बुन्देलखण्ड राज्य नहीं, फिर आए चुनाव

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मध्य प्रदेश में चुनावी घमासान अपने उफान पर है पर इस बार मध्य प्रदेश के हिस्से वाला बुन्देलखण्ड बदलाव के मूड है। बुन्देलखण्ड में कांग्रेस और भाजपा के दिग्गज नेताओं और उनके बेटों को टिकट न मिलने से इन दोनों पाटिर्यों के नेताओं ने बगावती सुर बुलंद करते हुए बसपा और सपा का दामन थाम लिया है। बुन्देलखण्ड में वैसे भी बसपा और सपा के प्रत्याशी चुनाव जीतते रहे हैं। पर इस बार बसपा और सपा का वर्चस्व बढ़ता दिख रहा है। बुन्देलखण्ड में कांग्रेस और भाजपा का चुनावी समीकरण बसपा और सपा आसानी से बिगाडऩे में लगी हंै। मौजूदा चुनावी बिसात में कांग्रेस के दिग्गज नेता सत्यव्रत चतुर्वेदी के बेटे नितिन चतुर्वेदी ने राजनगर विधान सभा से सपा के टिकट पर चुनावी मैदान में उतरकर साफ तौर पर बता दिया है कि बुन्देलखण्ड में सपा का वजूद है। बुन्देलखण्ड के 6 जिलों में 30 विधान सभा सीटें है।

अब बात करते है छतरपुर जिले की जहां पर बगावती कांग्रेस के नेता सत्यव्रत चतुर्वेदी ही नही है बल्कि भाजपा के नेता व पूर्व सांसद जीतेन्द्र सिंह बुन्देला भी बगावती तेवर लिए बैठे हैं। सबसे दिलचस्प चुनाव छतरपुर विधान सभा सीट का है सत्यव्रत चतुर्वेदी के परिवार के ही आलोक चतुर्वेदी कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रहे है। यहां के स्थानीय लोगों का कहना है कि एक परिवार की आपसी लड़ाई का फायदा कहीं दूसरे दल को न मिल जाये क्योंकि पार्टी कार्यकर्ता आलोक चतुर्वेदी के चुनाव प्रचार में खुलेमन से प्रचार करने से कतराते रहे है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व कार्यकर्ता सत्यव्रत चतुर्वेदी के सामने आलोक चतुर्वेदी के चुनाव प्रचार में जाने से कतरा रहे है। यहीं हाल भाजपा के नेताओं का है कि जीतेन्द्र सिंह बुन्देला को टिकट न मिलने से खासे नाराज हैं।

पन्ना जिले में पिछले चुनावों की तुलना में इस बार यहां काफी रोचक मुकाबला है। कांग्रेस और भाजपा के बीच चली आ रही चुनावी लड़ाई अब बदलाव की ओर दिख रही है। भाजपा अभी तक पन्ना से कुसुम महदेले को चुनाव में उतारती रही है और कुसुम चुनाव भी जीतती रही पर इस बार उनको भाजपा ने टिकट न देकर भाजपा ने बुन्देलखण्ड में लोधी वोटों को साधने  के लिये  ब्रजेन्द्र प्रताप सिंह  को  चुनाव मैदान में उतारा है। वहीं बसपा ने भी लोधी वोटों में सेंध लगाने के लिये बसपा से महेन्द्र पाल वर्मा को इस बार टिकट दिया है। कांग्रेस में चली आ रही गुटबाजी को तोड़ कर पार्टी की एकजुटता का प्रयास किया जा रहा है इस बार कांग्रेस ने शिवजीत सिंह राजा भैया को चुनाव मैदान में उतारा है। पर इनको जनता के बीच का नेता कम बल्कि कांग्रेस आला कमान वाला नेता माना जाता है। चुनावी प्रचार में जो चल रहा है उसमें कांग्रेस कार्यकर्ताओं का कहना है कि मौजूदा सरकार को बदला जा सकता था पर टिकट में जमीनी नेताओं को नजरअंदाज किया गया है इसलिये कांग्रेसी कार्यकर्ताओं के प्रचार अभियान में कम ही जोश दिखने को मिल रहा है। दतिया जिले में भाजपा और कांग्रेस के बीच बगावती तेवर तो नहीं दिख रहा पर बसपा और सपा की भी अपनी दावेदारी को लेकर खासे उत्साहित है। भाजपा के नेता नरोत्तम मिश्रा की दतिया जिले में अच्छी पकड़ है ऐसे में भाजपा के नेताओं का कहना है कि दतिया में भाजपा का जादू बरकरार है। टीकमगढ़ जिले में भाजपा ने इस बार राकेश गिरी को चुनाव मैदान में उतार कर पूर्व भाजपा विधायक केके श्रीवास्तव की अनदेखी की है। इससे भाजपा में हलचल पैदा हो गई है। पर भाजपा आला कमान के दखल से फिलहाल मामला शांत है पर भाजपा नेताओं का कहना है कि आपसी तनातनी चुनाव परिणाम में न बदल जाये जिससे भाजपा को खासा नुकसान हो सकता है। टीकमगढ़ जिले की खरगापुर सीट पर केन्द्रीय मंत्री व टीकमगढ़ जिले से सटी सीट से सांसद उमा भारती के भतीजे राहुल सिंह चुनाव मैदान में हैं। खरगापुर सीट में भाजपा का माहौल दिख रहा है। पर यहां के लोगों को कहना है  कि चुनाव जीत में यह माहौल कितना तब्दील होता है यह तो चुनाव परिणाम ही बतायेगा। टीकमगढ़ विधानसभा सीट से कांग्रेस ने कांग्रेस के पूर्व विधायक व मंत्री यादवेन्द्र सिंह को चुनाव मैदान में उतारा है। बताया जाता है कि यादवेन्द्र सिंह की ज़मीनी नेता की छवि है ।

सागर जिले में चुनाव बड़ा ही दिलचस्प है। कांग्रेस ने यूथ कोटे से नेमी जैन को चुनाव मैदान में उतारा है तो भाजपा ने अपने विधायक शैलेन्द्र जैन पर भरोसा जताते हुये चुनाव में जीत का भरोसा किया है। सागर जिले के स्थानीय समाजिक कार्यकर्ता पवन जैन का कहना है कि दोनों पार्टियों ने जैन प्रत्याशियों को चुनाव मैदान में उतार कर भाजपा के प्रत्याशी शैलेन्द्र के वोट बैंक में सीधे सेंध लगाने का प्रयास किया है।  नेमी जैन काफी समय से कांग्रेस की ओर से चुनाव की तैयारी कर रहे थे। दमोह जिले में भाजपा के नेता व मंत्री जयंत मलैया पर भरोसा जताया है तो कांग्रेस ने राहुल सिंह को चुनाव मैदान में उतारकर जयंत मलैया को टक्कर देने का प्रयास किया है। जयंत मलैया को व्यापारियों का नेता माना जाता है। ऐसे में राहुल सिंह सीधे किसानों और जीएसटी कानून लगने से जो व्यापारी नाराज़ हैं उन व्यापारियों को साध रहे हैं वह दावा कर रहेे हैं कि चुनाव में जो वादे वह कर रहे हैं उनको हर हाल में पूरा किया जायेगा। कांग्रेस के प्रवक्ता व पूर्व मंत्री मध्य प्रदेश पवई विधान सभा सीट से ताल ठोंक रहे  हैं। इसी पवई सीट से भाजपा ने लोधी वोट को साधने के लिये पहलाद लोधी को चुनाव मैदान में उतारा है। मुकेश नायक का कहना है कि भाजपा के शासन काल में केन्द्र और प्रदेश की जनता काफी परेशान हैं मंहगाई और भ्रष्टाचार से ऐसे में जनता अबकी बार भाजपा को हटाकर कांग्रेस की सरकार बनाएगी। दमोह जि़ले से भाजपा के पूर्व सांसद मध्य प्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री रामकृष्ण कुसमरिया को भाजपा ने टिकट न देकर भाजपा कार्यकर्ताओं में अच्छा खासी नाराज़गी ली है। रामकृष्ण कुसमरिया बगावती तेवर अपनाये हुये हैं उन्होंने दमोह और पथरिया से दोनों विधानसभा सीट से दावे कर निर्दलीय चुनाव लड़े का फैसला किया है। रामकृष्ण कुसमरिया का कहना कि भाजपा में टिकट का बंटवारा सही नहीं हुआ है उन्होंने दो दशकों से अधिक समय से भाजपा की और यहां के जनता की सेवा की है ऐसे में उनको टिकट मिलना चाहिये पर भाजपा भटक गयी है इसलिये अब वे निर्दलीय चुनाव जीतकर जनता की सेवा करेंगे।

अब बात करते है नये नवेले जिला निवाड़ी की यहां भाजपा , कांग्रेस और सपा के प्रत्याशी चुनाव में एक क्रम से जीतते रहे हैं ऐसे में यहां पर चुनाव पूरी तरह से फंसा हुआ है। जि़ला बनवाने का श्रेय अनिल जैन विधायक लेना चाह रहे हैं वे चुनाव सभाओं में दावा कर रहे है कि सरकार बनेगी तो निवाड़ी में कारखाने लगवाये जायेंगे। सपा दीपक यादव और कांग्रेस ने सुरेन्द्र यादव को चुनाव मैदान में उतार कर यादव वोटों पर सेंध लगाई है। ऐसे में निवाड़ी विधान सभा सीट पर दोनों यादवों की चुनावी लड़ाई में भाजपा को लाभ मिल सकता है। निवाड़ी के काग्रेसी कार्यकर्ता संतोष कुमार का कहना है कि कांग्रेस ने टिकट बंटवारे के समय सारे पहलुओं पर अध्यन किया होता तो यादव वोट का बंटवारा न होता चुनाव एकतरफा परिणाम देता पर टिकट बंटवारा सही नहीं हुआ है।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सत्यव्रत चतुर्वेदी का कहना है कि मध्य प्रदेश में खास कर बुन्देलखण्ड में कांग्रेस ने टिकट वितरण के दौरान उन बारीक से बारीक जानकारियों को नजरअंदाज किया है जो बड़े  परिणाम जीत के दे सकते थे। उन्होंने कहा कि नितिन चतुर्वेदी ने सपा से टिकट लेकर जो किया है वो ठीक किया है और जो भी वो करते है खुलकर करते है। बसपा के नेता सुरेन्द्र वर्मा का कहना है इस बार बसपा का वोट प्रतिशत ही नहीं बढ़ेगा बल्कि बसपा की भी सीटें बढ़ेगी।  हांलांकि सपा के सुप्रीमों  अखिलेश यादव चुनावी बिसात बिछने से पहले ही छतरपुर में कह चुके है सपा इस बार चुनाव में बुन्देलखण्ड के साथ ही पूरे मध्य प्रदेश में वोट प्रतिशत के साथ विधायकों की जीत को बढ़ाकर पार्टी का विस्तार करेगें।