फिल्मों को नई दिशा दी कल्पना लाजमी ने

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विभिन्न रूपों में भारतीय नारी को संघर्षशील बताने के लिए चर्चित रही फिल्म निर्देशक कल्पना लाजमी का मुंबई में रविवार को (23 सितंबर) कोकिलाबेन अस्पताल में निधन हो गया। वे 64 साल की थी। उनका निधन भोर में साढ़े चार बजे हुआ। लेखन और कई अच्छी फिल्में बनाने के कारण वे हमेशा चर्चा में रही। उनकी फिल्मों में रुदाली, एक पल, रिहाई, दरमियां, चिंगारी आदि फिल्में खासी चर्चित हैं। उन्होंने निर्देशक श्याम बेनेगल की फिल्मों में सहायक निर्देशक के रूप में काम शुरू किया था। कई वृतचित्रों का भी उन्होंने निर्देशन किया था। खास कर भारतीय स्त्री के जीवन संघर्ष के उन रूपों को उन्होंने रूपहले पर्दे पर पेश किया था जिन्हें अमूमन ‘अनदेखा’ किया जाता रहा है। उनके इस साहस और ज्ञान की श्याम बेनेगल और दूसरे लोगों ने भी काफी तारीफ की। प्रसिद्ध गायक भूपेन हजारिका उनके करीबी मित्र थे। उनकी जिं़दगी पर उनकी पुस्तक ‘भूपेन हजारिका, एज आई न्यू हिम’ चर्चित पुस्तक रही। एक अर्से से वे कैंसर से जूझ रही थी। काम से दूर रहने और लंबी बीमारी के कारण उनकी आर्थिक स्थिति चरमर्रा गई थी। उनकी अभिनेता आमीर खान ने एक समय इलाज के लिए मदद भी की थी। प्रसिद्ध चित्रकार ललिता लाजमी की वह बेटी थी। फिल्म निर्माता और अभिनेता गुरूदत्त उनके मामा थे। कल्पना लाजमी की पहली फिल्म थी ‘एक पल’। अस्सी के दशक की यह  फिल्म उस स्त्री की है जिसका पति है और वह एक बच्ची की मां है। फिर भी उसके संबंध किसी और से हो जाते हैं। उसका पति सब जानते हुए भी पत्नी और बच्ची को अपनाए  रखता है। मुंबईया फिल्मों में तब हिंसा और सेक्स का बोलबाला था। कल्पना की यह शैली थी जिसके चलते फिल्म पर काफी बावेला भी मचा लेकिन उन्होंने इससे अपनी एक अलग पहचान बनाई और डटी रहीं। कल्पना लाजमी अपनी फिल्म ‘रुदाली’ (1993) के लिए खास तौर पर याद की जाएंगी। इस फिल्म ने राखी और डिंपल कपाडिय़ा दोनों ही अभिनेत्रियों  की अदाकारी को अमर बना दिया। इस फिल्म की कहानी बांग्ला कहानीकार और उपन्यासकार महाश्वेता देवी की है। यह कहानी उन पेशेवर रोने वालियों पर है जो संपन्न घरों में मौत होने पर शोक मनाती हैं।