बिना बहस के बजट पास कराने का नुस्खा

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ज़रूरत है कि भाजपा सरकार लोगों का भरोसा संसद में जगाए । विधायिका के प्रति अविश्वास न बढ़ाए जैसा कि बजट को बिना बहस पास करा कर किया। सरकार को साथ लेते हुए अपनी भूमिका जतानी चाहिए थी।

विपक्षी दलों ने लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन को एक कड़ा पत्र भेजा जिसमें पूछा गया कि सरकार ने विपक्ष को बिना पूर्व सूचना दिए बगैर केंद्रीय बजट पर मतदान कैसे करा लिया। विपक्ष की मुख्य पार्टी कांग्रेस के अनुसार टीडीपी और एआईडी एमके का विरोध प्रदर्शन तो सरकार की ओर से कराया जाता रहा है। क्योंकि वे एनडीए में भी हैं। ऐसा इसलिए किया गया जिससे नीरव मोदी घोटाले पर से लोगों का ध्यान बांटा जा सके। यह पत्र सुमित्रा महाजन को सौंपा सांसदों के एक प्रतिनिधिमंडल ने जिसमें मल्लिकार्जुन खडगे, ज्योतिरादित्य सिंधिया, माकपा सांसद मोहम्मद सलीम, आर जेडी सांसद जेपी यादव आदि थे। विपक्षी एकता में दरार तब दिखी जब तृणमूल के सांसदों ने इस पत्र पर दस्तखत नहीं किए।

विपक्षी नेताओं का आरोप था कि पिछली बिजिनेस एडवाईजरी कमेटी की बैठक में सरकार ने छह मंत्रालयों जिनमें कृषि भी था उस पर बहस के लिए समय नियत करने की बात कही थी लेकिन बजट पर मतदान करने के लिए तारीख और समय तय नहीं हुआ था। इससे पता चलता है कि सरकार में कितना अंहकार और अहं है जिसके चलते तमाम वित्तीय मामलों पर संसद में बहस कराने की बजाए उससे बचने की कोशिश होती है।

विपक्षी दलों ने अध्यक्ष को यह भी याद दिलाया कि वे अभी हाल हुए नीरव मोदी द्वारा किए गए बैंकों में वित्तीय घोटालों पर बहस की मांग कर रहे हैं। सरकार इस मामले पर आगे नहीं आ रही है जिससे सदन की कार्रवाई सामान्य तौर पर चल सके। दूसरी ओर सरकार इस बात पर आमादा है कि पूरा बिल (केंंद्रीय बजट) बिना बहस के पास हो जाए।

लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खडगे ने कहा कि टीडीपी और अन्नाद्रमुक, एआईए, डीएमके के विरोध प्रदर्शन तो एनडीए सरकार की ओर से चलाए जा रहे प्रदर्शन हैं जिससे बहस इस मुद्दे पर न हो कि कैसे नीरव मोदी ने सरकारी पंजाब नेशनल बैंक को 12,000 करोड़ से भी ज़्यादा का चूना लगा दिया। आखिर फिर  संसद सत्र बुलाने की वजह ही क्या है जब बिना बहस मुबाहिसे के केंद्रीय बजट बहुमत से ही पास कराना है। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि वह देश को गुमराह कर रही है कि विपक्ष ही सदन नहीं चलने दे रहा।

खडग़े ने कहा जब टीडीपी सांसद प्लेकार्ड लेकर आते हैं तो मिनटों में सदन स्थगित हो जाता है जबकि सस्पेंड होना चाहिए। प्रधानमंत्री भी कतई कोई दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं। यह संसदीय मामलों के मंत्री की जिम्मेदारी है कि वह भाजपा के सहयोगियों, भविष्य में बनने वाले सहयोगियों और समर्थकों को लेकर सदन सुचारू रूप से चलाएं।

लगभग इसी मुद्दे को आगे बढ़ाते हुए माकपा सांसद मोहम्मद सलीम ने कहा, नियंत्रित लोकतंत्र का उदाहरण संसद होता है। बजट के लिए एक छोटा रास्ता अपनाना वर्तमान शासन की एक महत्वपूर्ण नजीर है।