मानव तस्करी एक विकृति

प्रौद्योगिकी के आगमन के बावजूद, जिसने सूचना और ज्ञान की उपलब्धता को सरल किया है; बुनियादी शिक्षा की कमी, बेरोज़गारी और ग़रीबी के परिणामस्वरूप मानव तस्करी, यौन शोषण, जबरन श्रम, भीख माँगना और बच्चों के शोषण के मामले बढ़े हैं। निस्संदेह दुनिया भर में मानव तस्करी को ड्रग्स और हथियारों के बाद तीसरा सबसे आकर्षक अवैध व्यापार माना जाता है। हालाँकि यह अपराध है। ‘तहलका’ की जाँच से यह भी पता चला है कि नेपाली बच्चों को भी विभिन्न क्षेत्रों में जबरन मजदूरी के लिए भारत लाया जाता है। भारतीय महिलाओं को पैसे और यौन शोषण के लिए मध्य पूर्व में तस्करी कर लाया जाता है।

भारत में मानव तस्करी को संविधान में दिये गये मौलिक अधिकार के रूप में प्रतिबन्धित किया गया है; लेकिन एक संगठित अपराध के रूप में मानव तस्करी जारी है। मानव तस्करी एक ऐसा अपराध है, जिसे ज़्यादातर पुलिस में कम रिपोर्ट किया जाता है। आज इसे रोकने और पीडि़तों के पुनर्वास के लिए गम्भीर नीतिगत पहल की आवश्यकता है। भारत की नयी शिक्षा नीति की प्रशंसा की गयी है। लेकिन तस्करी की जाँच के लिए मानव अधिकारों का पाठ्यक्रम अभी भी हमारी शिक्षा में शामिल किया जाना बाक़ी है।