भेष बदलकर पुलिस कमिश्नर ले रहे थानों का जायज़ा

एंबुलेंस वाले ज़्यादा रुपये माँग रहे हैं। सरेआम पीडि़त लोगों को लूट रहे हैं। उनके ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज करें और कार्रवाई करें। पिंपरी पुलिस स्टेशन में ड्यूटी पर तैनात पुलिस वालों ने कहा कि यह हमारा काम नहीं है। साथ ही उनके बातचीत करने का व्यवहार भी ग़लत पाया गया। आयुक्त पिंपरी पुलिस स्टेशन के कामकाज से नाख़ुश हुए।
पुलिस आयुक्त का वेशभूषा बदलकर पुलिस थानों के कामकाज का जायज़ा लेने के पीछे इतना ही मक़सद था कि पुलिस का आम लोगों के प्रति कैसा व्यवहार है? शिकायतकर्ताओं की शिकायतें सुनी जाती हैं या नहीं? रात के समय पुलिस किस अवतार में नजर आते हैं? सोते हैं या जागते हैं? पुलिस आयुक्त कृष्ण प्रकाश ने एक सम्मेलन में पुलिस वालों को सम्बोधित करते हुए कहा था कि थानों में आने वाला व्यक्ति तनाव, चिन्ता और परेशानियों से भरा होता है।

वह त्रस्त होकर ही अपनी शिकायतें पुलिस थाने लेकर आता है। लेकिन जब वह पुलिस से मिलकर वापस जाए, तो चेहरे पर समाधान, सन्तुष्टि लेकर जाए। लेकिन वर्तमान में क्या पुलिस थानों में ऐसा हो रहा है? इसी का मुआयना करने रात के समय वह तीन थानों में वेश बदलकर गये थे। उन्होंने कहा कि इससे पुलिस थानों के कर्मचारियों में अपने काम के प्रति जागरूकता आयेगी। डर बना रहेगा। कामकाज में पारदर्शिता दिखायी देगी।

पुलिस आयुक्त ने कहा है कि ऐसा ही औचक निरिक्षण आगे भी होते रहेंगे। इसके आगे वह अवैध धन्धों के अड्डों, देर रात तक चलने वाले होटलों, बार आदि में ग्राहक के रूप में जाएँगे। जिन पुलिस थानों की सीमा में और थानों के अन्दर ग़लत काम पाया जाएगा, वहाँ के थानेदार नपेंगे। शहर में आपराधिक घटनाएँ शून्य (जीरो टॉलरेंस) होने के साथ 100 फ़ीसदी अवैध धन्धे, माफियागीरी, भाईगीरी बन्द होनी चाहिए। शहर में अमन-चैन बरक़रार रखना उनका एकमात्र लक्ष्य है। इसी लक्ष्य की पूर्ति के लिए पिंपरी चिंचवड शहर की पुलिस को जनता की सन्तुष्टि और हित के हिसाब से काम करना होगा।

उन्होंने कहा कि मेरे शब्दकोष में ग़लत काम के लिए माफ़ी नाम का शब्द नहीं है। बता दें कि जबसे कृष्ण प्रकाश पुणे के पिंपरी चिंचवड़ के पुलिस आयुक्त बने हैं, तबसे अब तक कई पुलिस निरीक्षक, कर्मचारी बरख़ास्त हो चुके हैं। कई गिरोहबाज गुण्डों पर मकोका और तड़ीपार के तहत कार्रवाई हो चुकी है। कई गिरोह और गुण्डे रडार पर हैं। अब पुलिस वालों को पुरानी खब्बूगीरी की परम्परा छोडऩी होगी और इस सख़्त पुलिस आयुक्त के ईमानदारी, कर्मठता और सच्चाई साँचे में फिट बैठना होगा।