बॉयलर फटा, मारे गए न जाने कितने मज़दूर

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वह इसी साल नवंबर महीने का पहला ही दिन था। उत्तरप्रदेश के रायबरेली जिले के ऊंचाहार में है नेशनल पावर थर्मल प्लांट की फिरोज गांधी इकाई। बुधवार की दोपहर में इस थर्मल पावर प्लांट में भारी धमाका हुआ। कहते हैं चालीस से भी ज्य़ादा लोग मारे गए और सौ से ज्य़ादा घायल हुए। यह एक बड़ी औद्योगिक दुर्घटना थी। मरने वाले और घायल वे मज़दूर थे जो ठेके पर काम करने के लिए यहां लगाए गए थे। कांट्रैक्टर जो इन मज़दूरों को यहां लाया था उसे खरोंच तक नहीं आई। मज़दूरों का ब्यौरा भी उसके ही पास है। एनटीपीसी के पास नहीं।
बेहद सुरक्षित तरीके से काम का दावा करने वाले औद्योगिक संस्थानों में एनटीपीसी की भी तमाम इकाइयां गिनी जाती हैं। हालांकि एक अर्से से यहां भी सुरक्षा में ढील-पोल की खबरें आती रही हैं। हालांकि इन तमाम बातों से प्लांट के प्रवक्ता इंकार करते हैं। एनटीपीसी की ऊंचाहार इकाई में नई इकाई नंबर- छह में यह हादसा हुआ। इस इकाई में छह महीनों से ही काम होना शुरू हुआ है। इस प्लांट के प्रवक्ता के अनुसार गर्म गैंसों और धुंए के चलते यह दुर्घटना हुई। प्रभावित इकाई में बॉयलर में धमाका होने से यह हुआ। जब यह दुर्घटना हुई तो यूनिट- छह के दायरे में जो भी मज़दूर खड़े थे या आस पास काम कर रहे थे वे धमाके के असर में कई मीटर दूर जा गिरे। यह दुर्घटना दोपहर बाद साढ़े तीन बजे हुई।
प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस दुर्घटना पर अफसोस जताया। उन्होंने ग्यारह नवंबर को प्लांट का दौरा किया। उन्होंने कहा सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए जाएंगे और परिसर में पौधारोपण भी किया। कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने अपना गुजरात दौरा रोक कर दो नवंबर को ही प्लांट में घायल मज़दूरों से अस्पताल में जाकर मुलाकात की। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने उत्तरप्रदेश सरकार को निर्देश दिया कि इस मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए और रपट दी जाए। केंद्रीय बिजली मंत्री आरके सिंह ने दुर्घटना स्थल का दौरा किया। मारे गए लोगों के परिवारों को बीस लाख रुपए का मुआवजा देने का ऐलान किया। एनटीपीसी के कार्यकारी निदेशक को पूरे मामले की जांच करने को कहा गया है। राज्य सरकार ने मारे गए लोगों को रुपए दो लाख और गंभीर तौर पर घायलों को पचास हजार और कुछ घायल लोगों को रुपए पच्चीस हजार का मुआवजा देने की घोषणा की है।
ऊंचाहार एनटीपीसी के प्लांट नंबर छह में हुई दुर्घटना में मारे गए मज़दूरों में कई अपने परिवारों में अकेले कमाने वाले थे। एनटीपीसी प्रशासन, उत्तरप्रदेश प्रशासन के अधिकारी और मज़दूरों के ठेकेदारों में अब मुआवजा राशि परिवारों को दिलाने के तौर-तरीके और प्रमाणों पर खासा हंगामा है। मजदूरों के परिवारों के सामने जीवन चलाने का संकट सिर पर आ पड़ा है। उघर राज्य श्रम मंत्रालय के अधिकारी रायबरेली से पहुंच कर ठेके पर काम कर रहे मजदूरों के परिवारों को सांत्वना देकर लौट भी चुके हैं। लेकिन मसला ज़्यों का त्यों है।
बिजली पैदा करने वाले ज्य़ादातर पावर संस्थानों में बॉयलर की सप्लाई का काम आटोमेटिक है। लेकिन ऊंचाहार की इकाई छह में कोयले के जलने से क्लिकर या लेप बन जाते हैं। इन्हें श्रमिक ही साफ करते हैं। इनकी समुचित सफाई न होने पर ये नीचे एश आउटलेट को बंद कर देते हैं जिससे बॉयलर पर दबाव बढ़ता है और बॉयलर के चारों ओर के पानी के वाल्व पिघलने लगते हैं। हॉट फ्ल्यू गैसों और ऊंचे तापमान की भाप इससे निकलती है। यह एश से मिलती हैं। उस समय तापमान दौ सौ डिग्री सेल्सियस होता है जिससे बहुत तेज धमाका होता है।
ठेके पर मज़दूरों को लगाना और उनका ब्यौरा अपने पास न रखना एक सरकारी उपक्रम का
बेहद ढीला-ढाला रवैया है । एक अधिकारी ने अफसोस जताते हुए कहा कि नहीं मालूम, छत्तीसगढ़ के किस गांव या जिले से ये मज़दूर लाए गए थे और उनका पूरा ब्यौरा क्या है। एनटीपीसी में फोटो लेने की मनाही है। जो मज़दूर मारे गए, उनके परिवारों को मुआवजा मिले इसे भी जानने परखने की जिम्मेदारी न तो अब एनटीपीसी ले रहा है न श्रम अधिकारी और न केंद्र और राज्य सरकारें। एनटीपीसी चैयरमैन और प्रबंध निदेशक बातचीत नहीं करते सिर्फ प्रेस रिलीज ज़रूर जारी होती है।
एनटीपीसी ऊंचाहार के ही कुछ अधिकारी अपना नाम न छापने के अनुरोध के साथ बताते हैं कि हादसे के बाद जब हम पहुंचे तो हमने शरीर के क्षत-विक्षत हिस्से देखे। छत पर जो तार थे उन पर भी शरीर के हिस्से थे। ऐसी दुर्घटना कभी न देखी और न सुनी। एक्जक्यूटिव इन मज़़दूरों के साथ सोलह घंटों से भी ज्य़ादा समय काम करते थे।
ऊंचाहार में मज़दूरों से ओवरटाइम कराना आम बात है। चार मज़दूरों का काम एक मज़दूर से कराया जाता है। इकाई के कंट्रोल रूम तक में एक मजदूर ही होता है।
सरकार की ओर से दबाव था एनटीपीसी की यह इकाई पचास हजार मेगावाट बिजली देने लगे। अब इस काम के पूरा होने में छह से आठ महीने की और देर हो जाएगी। यहां की एक इकाई पानी और कोयले के अभाव में अर्से से बंद पड़ी है।
सरकार ने संस्थान में जांच कमेटियां बना दी हैं। लेकिन जांच कमेटी की रपट पर शायद ही कभी अमल हो। शायद ही कभी कोई कमेटी दुर्घटना की वजहों की पड़ताल करते हुए उन मज़दूरों के नाम-पते-घर-परिवार का पता करे जिससे घोषित मुआवजा कम से कम उन तक पहुंच सके जो मारे गए पर जिनकी जानकारी किसी को नहीं है।