‘मुझे अफसोस है कि मैंने भारत के विकास की कहानी दुनिया भर में साझा की’

भारत में इस बात को लेकर एक गर्व की भावना रहती है कि आपके पास धन-संपत्ति होने के बाद भी उसका दिखावा न करें. इसके पीछे विचार है कि हम एक गरीब देश हैं और ऐसा करना गरीबों के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है. जब आपकी उम्र 26 साल थी तब की बात और है लेकिन अब आप इस बारे में क्या सोचते हैं?
देखिए, मैं किसी तरह के पाखंड में विश्वास नहीं करता. मैं संसद के अपने कई साथियों को जानता हूं जो खादी में दिखते हैं, एंबेसडर में चलते हैं लेकिन उनके घरों में इतना ज्यादा पैसा है जितना मेरे पास भी नहीं है.

अच्छा चलिए, किंगफिशर एयरलाइंस की बात करते हैं. लोग कहते हैं कि विजय माल्या अपनी छवि से काफी अलग हैं. मुझे किसी ने एक वाकये के बारे में बताया था कि एक बार आपने यॉट में पार्टी आयोजित की थी. इसमें काफी बड़े-बड़े लोग शामिल हुए थे. जब सभी लोग पार्टी का मजा ले रहे थे तब नीचे डेक में आप अगले सप्ताह होने वाले किसी कारोबारी सौदे की तैयारी कर रहे थे. किसी ने मुझे यह भी बताया है कि आप अपने बिजनेस से जुड़े हर पहलू की बारीकियों को बखूबी समझते हैं. ऐसे में क्या किंगफिशर एयरलाइंस शुरू करना कारोबारी चूक थी?
मैं अपने काम को लेकर जुनूनी हूं. मैंने अपने पिता जी से सीखा है कि कारोबार के हर पहलू की आपको पूरी समझ होनी चाहिए. मैं बढ़ा-चढ़ाकर नहीं कह रहा हूं लेकिन पिता जी के समय हर फैक्टरी से जो लेन देन होता था उसका हर एक बिल चेयरमैन के ऑफिस तक आता था. वह व्यक्ति केंद्रित प्रबंधन का श्रेष्ठ उदाहरण था. मैं जब अमेरिका गया तो मैंने वहां से टीम बनाने और टीम से काम कराने की कला सीखी. आज यूनाइटेड स्प्रिट अपने क्षेत्र की दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी है वहीं युनाइटेड ब्रेवरीज बाजार के 50 फीसदी से ज्यादा हिस्से पर काबिज है. और इस उपलब्धि का पूरा श्रेय उन लोगों को है जिन्हें मैंने विभिन्न कामों की जिम्मेदारी सौंपी और वे समूह को आगे ले गए.

अब हम किंगफिशर एयरलाइंस पर आते हैं. यदि हमें इस क्षेत्र से इतनी उम्मीद नहीं होती तो हम कभी इस क्षेत्र में कदम नहीं रखते. मैंने इस कंपनी में खुद के 3,000 करोड़ रुपये लगाए थे. मुझे इसमें जोखिम समझ में आता तो मैं ऐसा बिल्कुल नहीं करता.

तो आखिर गड़बड़ कहां हुई?
हां, मैं उसी पर बात कर रहा हूं. किंगफिशर एक समय भारत की सबसे बड़ी एयरलाइन कंपनी बन गई थी. प्रतिदिन इसकी 490 उड़ानें होती थीं. लेकिन 2008 के बाद अचानक कच्चे तेल के दाम बढ़ गए. इसकी कीमत 60 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 140 डॉलर प्रति बैरल तक हो गई. किसी भी एयरलाइन कंपनी के लिए ईंधन सबसे बड़ा खर्च होता है. यहां हमारा खर्च सौ फीसदी बढ़ गया. ऐसे में मैंने कुछ राज्य सरकारों से तेल पर लगाया जाने वाला एड वेलोरम टैक्स (मूल्यवर्धित कर) कम करने की बात कही लेकिन इसके लिए सरकारों ने मना कर दिया. मैं उनसे बस यह कह रहा था कि आप अपना टैक्स लो लेकिन जो कीमत अचानक बढ़ गई है उस पर तो कर मत लगाओ. लेकिन हमारे यहां सरकारों को अपना खजाना भरने से मतलब है चाहे इस वजह से कारोबारियों की हालत जो हो. हमने केंद्र सरकार से रियायत देने की बात की लेकिन इसके लिए भी हमें मना कर दिया गया. फिर हमने प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की अनुमति मांगी लेकिन वह भी नहीं मिली. तो कुल मिलाकर सरकार ने उड्डयन क्षेत्र को बचाने के लिए कुछ नहीं किया. सबसे बड़ी एयरलाइन होने की वजह से किंगफिशर एयरलाइंस पर सबसे बुरा असर पड़ा. लेकिन समय बीतने के साथ हालात में कुछ सुधार हुआ और क्षेत्र में कुछ स्थिरता आ गई. फिर मुंबई पर आतंकवादी हमला हो गया. इससे भी एयरलाइंस क्षेत्र की दिक्कतें बढ़ गईं. हम सरकार के पास मदद मांगने गए लेकिन एक बार फिर हमें निराशा हाथ लगी. धीरे-धीरे कच्चे तेल की कीमतें सौ डॉलर प्रति बैरल हो गईं और संकेत मिलने लगे कि कीमत इससे नीचे नहीं आएगी. इस समय हमारी कंपनी का वित्तीय संकट काफी बढ़ गया. हमने सरकार से कहा कि कंपनी के कर्ज की शर्तों पर रियायत दी जाए लेकिन वह भी हमें नहीं मिली. हम रिजर्व बैंक द्वारा बनाए गए तंत्र ‘कॉरपोरेट डेट रिस्ट्रक्चरिंग’ में गए लेकिन चूंकि एयरलाइन विजय माल्या की थी इसलिए कंपनी को इसकी सुविधा नहीं मिली. हम और भी सरकारी विभागों में गए लेकिन हर जगह हमारे लिए दरवाजे बंद थे. किंगफिशर एयरलाइंस भारत की सबसे बड़ी एयरलाइन कंपनी थी जो देश के कई शहरों को जोड़ती थी. इसका फायदा भी आखिर देश के आर्थिक विकास में था, लेकिन इसके लिए किसी ने हमें श्रेय नहीं दिया. एक दूसरी महत्वपूर्ण बात यह है कि मैंने कभी भी सरकार से कर्ज माफ करने की बात नहीं कही और न भविष्य में कहूंगा. आज आप देखिए देश में बड़े औद्योगिक समूहों को कोई महत्व नहीं दिया जा रहा है. मेरे कई उद्योगपति दोस्त हैं और यह कहते हुए मुझे दुख है कि उनमें से ज्यादातर देश में निवेश करना नहीं चाहते. यह भी देखिए किस तरह से हमारा टैक्स डिपार्टमेंट मल्टीनेशनल कंपनियों के पीछे पड़ा है. चाहे बात माइक्रोसॉफ्ट की हो या वोडाफोन की, कई बड़ी कंपनियों के साथ यह हो रहा है. ऐसा माहौल देश में निवेश को हतोत्साहित करता है. यह अच्छी बात है कि आप खाद्य सुरक्षा कानून पास करें. भूमि अधिग्रहण कानून पारित करके किसानों से कहें कि अब आपकी जमीन कोई जबरदस्ती नहीं ले सकता. लेकिन बिना उद्योग के, विकास के,  बड़े औद्योगिक समूह जो लोगों को रोजगार उपलब्ध करवाते हैं और कई दूसरी चीजों में योगदान देते हैं, इसके बिना क्या हम अपना लक्ष्य हासिल कर सकते हैं. मेरे विचार से बिल्कुल नहीं. यदि सरकार के पास कोई दूसरा तरीका है तो ठीक है. हम चुपचाप उसके दर्शक बनने के अलावा कुछ नहीं कर सकते.

तो क्या हम आने वाले समय में किंगफिशर एयरलाइंस को फिर पहले की तरह उड्डयन क्षेत्र में उड़ानें भरते हुए देखेंगे?
हां, इसकी पूरी संभावना है.

भारत के आर्थिक विकास की कहानी के पीछे सोच है कि यदि भारतीय कारोबारियों को अनुकूल माहौल मिले तो वे असाधारण सफलता हासिल करते हैं. आपसे पूछना चाहता हूं क्या आज भी आप देश के बारे में आशान्वित हैं?
आज से कुछ साल पहले मैं अपने कारोबारी दोस्तों के साथ जहां-जहां अंतरराष्ट्रीय मंचों पर गया वहां मैंने अपने साथियों के साथ भारत के विकास की कहानी को दुनिया से साझा किया. मुझे याद है कि आज से तकरीबन पांच साल पहले अमेरिका के सांटा क्लारा में अमेरिका में रह रहे भारतीयों के सामने अपनी बात रखते हुए मैंने कहा था कि जिस वजह से आपके पुरखों ने भारत छोड़ा था आज उसी वजह से आपको भारत जाने की जरूरत है. लेकिन आज मुझे अपनी उस बात पर अफसोस होता है.

सबसे आखिरी सवाल आपसे यह कि पिछले दस साल से आप संसद सदस्य हैं. इस बीच आपने किंगफिशर एयरलाइंस शुरू की. उसके बाद इससे जुड़ी कई चुनौतियों का भी सामना किया. मैं यह जानना चाहता हूं कि क्या इस सबने आपको एक अधिक समझदार व्यक्ति बनाया है.
इसके जवाब में मैं बस इतना कहना चाहता हूं कि हर एक चीज आपकी समझ बढ़ाने का काम करती है और दूसरी बात यह है कि बिना गलतियां किए आप अपना जीवन पूरा नहीं कर सकते.

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