‘मूर्ति का सपना न दिखाओ, राम मंदिर बनाओ’

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दुनिया की सबसे ऊँची भव्य मूर्ति अयोध्या में बनवाने के लिए उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री संकल्पित हैं। लेकिन वाराणसी में हुई साधु-संतों की ‘धर्म संसद’ ने इस फैसले को बेवजह खर्च बताते हुए निंदा की है। इस फैसले को धर्म संसद ने ‘भगवान का अनादर’ बताया है। धर्म संसद के अनुसार राम आराध्य है, प्रदर्शन की वस्तु नहीं है। जबकि उत्तरप्रदेश सरकार में पर्यटन के अतिरिक्त सचिव ने जानकारी दी है कि 221 मीटर ऊँची राम की मूर्ति बनेगी। यह प्र्यटकों को लुभाने का एक प्रयास है।

अयोध्या तट पर राम की 221 मीटर ऊँची राम की मूर्ति की पहल उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने की थी। उन्होंने इस फैसले का लोकसमर्थन पाने के लिए दीपावली के मौके पर इस संबंध में दक्षिण कोरिया की प्रथम महिला को सरयू तट पर आमंत्रित करके एक भव्य आयोजन भी किया था। इस मौके पर तीन लाख दीप जला कर राम के अयोध्या लौटने के क्षणों को याद भी किया गया था। इस आयोजन को अयोध्या में सराहा गया।

लेकिन साधु-संतों की संस्था ‘धर्म संसद’ ने इस आयोजन पर तो कुछ नहीं कहा लेकिन यह ज़रूर कहा कि जब राम का मंदिर ही नहीं है तो इस भव्य मूर्ति की ज़रूरत ही क्यों? उन्हें आकर्षण का केंद्र बनाना ज़रूरी है या फिर उनके प्रति भक्तों की श्रद्धा बढ़े इस दिशा में प्रयास होने चाहिए। भगवान कतई बाजारु तरीके से प्रस्तुत नहीं किए जाने चाहिए। इससे श्रद्धा बढ़ती नहीं, बल्कि घटती है।

 धर्म संसद का तीन दिन का आयोजन वाराणसी में हुआ। इसमें पूरे देश से एक हज़ार से भी ज़्यादा साधु-संत पहुंचे। इस पूरे आयोजन को देखने-सुनने के लिए बड़ी तादाद में श्रद्धालु पहुंचे थे। राम मंदिर बनाने के लिए कानूनी तरीके से चलने पर ज़ोर देनेे के साथ ही यह अपील की गई कि आम सहमति से भव्य राम मंदिर बने।

अयोध्या में ही राम मंदिर बनाया जाना चाहिए क्योंकि पिछले 70 साल से यह आंदोलन आज़ाद भारत में चल रहा है। इसे बनाने के लिए ही श्रद्धालुओं ने भाजपा को आम चुनाव में बहुमत से कहीं ज़्यादा अच्छी स्थिति में जिताया और सत्ता दी। इस सरकार के चार साल पूरे हो रहे हैं लेकिन जानबूझ कर उस और ध्यान नहीं दिया गया। उसकी बजाए सरयू तट पर राम की भव्य मूर्ति बनाने के फैसले पर काम भी शुरू हो गया। इससे जाहिर है कि श्रद्धालुओं की चिंता सरकार को नहीं है। भव्य राम मूर्ति निर्माण पर ‘धर्म संसद’ के जबरदस्त विरोध पर प्रतिक्रिया आने लगी है। हालांकि वे भी सतर्कता से ही अपनी बात कह रहे हैं।

गुजरात में बनी सरदार पटेल की भव्य मूर्ति के अनावरण समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी थे। उन्हें यह देख कर बहुत अच्छा लगा। उन्होंने तय किया कि प्रदेश की जनता से ‘भव्य राममूर्ति निर्माण’ में धन लेकर इसका निर्माण सरयू किनारे ही किया जाए। यह मूर्ति देश और दुनिया के विभिन्न देशों में बनी मूर्तियों की तुलना में सबसे ऊँची होगी। अपने इस विचार पर अमल के लिए फौरन आदेश जारी किए।

वाराणसी में हुई धर्म संसद ने अपने तीन दिन के आयोजन में राम मंदिर के साथ ही राम की भव्य मूर्ति के प्रस्ताव और अमल पर चिंता जताई। उन्होंने इसे ‘राम भक्तों के साथ धोखा’ बताया। परमहंस दास ने कहा कि धर्म संसद गैर राजनीतिक साधु-संतों की देशव्यापी संस्था है। इस महत्वपूर्ण संस्था ने राम मंदिर निर्माण की मांग की। लेकिन राम की भव्य मूर्ति निर्माण को बेतुका बताया। ‘राम आराधना में बसते हैं मूर्ति में नहीं’। मूर्ति को हमेशा छत के नीचे रखा जाता है, खुले में नहीं, जहां धूल-धक्क्ड़ हो, पशु-पक्षी बैठें और गंदा करें। सरकार श्रद्धालुओं को भव्य मूर्ति का सपना न दिखाए। पहले राम मंदिर अयोध्या में बनाए।