प्रवीर चंद्र भंजदेव : अा‌‌दिवासी आंदोलन

0
1653

preveerआदिवासियों की दशा समझने और सुधारने के लिए आजादी के बाद कई समितियां बनी हैं इनमें पहली मानवशास्त्री वेरियर एल्विन की अध्क्षता में बनी थी. और पहला आयोग कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष यूएन धेबर की अध्यक्षता में 1960 में बना. लेकिन शुरुआत में ही ये प्रयास खोखले साबित होने लगे. इसका नतीजा यह रहा कि 1960-70 के दशक के दौरान बस्तर में आदिवासी आंदोलन में भारी उभार देखा गया. इसका नेतृत्व बस्तर के पूर्व राजा प्रवीर चंद्र भंजदेव के हाथों में था. आदिवासियों के लिए वे भगवान सरीखे थे.

प्रवीर चंद्र ने ही भारत में बस्तर रियासत के विलयपत्र पर दस्तखत किए थे और बाद में वे कांग्रेस में शामिल हो गए. कांग्रेस का सदस्य रहते हुए 1957 में प्रवीर चंद्र विधायक बने लेकिन आदिवासियों के प्रति सरकार के रवैए से निराश होकर 1959 में विधानसभा सदस्यता से इस्तीफा दे दिया. सरकारी नीतियों के खिलाफ जब पूर्व राजा की सक्रियता बढ़ गई तब 1961 में उन्हें कुछ दिनों के लिए हिरासत में भी लिया गया. केंद्र सरकार ने कार्रवाई आगे बढ़ाते हुए एक आदेश के जरिए राजा के रूप में मिली उनकी सुविधाएं भी समाप्त कर दीं. बस्तर के आदिवासी सरकार के इस कदम से हैरान थे.

सरकार के इस फैसले के खिलाफ छत्तीसगढ़ के सुदूरवर्ती क्षेत्रों तक आदिवासियों की सभाएं होने लगीं. इसी समय एक गांव लोहड़ीगुड़ा में पुलिस ने प्रदर्शनकारी आदिवासियों पर गोलियां चलाईं जिसमें सरकारी आंकड़े के मुताबिक तकरीबन दर्जन भर आदिवासी मारे गए थे.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here