पलटी से पलटा पासा

0
162

इस मुद्दे पर विभिन्न दलों के नेताओं ने अपने-अपने हिसाब से बयान दिए. लेकिन नीतीश कुमार और लालू प्रसाद यादव की ओर से कोई ठोस बयान तुरंत नहीं आए. वजहें कई रही होंगी, लेकिन एक प्रमुख वजह यह मानी गई कि लालू ने नीतीश कुमार की बिछाई बिसात पर ही उन्हें मात दे दी. चुनाव के पहले राजद से अख्तरुल समेत नौ नेताओं को अपने पाले में करने की कोशिश कर जद(यू) ने राजद को औंधे मुंह गिराने की कोशिश की थी.कहा जा रहा है कि अब अख्तरुल ने बीच चुनाव में नीतीश की उम्मीदों पर पानी फेरा है तो यह अख्तरुल के विश्वासघात का मामला कम है और लालू द्वारा हिसाब-किताब बराबर करने का मामला ज्यादा.

सवाल यह है कि उनके ऐसा करने से किसे सबसे ज्यादा फायदा होगा और किसे नुकसान. बिहार में करीब 16 प्रतिशत मुस्लिम मतदाता हैं. इस समूह पर भाजपा को छोड़कर सबकी नजर है. लालू प्रसाद का मुसलमानों के बीच पुराना आधार रहा है. नीतीश कुमार मुसलमानों के बीच नये चैंपियन बने हैं. कांग्रेस को इस बार मुसलमानों का वोट अपेक्षाकृत आसानी से मिलने की बात कही जा रही है क्योंकि अल्पसंख्यक समुदाय में यह धारणा साफ तौर पर बनी है कि अगर दिल्ली के तख्त पर नरेंद्र मोदी को रोकना है तो उसमें सबसे ज्यादा कारगर कांग्रेस ही होगी.

जानकारों के मुताबिक बिहार में सबसे सघन मुस्लिम आबादी (69 फीसदी) वाले संसदीय क्षेत्र किशनगंज से अख्तरुल का दावेदारी छोड़ना जद(यू) को नुकसान पहुंचाएगा. दरअसल इससे सीमांचल की दूसरी सीटों पर भी यह साफ संदेश गया है कि नीतीश कुमार नहीं बल्कि राजद-कांग्रेस नरेंद्र मोदी को रोकने में सक्षम है. अख्तरुल के इस फैसले से खुश होकर भी भाजपा मायूस है. इसकी वजह यह है कि इस बार किशनगंज की सीट पर दो मजबूत मुस्लिम उम्मीदवारों के रहने से उसे हिंदू मतों के ध्रुवीकरण और पार्टी प्रत्याशी दिलीप जायसवाल की जीत की उम्मीद थी, लेकिन अख्तरुल के इस दांव से भाजपा के लिए समीकरण बदल गए हैं.

इस बार राजद और जद(यू), दोनों ही पार्टियों ने लोकसभा चुनाव में मुसलमानों को अपने पक्ष में करने के लिए सबसे बड़ा दांव खेला है. नीतीश कुमार की पार्टी जद(यू) ने इस बार भाजपा से अलगाव के बाद अप्रत्याशित तौर पर मुस्लिम प्रत्याशियों की संख्या में वृद्धि की है. उसने बिहार में पांच मुस्लिम प्रत्याशियों को मैदान में उतारा है. राजद ने जद(यू) को भी पछाड़ते हुए छह प्रत्याशियों को टिकट दिया है. भाजपा और लोजपा ने एक-एक मुस्लिम प्रत्याशी मैदान में उतारा है और राजद से समझौते के बाद 12 सीटों पर चुनाव लड़ रही कांग्रेस ने सिर्फ एक मुस्लिम प्रत्याशी असरारुल हक को ही टिकट दिया है जो मौजूदा सांसद हैं–उसी किशनगंज से, जहां मुस्लिमों की आबादी सर्वाधिक है और जहां जद(यू) के उम्मीदवार अख्तरुल ईमान ने उन्हें समर्थन दे दिया है. पिछले लोकसभा चुनाव में किशनगंज की सीट पर भाजपा ने जद(यू) को चुनाव लड़ने दिया था. लेकिन जीती कांग्रेस जबकि जद(यू) पर वहां मुस्लिम तुष्टिकरण के आरोप भी लगे थे.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here