भूख से हुईं न जाने कितनी मौतें; सरकार बेखबर

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झारखंड में भूख से हुई दूसरी मौत ने सरकार के विकास की पोल खोल दी है। एक महीने के भीतर झारखंड में भूख से दम तोडऩे वाले दूसरे व्यक्ति का नाम है वैद्यनाथ रविदास। काले हीरे की खान कहे जाने वाला धनबाद का रहने वाला वैद्यनाथ रविदास रिक्शा चालक था। वह कई दिनों से बीमार भी था। वैद्यनाथ रविदास रिक्शा चला कर अपने पांच बच्चों सहित अपने परिवार का लालन पालन करता था। रिक्शा से ही कभी कभी एक टाइम के खाने का प्रबंध हो पाता था। कभी कुछ नहीं। मौत के दो दिन पहले से रविदास के घर में खाने को कुछ नही था। उसके बच्चे भी भूख से बिलक रहे थे। रविदास की मौत के बाद ही लोगों का सहयोग मिलने के बाद उनके बच्चों को भोजन नसीब हो पाया। अगर बाबूओं ने रविदास के नाम का राशन कार्ड बनाने में उनका सहयोग कर दिया होता तो आज रविदास की मौत नही होती।
मृतक वैद्यनाथ रविदास के भाई जागो रविदास के नाम से पहले राशन कार्ड था, जिससे परिवार को राशन मिल जाता था। पर चार साल पहले जागो रविदास की मौत हो गयी। जागो रविदास के मौत के बाद उनके परिवार को राशन मिलना बंद हो गया। जागो रविदास की मौत के बाद मृतक वैद्यनाथ रविदास ने भी अपने नाम से राशन कार्ड बनवाने (ट्रांसफर) की पूरी कोशिश की। स्थानीय जनप्रतिनिधि अैर ब्लॉक के बाबुओं के खूब चक्कर लगाए। पर उसकी सारी कोशिशें नाकाम रहीं। राशन कार्ड में नाम न होने की बजह से बीपीएल में उनका सालों पुराना नाम भी हटा दिया गया। इस कारण उसे सरकार से बीपीएल के नाम से मिलने वाली सारी सुविधाओं से वंचित होना पडा़। निश्चित तौर पर यह जांच का विषय है कि रविदास का राशन कार्ड किन कारणों से नहीं बना और इसके लिए कौन कौन से लोग दोषी हैं। पर सरकार दिनों दिन मूलभूत आवश्यकताओं को पूरी करने वाले सिस्टम को, जिस तरह से अैर मुश्किल बनाते जा रही है उस हिसाब से इस प्रकार की मौतें झारखंड में अैर भी देखने को मिल सकती है।
सिमडेगा जिले में 28 सितंबर को ही 11 साल की बच्ची संतोषी की मौत हो गयी थी। मौत की वजह स्पष्ठ थी। संतोषी की मौत की वजह भूख थी। उस बच्ची ने चार दिन से कुछ नहीं खाया था। फिर पेट में मरोड़ उठा और दर्द से उसकी मौत हो गयी। संतोषी भी बचती अगर उसकी मां को राशन कार्ड से अनाज मिल पाता। संतोषी की मां कई दिनों से डीलर के चक्कर काटती रही पर आधार से उसका राशन कार्ड लिंक नही होने के कारण उसे राशन नहीं मिला। और संतोषी को भोजन नही मिल पाया अैर उसकी मौत हो गयी। संतोषी की मौत के बाद सरकार हरकत में तो ज़रूर आई। संतोषी की मां को पचास हजार रुपये की मदद भी की गई। पर संतोषी की मां कोयली देवी ने सच बोल कर बड़ी गलती कर दी। गांव की मुखिया सुनीता डांग ने कोयली को डराया धमकाया अैर घर तोड़ देने की धमकी दी। ऐसा इसलिए उसने किया क्योंकि कोयली ने बेटी संतोषी के मौत के बाद स्थानीय जनप्रतिनिधि सहित डीलर की पोल खोल दी थी। सुनीता का आरोप है कि कोयली ने भूख से हुई संतोषी की मौत बता कर पूरे गाव को बदनाम किया है। सुनीता का कहना है कि संतोषी की मौत भूख से नही बल्कि बीमारी से हुई है। सुनीता और गांव के ऐसे ही कुछ दबंग लोगों के डर से कोयली को गांव छोड़ कर जाना पड़ा। न प्रशासन आगे आया न सरकार। सरकार ने उसकी बेटी संतोषी की मौत के बाद उस पर नजर बनायी हुई है क्योंकि विपक्ष इसे अब बडा़ मुद्दा बनाकर सड़कों पर धरना प्रदर्शन कर रहा। अभी कोयली को अब भी राशन व सुरक्षा भी उपलब्ध नहीं करायी गयी है जिससे की गांव वाले उसे हानि न पहुंचा सके। संतोषी और वैद्यनाथ रविदास की मौत की खबर के बाद इस प्रकार के घटनाओं का पर्दाफाश हो पाता है। पर बिचौलियों और कमीशनखोरों को आधार और अन्य नियम कायदे से ज़रूरतमंद को उनकी ज़रूरत से वंचित रखने का अच्छा कारण मिल गया। जिससे सरकार और उनके नुमांइदे बेखबर हैं और विचौलिये इसका भरपूर लाभ उठा रहे हैं। सरकार के विभिन्न स्तर के कर्मचारी अैर वार्ड स्तर के जनप्रतिनिधि के असहयोग के कारण भूख से मौंतों की घटनाएं भले ही घट रही हों पर यह साफ है कि सरकार की पकड़ रुट लेवल पर बिल्कुल भी नहीं है। आधार से राशन कार्ड को जोडऩे के बाद झारखंड के कई ऐसे गांव हैं जिन्हे काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। जब तक उनके अंगूठे को स्कैन नही किया जाता तब तक उन्हें राशन नही दिया जाता।
नेटवर्क का प्रोब्लम हमेशा ऐसे कई गांवों में बना रहता है कि पूरे गांव को अंगूठा स्कैन कराने के लिए गांव के पहाड़ पर चढऩा होता है पहाड़ पर भी नेटवर्क मिला तो राशन मिल पाता है वरना अगले दिन दुबारा पूरा गांव पहाड़ पर चढ़ता है। इसमे बूढ़े बुर्जुग लेगोंं को काफी दिक्कतें होती हैं। वैसे भूख से मौत के बाद खाद्य आपूर्ति मंत्री सरयू राय ने सभी राशन दुकानों पर अपवाद पुस्तिका रख कर उन्हें भी राशन देने का निर्देश दिया है जिनका आधार कार्ड नहीं बना पाया है या राशन कार्ड आधार से लिंक नही है। मगर भात भात मांगते मांगते बच्ची संतोषी की मौत तो हो चुकी है। उसे तो बाबुओं की ऊपरी कमाई की आस ने मारा।