प्रवीर चंद्र भंजदेव : अा‌‌दिवासी आंदोलन

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आजाद भारत में पुलिस की फायरिंग से आदिवासियों के मारे जाने की यह पहली घटना है.

इन घटनाओं ने प्रवीर चंद्र को बस्तर में और मजबूत कर दिया. 1962 के विधानसभा चुनाव में बस्तर की दस में से आठ सीटों पर कांग्रेस के उम्मीदवार प्रवीर चंद्र के चुने हुए उम्मीदवारों के सामने बुरी तरह हार गए. एक तरह से यह सरकार की पराजय थी. इसके बाद से प्रवीर चंद्र दिल्ली से लेकर भोपाल तक आदिवासियों के पक्ष में बड़े-बड़े विरोध प्रदर्शन करने लगे. पुलिस और पूर्व राजा के नेतृत्व में आदिवासियों के बीच पहली झड़प की कथित घटना इसी समय की है. मार्च, 1966 में आदिवासी राजमहल में एक त्योहार के सिलसिले में जुटे हुए थे. आदिवासी अपनी परंपरागत वेशभूषा के साथ तीर-कमानों से लैस थे. कहा जाता है कि इसी दिन किसी दूसरे क्षेत्र में पुलिस की आदिवासियों से एक झड़प हुई और संदिग्धों की तलाश में पुलिस ने राजमहल को घेर लिया. अचानक यहां पुलिस और आदिवासियों के बीच संघर्ष शुरू हो गया. पुलिस ने आदिवासियों पर फायरिंग शुरू कर दी और दर्जनों आदिवासियों के साथ प्रवीर चंद्र की भी इस इसमें मौत हो गई. इसी के साथ उस दौर में आदिवासियों का सबसे बड़ा नेतृत्व खत्म हो गया.

कहा जाता है सरकार ने जानबूझकर बस्तर के पूर्व राजा की हत्या करवाई थी क्योंकि वे सरकार के लिए चुनौती बन गए थे. हालांकि पुलिस का दावा था कि आदिवासी प्रवीर चंद्र के नेतृत्व में उनके ऊपर तीरों से हमला कर रहे थे और इसकी प्रतिक्रिया में पुलिस को कार्रवाई करनी पड़ी.

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