात के खाने के वक्त देखेंगे. कभी हम ‘अबाउट ऐली’ के असगर फरहदी की सी बेचैनी से अपनी दुनिया की किसी ऐली को जाते देखेंगे और कोई बच्चा उसे ऐसे खोजेगा जैसे’बाल (शहद)’ नाम की एक तुर्की फिल्म में एक गांव का बच्चा अपने पिता को जंगल में खोजता है. एक-एक पत्ती की आवाज वहां आप साफ सुन सकते हैं.

दुनिया अच्छी है. नहीं है तो हमें उसे अच्छा बनाना है. पर इसके लिए जरूरी है कि हम ‘हिम्मतवाला’ के बारे में कोई बात ना करें.

– गौरव सोलंकी

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