न्यायपालिका की स्वतंत्रता खतरे में : प्रधान न्यायाधीश

गोगोई पर कथित यौन उत्पीड़न के आरोपों पर विशेष बेंच में हुई सुनवाई

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सर्वोच्च न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई के खिलाफ एक महिला की तरफ से लगाए गए कथित यौन उत्पीड़न के आरोपों पर शनिवार को सुप्रीम कोर्ट में विशेष बेंच में सुनवाई हुई। इस दौरान प्रधान न्यायाधीश गोगोई ने अपने ऊपर लगे आरोपों को बेबुनियाद बताया और कहा कि इसके पीछे कोई बड़ी ताकत होगी, जो  सीजेआई के कार्यालय को निष्क्रिय करना चाहते हैं।
प्रधान न्यायाधीश ने सुनवाई के दौरान कहा – ”मैंने आज अदालत में बैठने का असामान्य और असाधारण कदम उठाया है क्योंकि चीजें बहुत आगे बढ़ चुकी हैं। मैं इस कुर्सी पर बैठूंगा और बिना किसी भय के न्यायपालिका से जुड़े अपने कर्तव्य पूरे करता रहूंगा। बीस साल की सेवा के बाद यह सीजेआई को मिला इनाम है।”
जस्टिस गोगोई ने कहा कि इसके पीछे कोई बड़ी ताकत होगी, वे सीजेआई के कार्यालय को निष्क्रिय करना चाहते हैं। लेकिन न्यायपालिका को बलि का बकरा नहीं बनाया जा सकता। रंजन गोगोई ने कहा – ”यह अविश्वसनीय है। मुझे नहीं लगता कि इन आरोपों का खंडन करने के लिए मुझे इतना नीचे उतरना चाहिए। कोई मुझे धन के मामले में नहीं पकड़ सकता है। लोग कुछ ढूंढ़ना चाहते हैं और उन्हें यह मिला।  न्यायाधीश के तौर पर बीस साल की निस्वार्थ सेवा के बाद मेरा बैंक बैलेंस ६.८०  लाख रुपये है।”
जस्टिस गोगोई ने स्पष्ट कहा – ”मैं इस कुर्सी पर बैठूंगा और बिना किसी भय के न्यायपालिका से जुड़े अपने कर्तव्य पूरे करता रहूंगा।” वहीं, जस्टिस अरुण मिश्रा ने कहा कि इस तरह के अनैतिक आरोपों से न्यायपालिका पर से लोगों का विश्वास डगमगाएगा। इस दौरान अदालत के भीतर जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि इसकी भी जांच होनी चाहिए कि इस महिला को यहां (सुप्रीम कोर्ट) में नौकरी कैसे मिल गई जबकि उसके खिलाफ आपराधिक केस है। अटॉर्नी जनरल ने कहा कि पुलिस द्वारा कैसे इस महिला को क्लीन चिट दी गई।
चीफ जस्टिस ने कहा कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता खतरे में है। ”इस आरोप से मैं बेहद आहत हुआ हूं।” इस पूरे मामले पर मीडिया को संयम बरतने की सलाह दी गई है।
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट की एक पूर्व महिला कर्मचारी ने सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई के खिलाफ कथित यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है। इस महिला कर्मचारी ने शपथ पत्र देकर सुप्रीम कोर्ट के सभी जजों को आरोप लगाने वाला यह पत्र भेजा था।  इस पूरे मामले की सुनवाई के लिए एक स्पेशल बेंच का गठन किया गया और शनिवार को इस मसले पर सुनवाई हुई।