‘बाहरी होना हमें दूसरों पर एक स्पष्ट बढ़त देता है’

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हालांकि मुझे लगता है कि यह दो कारकों पर निर्भर करेगा. पहला यह कि आप अगली सरकार का हिस्सा होगी या नहीं या फिर मैं विपक्ष में बैठूंगा. दोनों ही स्थितियों में मेरी भूमिका अलग होगी, लेकिन हर स्थिति में बुनियादी ढांचे से जुड़ी समस्याओं पर समग्रता से ध्यान देना होगा.

दूसरा कारक यह है कि सुधारों की हमारी जो महत्वाकांक्षी योजना है, उसमें विपक्ष के अड़ंगा लगाने की पूरी संभावना है. इसके बावजूद हम अपना काम करते रहेंगे.

आज कांग्रेस से लोग निराश हैं. भाजपा के प्रति एक अनिश्चितता का माहौल है. ऐसे में मुझे लगता है कि राजनीतिक व्यवस्था में बाहरी होना एक ऐसा तथ्य है जो हमें दूसरों पर बढ़त देता है. दोनों मुख्य पार्टियों की सरकारों का रिकॉर्ड अच्छा नहीं रहा है जबकि हमने 49 दिन की अपनी सरकार में प्रशासन के मोर्चे पर अच्छा काम किया है.

हमारा एक भी मंत्री या विधायक ऐसा नहीं है जिसने सरकार में रहते हुए किसी से एक भी रुपया मांगा हो और इस दावे को अब तक किसी ने भी नहीं झुठलाया है. पिछले कुछ सालों के दौरान कौन सी राज्य सरकार है जो ऐसा दावा करने की स्थिति में हो? इसलिए दिल्ली में अगला मौका मिलने या राष्ट्रीय स्तर पर कोई अवसर मिलने के बाद यही वह आधार है जिसे हमें बचाना होगा और उस पर अपनी इमारत खड़ी करनी होगी. अगर हमने अपनी यह प्रतिष्ठा गंवा दी तो यह हमारे लिए बहुत बुरा होगा.

(अवलोक लांगर से बातचीत पर आधारित)

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