‘महिलाओं पर अंगुली उठाना हमेशा से आसान रहा है’

सिटीलाइट्स में आपकी भूमिका काफी सघन है. इसके लिए क्या तैयारी करनी पड़ी?
मैंने राखी की भूमिका निभाई है जो राजस्थान के एक गांव की रहने वाली है. यह भूमिका मेरे निजी जीवन से एकदम उलट थी. उसकी मनःस्थिति को समझने के लिए हंसल सर ने हमें तीन सप्ताह के लिए राजस्थान के पाली गांव में भेजा. हमने वहां स्थानीय लोगों के साथ वक्त बिताया और उनके रहन सहन तथा बोली-भाषा पर ध्यान दिया.

कहा गया कि आपको यह भूमिका राजकुमार राव से रिश्ते के कारण मिली है. आप इसे लैंगिक भेदभाव मानती हैं?
बिल्कुल. महिलाओं पर अंगुली उठाना हमेशा से आसान रहा है. आपने कितनी बार ऐसा देखा है कि किसी अभिनेता को वरिष्ठ अभिनेत्री के साथ करियर शुरू करने पर कठघरे में खड़ा किया गया हो? लेकिन मैं इसके लिए मानसिक रूप से तैयार थी और मुझे इससे कोई फर्क नहीं पड़ा. लोगों ने यह तक ध्यान नहीं दिया कि इस भूमिका के लिए मैंने छह बार ऑडीशन दिया लेकिन मुझे पूरा विश्वास है कि मैंने अच्छा काम किया है. हंसल मेहता और मुकेश भट्ट जैसे फिल्मकार किसी को इसलिए काम नहीं देते कि वह फिल्म के नायक की गर्लफ्रैंड है.

क्या आप फिल्म की रिलीज से पहले घबराई हुई हैं?
नहीं मैं आत्मविश्वास से भरी हुई हूं. व्यक्तिगत तौर पर कहूं तो मुझे घर पर खाली बैठने से डर लगता है. मैं अपने संघर्ष भरे दो सालों की बहुत कद्र करती हूं. मैं उन्हें दोबारा नहीं जीना चाहती

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