‘भूख न लगे, तो कारण पचासों !’

अब एक बेहद महत्वपूर्ण सलाह.

भूख खत्म हो तो सबसे पहले यह पड़ताल कर लें कि आप किसी भी तरह की कोई गोलियां तो नहीं ले रहे हैं. ऐलोपेथी से लगाकर आयुर्वेद तक की बहुत सी दवाइयां आपकी भूख पर असर डाल सकती हैं. डॉक्टर को पूछें. दवा की दुकान से उसका रेपर लेकर पढ़ डालिए. इसमें साइड इफेक्ट्स लिखे रहते हैं.

एक आखिर बात जो रोचक भी है.

भूख मन का भी खेल है. पिछली बार हमने बताया था कि दिमाग का हाइपोथैलेमस वाला हिस्सा ही भूख का नियंत्रण केंद्र है. मन, इच्छा, मूड, सोच, अवचेतन ये सब इस केंद्र पर अपना असर डालते हैं. इसलिए कई मानसिक बीमारियों में भूख घट,बढ़ सकती है. खासकर, जीरो फिगर को समर्पित कोई लड़की यदि दिन-रात अपने वजन का ही सोचा करे तो ‘एनोरेक्सिया नर्वोसा’ जैसी बीमारी तक पहुंच सकती है. खाना बंद. और व्यायाम, जिम-खूब. दुबले ऐसे हो रहे हैं कि हड्डे निकल आए हैं, पर अभी भी संतुष्ट नहीं. फिगर ठीक रखनी है. दुनिया चिंतित है या हंस रही है, अपने दुबलेपन के लिए जान देने को राजी हैं. माहवारी बंद हो गई है. हड्डियां कमजोर. इनमें से पांच प्रतिशत तो मर तक सकती हैं. पर मन है कि कहता है कि खाओगी तो मोटी हो जाओगी. कुछ तो खाती हैं और उंगली डालकर उल्टी कर देती हैं, पर जुलाब लेकर निकाल देती हैं. ये सब गंभीर मानसिक रोग हैं. इनका इलाज फिजीसियन तथा मनोरोग विशेषज्ञ मिल कर करते हैं. घर में ऐसा कोई हो तो उसे यूं ही अकेला न छोड़ दें. उसे डॉक्टर के पास ले जाएं.

मैं फिर कहूंगा कि टॉनिकों के धोखे में न पड़ें. पहले जानें कि भूख क्यों खत्म हो रही है?

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