बुन्देलखंड न बना राज्य और न हुआ विकास

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बुन्देलखंड़ की अपनी ही व्यथा है पर सुनने वाला कोई नहीं है। बुन्देलखंड़ के विकास और समस्याओं के समाधान की चर्चा तब होती है जब चुनाव आते हैं। इस दौरान बुन्देलखंड के विकास और राज्य निर्माण की चर्चा ही नहीं होती है बल्कि वादे भी किये जाते है चुनाव जीतने पर बुन्देलखंड राज्य बनेगा पर ऐसा हो नहीं पाता है। इस समय मध्यप्रदेश में चुनाव है और चुनावी चर्चा के दौरान मध्य प्रदेश के हिस्से वाले बुन्देलखंड़ के निर्माण और विकास पर प्रत्याशी ताल ठोंक रहे है और दावा कर रहे हैं कि अब बुन्देलखंड को नजऱअंदाज नहीं किया जायेगा। बुन्देलखंड़ में तमाम समस्याओं के साथ -साथ पलायन की समस्या भी जोरों पर हैं अभी तक पलायन को रोकने के लिए कोई कारगर कदम नहीं उठाये गये हंै। इन्हीं तमाम मुद्दों पर तहलका की पड़ताल-

बुन्देलखंड के जहां अपने संसाधन है, जल, जंगल और जमीन है पर सरकार की उदासीनता के कारण संसाधनों का सही प्रयोग न होने कारण आज बुन्देलखंड पिछड़ा हुआ है।

मध्यप्रदेश के हिस्से वाले बुन्देलखंड में 30 विधानसभा सीटें हैं और  6 जि़ले हैं। अभी हाल ही में छठवां जि़ला निवाड़ी बना है। छत्तरपुर, पन्ना, सागर, दमोह ,टीकमगढ़ और निवाड़ी सागर संभाग में आते है जबकि दतिया ग्वालियर संभाग में है।

मौजूदा हालात में चुनावी बिसात बिछी हुई है। भले ही पूरे राज्य में कांग्रेस और भाजपा के बीच मुकाबला है पर बुन्देलखंड के पांच जि़ले पन्ना, छत्तरपुर टीकमगढ़, निवाड़ी और दतिया उत्तरप्रदेश से सटे है और उत्तरप्रदेश के विधायक और नेताओं के परिजन यहां पर चुनाव लड़ते है। इसलिये इन जिलों में कांग्रेस और भाजपा के साथ साथ सपा और बसपा के प्रत्याशी चुनावी समीकरण ही नहीं बिगाड़ते है। बल्कि चुनाव में जीत भी दर्ज कराते हंै।

इस बार चुनाव में बदलाव की बात ज़ोर शोर से चल रही है। यहां के स्थानीय नेताओं का कहना है कि कांग्रेस ने चुनाव की अहम् भूमिका प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ और कांग्रेस के युवा नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया को सौंप कर कांग्रेस में जान फूंक दी है क्योंकि कमलनाथ का प्रभाव पूरे प्रदेश में है तो ज्योतिरादित्य सिधिंया का अ़च्छा खासा प्रभाव बुन्देलखंड के चुनाव में पड़ेगा क्योंकि साफ-सुथरी छवि का नेता होने के कारण बुन्देलखंड के लोगों का झुकाव भी उनके साथ है।

मध्यप्रदेश में 15 सालों से भाजपा की सरकार है ऐसे में बदलाव की बातें चुनाव की तारीख घोषित होने के पूर्व उठती रही हैं। चुनावी बातों से लगता है कि जनता बदलाव के मूड में है पर जानकार लोगों का कहना है कि कांगेस का प्रत्याशी तो मजबूत चुनाव मैदान में उतरता है पर चुनावी संगठन मजबूत न होने के कारण कांग्रेस अभी हाल के चुनाव में पराजित हो रही है। दतिया के स्थानीय निवासी रमनलाल का कहना है कि केन्द्र सरकार की नीतियों के कारण मंहगांई बड़ी है और पेट्रोल – डीजल के दामों में बढ़ोत्तरी हुई है ऐसे हालात् में बदलाव होना चाहिए। छत्तरपुर के अनुज शुक्ला का कहना है कि कांग्रेस आला कमान अगर पूरे चुनाव में संगठन को मजबूत रखने में मेहनत करें तो चुनाव जीता जा सकता है। पर कांगे्रस की चुनावी सभा में भले ही बड़े नेता एकजुट दिखते है पर आपसी खींचतान के कारण कांग्रेसी कार्यकर्ता उदास हैं।

टीकमगढ़ जिले के राजेश शर्मा का कहना है कि बुन्देलखंड में सबसे विकट समस्या पानी की है राज्य बने या न बने पर पानी की समस्या पर किसी भी सरकार ने कोई ठोस पहल नहीं की है। सागर के विनोद गुप्ता का कहना है कि अप्रैल का महीना शुरू होते ही पानी के लिये हाहाकार होने लगता है। इस पर यहां 15 साल से भाजपा सरकार ने और केन्द्र की मोदी सरकार ने कुछ नहीं किया है। जबकि दमोह के मनीष असाटी ने बताया कि पलायन न रुकने के कारण बुन्देलखंड में भी मजदूरों का अकाल रहता है। सरकार को पलायन रोकने के लिये मजदूरों के लिये गांव – गांव में रोज़गार मुहैया कराना चाहिये अन्यथा यहां पर मजदूरों का संकट बड़ी मुसीबत बन सकता है।

अभी हाल ही में निवाड़ी जिले के बनने से भाजपा को यहां लाभ मिल सकता है क्योंकि वर्तमान विधायक अनिल जैन को और केन्द्रीय मंत्री बीरेन्द्र कुमार को इस जिले के बनवाने का श्रेय जनता दे रही है। निवाड़ी जिला बनने से दावा किया जा रहा है कि यहां पर विकास के तौर पर छोटे -छोटे कारखाने लगाये जाने है जिससे रोजगार को बढ़ावा मिलेगा और पलायनवाद पर रोक लगेगी। पन्ना निवासी और भारतीय कृषक समाज के राष्ट्रीय महामंत्री कपिल मिश्रा का कहना है कि केन्द्र और प्रदेश की सरकार ने तमाम विकास के कार्य  किये है जिसको जनता मानती है। चुनाव में भाजपा के कामों पर जनता वोट देती रही है और देगी। रहा सवाल बुन्देलखंड के विकास का तो विकास हो रहा है पलायन रोकने के लिये उचित व सही निर्णय लिये जा रहे हैं। कपिल मि़श्रा का कहना है कि निवाड़ी जिला सरकार की पहल का नतीजा है जो जनता की समस्याओं को देखते हुए ही बनाया गया है। अब वहां के लोगों को अपने निजी और सरकारी कामों के लिये दूर नहीं जाना पड़ेगा। उन्होंने बताया कि महंगाई और भ्रष्ट्राचार को लेकर जो हल्ला विपक्ष कर रहा है वह सब बकवास है क्योंकि कांगे्रस के शासन काल में हुए भ्रष्टाचार के कारण आज देश काफी पीछे है। किसान नेता बेनी सिंह का कहना है कि मोदी सरकार और मध्यप्रदेश की शिवराज सरकार मिलकर किसानों के लिये अलग से बोर्ड बना दें और किसानों के कजऱ् माफ कर दे तो ठीक है अन्यथा इस बार किसानों ने ठाना है जो सरकार किसान हित की बात करेगी और उनकी मांगों को तत्काल मानेगी किसान उसी के साथ खड़़े होंगे। किसान व दलित नेता बी डी अम्बेडकर का कहना है कि सरकार चुनाव के दौरान किसानों और दलितों के अधिकारों की बात करती है पर सच्चाई ये है चुनाव के बाद सारी बातों को भूल जाती है पर इस बार किसान और दलितों ने निर्णय लिया है कि वे उस नेता को चुनेगे जो उनकी सुनेगा।