बेमेल मुकाबले में छिपी राजनीति

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कांगे्रस के दिग्गज और लोकप्रिय नेता दिग्विजय सिंह पर भोपाल में मुकाबला खासा दिलचस्प है। एक राजघराने से जुड़े होने के कारण उन्हें प्यार से दिग्गी राजा भी भी कहा जाता है। संस्कृति, समाज, साहित्य और हिंदू धर्म की बारीकी से जानने वाले इस राजनीतिक का देश भर में काफी सम्मान है। मध्यप्रदेश में वे लगातार दो अवधि मुख्यमंत्री रहे। पराजय के बाद तय किया कि वे अब दस साल तक चुनाव नहीं लड़ेंगे। दस साल तक वे किसी अज्ञातवास में नहीं गए। वे पार्टी के संगठन को मजबूत करने और घर-परिवार को ठीक करने में व्यस्त रहे। देश में बढ़ते उग्र हिंदुत्व का विरोध उन्होंने हमेशा किया। अपनी हिंदू चेतना को वेद -शास्त्रों के साथ विकसित करने, नर्मदा के किनारों के प्राकृतिक सौंदर्य, भाषा और गांवों की संस्कृति और समस्याओं को अध्ययन के लिए उन्होंने अपनी पत्नी के साथ 1100 किलोमीटर पदयात्राा की। इस दौरान युवाओं से, बुजुगों से उनका खासा जनसंपर्क बढ़ा।

आम चुनाव 2019 में कांग्रेस ने दिग्विजय सिंह को भोपाल से टिकट दिया। उनके मुकाबले में भाजपा ने आतंकवादी होने के आरोप में जेल से ज़मानत पर छूटी प्रज्ञा ठाकुर को खड़ा किया है। यह सिफारिश पूरे प्रदेश में माना कहलाने वाले पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज चौहान की रही है। जिस पर भाजपा आलाकमान ने अपनी मुहर लगा दी।

खुद प्रधानमंत्री जेल में मिली अपनी भावनाओं की तुलना प्रज्ञा ठाकुर को मिली यातनाओं और सजा से करते हैं। केंद्र में भाजपा गठबंधन में शामिल रिपल्किन पार्टी के अध्यक्ष और केंद्र सरकार में मंत्री रामदास अठावले प्रज्ञा ठाकुर को टिकट देने का विरोध करते हैं। उन्होंने शनिवार को भोपाल में कहा कि माले गांव धमाके में प्रज्ञा ठाकुर को एटीएस ने बतौर आरोपी गिरफ्तार किया था। एटीएस के पास काफी साक्ष्य हैं। उन्होंने प्रज्ञा के उस बयान की भी निंदा की जिसमें एटीएस प्रमुख को अपने ‘श्राप’ से करने की बात कही थी। अठावले ने कहा, देश को आतंकवादियों से बचाने की कोशिश में हेमंत करकरे की मौत हुई थी।

करकरे पर प्रज्ञा के दावे से कतई सहमत नहीं हूं। उसके ऐसे बयान की हम निंदा करते हैं। अगर हमारी पार्टी में उसे उम्मीदवार बनाने की बात उठती तो हम कतई उसे टिकट नहीं देते।

भाजपा की नेता और पूर्व केंद्रीय जल संसाधन मंत्री साध्वी उमा भारती ने कहा कि प्रज्ञा ठाकुर की तुलना उनसे नहीं करनी चाहिए। वे महान संत हैं। उनसे मेरी क्या तुलना? मैं तो एक साधारण और मूर्ख किस्म की प्राणी हूं। ठाकुर को टिकट देकर पार्टी ने गलत नहीं किया। राहुल भी जमानत पर ही हैं।

प्रज्ञा ठाकुर ने अपने एक प्रचार में कहा कि एक संत (उमा भारती) ने ही दिग्विजय को 16 साल के लिए गुमनामी में भेज दिया था। उसे अब यह जिम्मेदारी मिली है कि उन्हें ‘नष्ट’ कर दूं।

कांग्रस उम्मीदवार दिग्विजय सिंह ने अपने मुकाबले में प्रज्ञा ठाकुर के आने का स्वागत किया। उसकी किसी भी टिप्पणी पर उन्होंने कुछ नहीं कहा। उन्होंने इस बात पर प्रसन्नता जताई कि जेएनयू छात्रसंघ के अध्यक्ष कन्हैया कुमार और उनके साथियों ने भाजपा -आरएसएस की साजिशों का जोरदार तरीके से सामना किया। कन्हैया और उसके साथियों ने कभी यह नहीं कहा कि भारत तेरे टुकड़े होंगे। यह सब सिर्फ भाजपा-आरएसएस से जुड़े लोगों का प्रचार था।

अपने पिछले पांच साल के राज में भाजपा के नेता कभी बेरोज़गारी, नोटबंदी, जीएसटी के चलते जनता हुई परेशानी पर नहीं बोलते। वे प्राय: सेना के कीर्तिमानों को अपनी उपलब्धि बता देते हैं। खुद चुनाव आयोग में इसका विरोध किया है हालांकि कोई कार्रवाई नहीं की।

दिग्विजय सिंह ने कहा कि, सीपीआई के बेगुसराय में उम्मीदवार कन्हैया कुमार और उनके साथी मई की आठ और नौ तारीख को भोपाल में उनके समर्थन में प्रचार करेंगे और अपनी बात रखेंगे। उन्होंने सीपीआई को धन्यवाद दिया कि वे उन्हें समर्थन दे रहे हैं। दिग्विजय सिंह ने कहा कि मैं कन्हैया का समर्थक हूं और खुले दिल से उन्हेें समर्थन देता हूँ। भाजपा प्रवक्ता रजनीश ने कहा, कन्हैया को समर्थन से जाहिर है कि कांगे्रस टुकड़े-टुकड़े गिरोह की समर्थन रही है। इसलिए वह उसके कन्हैया कुमार को चुनाव प्रचार के लिए आंमत्रित कर रही है।

भोपाल में कांगे्रस का अच्छा जनसंपर्क रहा है। लेकिन पिछले 15 साल से यहां भाजपा-आरएसएस का भी खासा विकास हुआ है। दिग्विजय सिंह ने इस शहर को जहां विकास किया। वहीं भाजपा शासनकाल में यहां लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं को सिमटाया गया और उग्र हिंदू कट्टरवाद को बढ़ावा दिया गया। भोपाल में कभी इस तरह की कट्टर चिंतन शैली नहीं थी। जिसे शासन का संरक्षण मिला। भोपाल शहर के निर्माता और राज्य के मुख्यमंत्री रहे शंकर दयाल शर्मा इस शहर को सिर्फ यहां के तब विशाल और संकर ताल के कारण नहीं, बल्कि पुराने और नए भोपाल में बढ़ते सांस्कृतिक तालमेल के कारण प्रशासक थे।

दिग्विजय सिंह जानते हैं कि उनके ऊपर आई जिम्मेदारी कितनी चुनौतीपूर्ण है। लगभग 40 दिनों में उन्होंने न जाने कितनी बार भोपाल के लोगों से मुलाकातें की हैं। इंडियन कॉफी हाउस में बैठे हैं। शहर के पुराने पत्रकारों से नोक-झोंक की है। कांग्रेस के पुराने और नए कार्यकर्ता दिनों-दिन तीखी धूप की परवाह किए बिना घर-घर जा रहे हैं और न्याय के लिए हाथ को मजबूत करने की बात कर रहे हैं। भोपाल ग्रामीण में कांग्रेस के प्रति ज्य़ादा उत्साह है। प्रोफेसर्स कालोनीवगैरह में भोपाल के कालेजों मेें युवा दिग्विजय सिंह का नाम सुनते ही सड़क पर ज़रूर आते हैं और मिलते हैं।