बेटी बचाओ

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बेटी पढ़ाओ-बेटी बचाओ। पढऩे में यह नारा काफी सुन्दर और आकर्षक लगता है। लेकिन बेटी बचाने की जब बारी आती है तो परिभाषा बदल जाती है। गुडिय़ा से बेरहम रेप और उसकी हत्या को लेकर आज तक तस्वीर साफ नहीं हो पाई। असल अपराधी कौन है, यह आज तक साफ नहीं हो पाया। और यदि प्रदेश में पिछले आधे साल से भी कम समय के आंकड़े देखें तो ”बेटी बचाओ” का नारा और भी थोथा लगने लगता है। करीब पांच महीनों में प्रदेश में रेप के 156 मामले दर्ज हुए और महिलाओं के खिलाफ अपराध के कुल 375 मामले दर्ज हुए। इस से साफ हो जाता है कि वास्तव में देव भूमि में महिलाओं की क्या स्थिति हो रही है।

सरकार का पुलिस पर असर कितना कमजोर है यह भी इन घटनाओं से साबित हो जाता है। कुछ मामले तो ऐसे भी होते हैं जहाँ राजनीति से जुड़े ताकतवर लोग ही आरोपी, अपराधी होते हैं। शिमला के एक गाँव में गुडिय़ा से जो हुआ था उसे सुनकर रूह काँप जाती है लेकिन आज तक इस जघन्य मामले में जो कुछ हुआ उससे यही साफ नहीं होता कि वास्तव में असल अपराधी है कौन। सीबीआई जैसी देश की आला एजेंसी ने इस मामले की जांच की लेकिन कोई नतीजा नहीं  निकला।

मामलों की जांच कितने कमजोर तरीके से होती है इसके कई उदहारण हैं। कई मामलों में सालों तक अपराधी का ही पता नहीं चलता। कुछ मामलों को  कोर्ट में इतना कमज़ोर बनाया जाता है कि आरोपी सूली पर चढऩे के बजाए मौज करते हैं। क्या मंत्रियों-अफसरों का पुलिस-जांच अधिकारियों पर कोई बस नहीं। लगता तो यही है।

स्थिति वास्तव में खराब है। विधानसभा के मानसून सत्र में भी यह मसला उठा। नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री ने आंकड़ों के आधार पर बताया कि बीते सात महीने में (उस वक्त तक) सूबे में 64 हत्याएं, 283 रेप, 283 अपहरण, 333 छेडख़ानी, महिला उत्पीडऩ के 98 मामले सामने आए हैं। इसके अलावा, प्रदेश में नशा भी अपनी जड़े फैला रहा है। सात महीने में 800 मामले नशे से जुड़े पकड़े गए हैं। मुकेश ने बताया कि कांगड़ा में सबसे अधिक 17 हत्याएं, शिमला में 12, ऊना में 10 लोगों की हत्या कर दी गई वहीं, रेप के मामले भी लगातार बढ़ रहे हैं। कांगड़ा में रेप के 30, कुल्लू में 18, मंडी में 32, शिमला में 21, सोलन में 13, सिरमौर में 24, जबकि ऊना में 15 रेप की घटनाएं सामने आई हैं।

यदि विधानसभा में यह मसला उठ रहा है तो जाहिर है कहीं न कहीं चिंता है। चिंता जनता में है। उन्हें अपनी बेटियों की आबरू खतरे में दिखती है।

पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह कहते हैं कि हमारे प्रदेश में महिलाओं को बहुत इज्जत की नजर से देखा जाता रहा है। ”यह कानून से ज़्यादा सामाजिक व्यवस्था का मसला है यानी हमारी परम्पराओं को जीवित रखने का भी मुद्दा है। लेकिन दुर्भाग्य है कि यह घटनाएं पिछले सालों में बढ़ी हैं”। यह पूछने पर कि शिमला का गुडिय़ा मामला उनकी सरकार के समय में ही हुआ, सिंह ने कहा – ”हमने एक हफ्ते के भीतर इस मामले की गंभीरता को देखते हुए सीबीआई से जांच की सिफारिश की। उसने इस मामले की जांच की है। अब हमारी सरकार नहीं लेकिन हम चाहते हैं कि उस बच्ची से बर्बरता करने वालों को कड़ी सजा मिले”।

प्रदेश में सामाजिक संगठन सक्रिय हैं। महिलाओं के अधिकारों को लेकर जागरूकता भी पिछले दशकों में बढ़ी है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एड्स जैसे विषय पर काम कर चुकीं सारिका कटोच कहती हैं कि पिछले सालों में प्रदेश में महिलाओं पर अत्याचार बढ़े हैं। ”इसमें भी दुष्कर्म की घटनाओं की बाढ़ सी आ गयी है। हर रोज कोई न कोई मामला सामने आ रहा है। यह व्यवस्था की नाकामी का प्रमाण है। व्यवस्था में असामाजिक तत्वों की घुसपैठ बढ़ी है। राजनीति और प्रशासन दोनों की मार्फत। यह बहुत चिंता की बात है क्योंकि इससे असामाजिक तत्व निडर हो गए हैं”।

आंकड़े देखें तो कांग्रेस और भाजपा दोनों की सरकारों के समय प्रदेश में महिलाओं के खिलाफ ज्यादती की घटनाएं हुई हैं। नशे के बढ़ते मामलों ने रेप जैसे अपराध में बढ़ोतरी की है। नगर परिषद, रामपुर की  महिला मंडल प्रधान रुक्मणी देवी कहती हैं कि वे पुलिस को नशे के खिलाफ चलाई जा रही मुहिम में बराबर सहयोग दे रही हैं। ”हमारे इलाके में रोजाना नशेडिय़ों का जमावड़ा लगा रहता है। इसके चलते हमने नशे के खिलाफ विशेष अभियान छेडऩे की गुहार लगाई और सहयोग का भरोसा दिया है”। रुक्मणी मानती हैं की नशे के बढ़ते चलन से महिलाओं की दिक्कतें बढ़ी हैं और उनके खिलाफ यौन अपराध बढ़े हैं।

मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर स्वीकार करते हैं कि महिलाओं को लेकर समाज में विकृति आई है। ”पहले ऐसा नहीं था। खुलेपन की कुछ तत्वों ने गलत परिभाषा निकाली है और इंटरनेट के विस्तार ने भी किसी हद तक समाज में विकृति पैदा की है। ऐसे तत्व संख्या में कम हैं लेकिन महिला से जब भी कोई गलत बात होती है समाज में इसका व्यापक असर पड़ता है”।

क्या इसके लिए राजनीति दोषी है, इस पर जय राम कहते हैं कि सिर्फ राजनीति के ही लोग  जिम्मेवार नहीं हैं। ”हर वो व्यक्ति जिम्मेवार है जो महिलाओं का सम्मान नहीं करता। ऐसे व्यक्ति हर वर्ग में हैं”। यह पूछने पर कि पुलिस ज्यादातर मामलों अपराधी तक पहुँचाने में नाकाम रहती है तो क्या सरकार, मंत्रियों और उच्चाधिकारियों का पुलिस पर बस नहीं, मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसा नहीं है। हो सकता है निचले स्तर पर कुछ फेवर हो जाती हो, सरकार ऐसे किसी भी मामले का सख्त संज्ञान लेती है। ज़्यादातर मामलों में पुलिस कार्रवाई करती है और कम मामलों में ऐसा होता है कि अपराधी पकड़ में नहीं आते।”

सरकार का यह भी तर्क रहा है कि हिमाचल में महिला अपराध के मामलों में बाहरी तत्व ज़्यादा संलिप्त पाए जाते रहे हैं। स्थानीय लोगों की भूमिका भी रही है लेकिन अपेक्षाकृत कम। सीमावर्ती इलाकों में ज्यादा मामले हुए हैं। पुलिस का रिकार्ड देखें तो कांगड़ा जिला महिला अपराध में सबसे आगे रहा है। पंजाब की सीमा से लगते कांगड़ा जिले में अकेले इस साल के पहले 10 महीनों में रेप की तीन दर्जन से ज्यादा घटनाएं हुई हैं।

गुडिय़ा मामले में ‘न्याय’ का इन्तजार

डेढ़ साल हो चुका है। शिमले के बहुचर्चित गुडिय़ा रेप-मर्डर मामले में सीबीआई ने एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। इस मामले से जुड़े कोटखाई लॉकअप केस में 9 पुलिस वालों को गिरफ्तार किया गया है। दोनों मामलों में चालान पेश किए गए हैं। फिर भी पता नहीं क्यों लोगों को लगता है कि गुडिय़ा मामले के असली अपराधी बचा लिए गए। पिछले साल 4 जुलाई को गुडिय़ा स्कूल से घर लौटते समय लापता हो गई थी। इसके दो दिन बाद उसका शव स्थानीय जंगल में पड़ा मिला था। उसका रेप के बाद मर्डर कर दिया गया था लेकिन डेढ़ साल पूरा हो जाने के बाद भी दरिंदगी का शिकार हुई मासूम को न्याय नहीं मिल पाया। केंद्रीय जांच ब्यूरो भले ही एक आरोपी को पकड़ कर मामला सुलझाने का दावा कर चुकी हो लेकिन गुडिय़ा के परिजनों के जहन में ऐसे कई सवाल हैं, जिनका जवाब उन्हें अभी तक नहीं मिल पाया है। गुडिय़ा के परिजनों की मानें तो इस वारदात में एक व्यक्ति से अधिक संलिप्त थे।

गुडिय़ा केस की जांच के लिए विभाग ने जिस एसआईटी का गठन किया था, सीबीआई ने मामले की छानबीन में पाया कि एसआईटी ने गलत व्यक्तियों को मामले में गिरफ्तार किया। एक आरोपी सूरज की हत्या का आरोप का षड्यंत्र रच राजू पर डाला जबकि उसकी हत्या पुलिस की पिटाई से हुई। आज वो एसआईटी ही खुद न्यायिक हिरासत में चल रही है। गुडिय़ा केस से जुड़े पुलिस लॉकअप सूरज हत्याकांड मामले में आईजी जैदी, शिमला के पूर्व एसपी डीडब्ल्यू नेगी, डीएसपी मनोज जोशी और अन्य छह पुलिस कर्मी न्यायिक हिरासत में चल रहे हैं। सभी आरोपी पुलिस अधिकारियों और  कर्मचारियों के खिलाफ अदालत में चालान पेश किया जा चुका है।

जो कुछ किया सरकार ने

महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने कुछ कदम उठाए हैं। मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर का दावा है कि उनकी सरकार बनने के बाद उठाये यह कदम महिलाओं के लिए बहुत उपयोगी साबित हो रहे हैं। राज्य सरकार ने इस वर्ष गणतंत्र दिवस पर महिलाओं के विरूद्ध अपराध रोकने  के लिए ‘पहलÓ योजनाओं की शुरूआत की। ‘शक्ति बटन एप्पÓ किसी भी प्रकार के असामाजिक तत्वों से महिलाओं की सुरक्षा के लिए राज्य सरकार की प्रमुख पहलों में एक है। यह एप्प राष्ट्रीय सूचना केन्द्र हिमाचल प्रदेश ने पुलिस के लिए तैयार की है। एप्प हिन्दी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में है और प्रयोग करने में सरल है। कोई भी महिला किसी भी आपात अथवा संकट की स्थिति में एप्प का लाल बटन दबा सकती है। बीस सेकेण्ड के भीतर यह एप्प संकट अथवा हमले की स्थिति में महिला,लड़की का नाम, फोन नंबर और स्थान संबंधित जिला के पुलिस नियंत्रण कक्ष और केन्द्रीय नियंत्रण कक्ष को भेज देगा। वहां पीडि़ता का संदेश पुलिस स्टॉफ प्राप्त करेगा और पीडि़ता को तत्काल राहत के लिए संबंधित पुलिस स्टेशन अथवा पुलिस पोस्ट को निर्देश जारी करेगा। केवल यही नहीं, एप्प छीना-झपटी के दौरान फोन गिर जाने पर भी संदेश भेज देगी। पुलिस के अलावा पंजीकृत दो या तीन करीबी रिश्तेदारों के नंबर पर भी तुरन्त े संकट की स्थिति की सूचना प्राप्त हो जाएगी। इस एप्प की विशेषता यह है कि इसके लिए इंटरनेट कनेक्टिविटी की आवश्यकता नहीं पड़ती। शक्ति बटन एप्प को किसी भी एंडरायॅड फोन पर गुगल प्ले स्टोर से डाउनलोड किया जा सकता है। ”गुडिय़ा हैल्पलाईन” के नाम से एक अन्य हैल्पलाईन किसी भी आपातकाल में महिलाओं को तुरन्त सहायता प्रदान करने के लिए शुरू की गई है। इसके लिए टॉल फ्री नम्बर 1515 स्थापित किया गया है, जो महिलाओं को तुरन्त सहायता प्रदान करने के लिए 24 घण्टे क्रियाशील है। पुलिस इस नम्बर पर मदद के लिये गुहार लगाने वाली महिला के पास तत्काल पहुंच जाएगी। यह पीडि़ता के मोबाइल पर छेडख़ानी की घटना की ऑटोमेटिक वीडियो और ऑडियो रिकार्डिंग करेगी, जिसे बाद में अपराधी के विरूद्ध बतौर साक्ष्य उपयोग किया जा सकता है। इन पहलों के अलावा अन्य आपात हैल्पलाईन नम्बर: 94591-00100  है, जिसमें महिला किसी भी आपातकालीन की स्थिति में वाट्सएप अथवा एसएमएस के माध्यम से सम्पर्क कर सकती है। फोन करने वाले की सूचना दर्ज कर ली जाएगी और कानून के अनुसार त्वरित कार्रवाई के लिए सम्बन्धित अधिकारी को प्रेषित किया जाएगा।