मोदी के अप्रवासी समर्थक!

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संगठन ने भाजपा के प्रचार के लिए विदेशों में बसे भारतीयों में से स्वयंसेवकों की भरती भी की है. इनमें से आधे लोग भारत आकर पार्टी का प्रचार करेंगे. पटेल जानकारी देते हैं, ‘इनमें से आधे लोग हर दिन कम से कम दो सौ लोगों को फोन या मैसेज करेंगे.’ पटेल मूल रूप से छत्तीसगढ़ के चिरमिरी जिले के रहने वाले हैं और उनका परिवार सालों से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ा रहा है. 1989 में फ्लोरिडा जाने से पहले वे खुद भाजपा के जिला अध्यक्ष थे. माइक्रो चिप निर्माण उद्योग में काम करने वाले पटेल अमेरिका पहुंचने वाले भाजपा नेताओं के कार्यक्रम आयोजित करते हैं. साथ ही उनके पास यहां पार्टी के खिलाफ दुष्प्रचार का जवाब देने की जिम्मेदारी भी है.

अमेरिका में ofbjp की अमेरिकी शाखा की स्थापना भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने 1991 में की थी. इस संगठन के सदस्यों में विद्यार्थियों से लेकर बुजुर्गों तक सब शामिल हैं और यह विदेशों में कार्य कर रहे भाजपा के सबसे बड़े संगठनों में है. इस संगठन में शामिल होने के लिए सदस्यों को 1 से 100 डॉलर तक की फीस देनी पड़ती है. इस संगठन ने’मोदी फॉर पीएम’ और ‘डोनेट फॉर पीएम’ जैसे अभियान चलाए हैं. यहां अप्रवासी भारतीय मोदी के लिए धन भी दान कर रहे हैं. यह राशि सीधे भाजपा के खाते में जा रही है. जबकि संगठन का कोर ग्रुप अपने स्तर पर भी चंदा इकट्ठा कर रहा है. यह अमेरिका में ही चल रहे प्रचार पर खर्च किया जा रहा है.’ भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव जगतप्रकाश नड्डा कहते हैं, ‘नरेंद्र मोदी को लेकर एकतरफा लहर चल पड़ी है. इससे विदेशों में रहने वाले भारतीय कैसे बच सकते हैं. हमारे अप्रवासी भारतीय बंधु भी वातावरण बनाने में सहयोग कर रहे हैं. अप्रवासी भारतीय भी अब परिवर्तन चाहते हैं. यही कारण है कि वे खुले दिल से मोदी जी को सपोर्ट कर रहे हैं.’ हालांकि कांग्रेस मोदी फॉर पीएम नाम के इस अंतरराष्ट्रीय अभियान से कोई इत्तेफाक नहीं रखती. इस बारे में कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव मुकुल वासनिक कहते हैं, ‘हर दल अपने तरीके से चुनाव जीतने की कोशिश कर रहा है. लेकिन केंद्र में सरकार तो हमारी ही बनेगी. कांग्रेस पार्टी अपनी 10 साल की उपलब्धियों के बल पर जनता से वोट मांगेगी. हमें पूरा भरोसा है, जैसे-जैसे चुनाव का वक्त नजदीक आएगा, वातावरण में कई बदलाव आएंगे. जहां तक भारत के बाहर मोदी की बढ़ती लोकप्रियता की बात है, इसमें कोई तथ्य नहीं है. यह भाजपा का भ्रामक प्रचार है.’ हालांकि कांग्रेस के दावों-वादों से इतर इस बात में कोई संदेह नहीं कि पार्टी भाजपा की तर्ज पर इस तरह अप्रवासी भारतीयों के किसी संगठन की मदद से इतना आक्रामक प्रचार शुरू नहीं कर पाई है. भाजपा की इस सहयोगी इकाई का एकमात्र लक्ष्य है पार्टी की सीटों की संख्या को 272 के पार पहुंचाना ताकि वह अपने दम पर सरकार बना सके. भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के साथ संगठन के लोगों की कई दौर की बैठकें हो चुकी हैं. पार्टी के कई नेता नियमित तौर पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए एनआरआई समुदाय के प्रभावशाली लोगों से संवाद स्थापित कर चुके हैं.

इस समय जब पूरी दुनिया की नजर भारत में होने जा रहे लोकसभा चुनाव पर है, अप्रवासी भारतीयों का इससे अछूता रहना असंभव ही था. इनमें ज्यादातर टीवी और इंटरनेट से पल-पल बदल रहे राजनीतिक परिदृश्य की खबर रख रहे हैं. इसमें भी एक तबके द्वारा मोदी के पक्ष में इतना आक्रामक अभियान चलाने की कवायद इस लोकसभा चुनाव के लिए बिल्कुल अलहदा है. हालांकि स्थानीय स्तर पर इसका असर फिलहाल तो  कहीं दिखाई नहीं दे रहा है.

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