नरेंद्र मोदी: लहर में कितना असर?

0
599

[box]

विचित्र किंतु सत्य

मुखिया जीते लेकिन मंत्री हारे

मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में भाजपा की हैट्रिक के बावजूद शिवराज सिंह चौहान के 11 और रमन सिंह के पांच मंत्रियों को जनता ने नकार दिया. मध्य प्रदेश में मंत्रियों की हार इसलिए भी हैरान करने वाली है क्योंकि पिछली बार के मुकाबले भाजपा ने यहां इस बार अधिक सीटें हासिल की हैं. छत्तीसगढ़ में विधानसभा अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष समेत दोनों पार्टियों के 48 विधायक इस बार अपनी कुर्सी नहीं बचा पाए. ऐसा ही हाल दिल्ली और राजस्थान के कांग्रेसी विधायकों का भी रहा. इन दोनों राज्यों में पार्टी के अधिकतर विधायकों को हार मिली.

[/box]

लेकिन इसके साथ यह भी एक तथ्य है कि यही वे नेता भी थे जिनके दम पर कांग्रेस दस साल बाद सत्ता में आने के सपने देख रही थी. भाजपा के लोग यहां की जीत को भी नरेंद्र मोदी के असर का नतीजा बता रहे हैं लेकिन अगर जमीनी हालत जानने वाले लोगों से बात करें तो उनमें से कई इसे रमन सिंह का अपना प्रभाव मानते हैं. लेकिन यहां मोदी के असर को सिरे से खारिज भी नहीं किया जा सकता. क्योंकि जिन छह सीटों पर मोदी ने यहां चुनाव प्रचार किया उनमें से चार पर भाजपा जीती है जोकि भाजपा की जीत के प्रतिशत से 12 फीसदी ज्यादा है. मगर उतना ज्यादा भी नहीं.

दिल्ली में भले ही भाजपा सरकार बनाने लायक संख्या हासिल नहीं कर पाई हो लेकिन 31 सीटों के साथ वह दिल्ली विधानसभा में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी. दिल्ली प्रदेश और पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व की मानें तो आम आदमी पार्टी की जिस तरह की लहर दिल्ली में थी उसमें अगर भाजपा को इतनी सीटें भी मिलीं तो इसके लिए मोदी और हर्षवर्धन ही जिम्मेदार हैं. जानकारों की मानें तो अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली की लड़ाई को ईमानदारी बनाम बेईमानी की लड़ाई में तब्दील कर दिया था. यहां एक छोर पर केजरीवाल थे तो दूसरे पर शीला दीक्षित और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष विजय गोयल. गोयल ने खुद को भाजपा की तरफ से मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कराने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया था. लेकिन पार्टी नेताओं की मानें तो नरेंद्र मोदी को इस बात का अंदाजा हो गया था कि केजरीवाल जिस तरह की राजनीति कर रहे हैं उसमें गोयल के बूते चुनाव नहीं जीता जा सकता. इसलिए अंतिम समय में हर्षवर्धन की उम्मीदवारी की घोषणा भाजपा ने की.

इसके बाद मोदी ने लगातार दिल्ली में सभाएं कीं. मोदी ने दिल्ली की जिन छह सीटों पर चुनाव प्रचार किया उनमें से दो पर भाजपा ने जीत हासिल की. ये सीटें हैं- द्वारका और शाहदरा. भले ही यह सफलता कम दिखती हो लेकिन जिस तरह के चौंकाने वाले नतीजे दिल्ली विधानसभा चुनाव के आए हैं उसमें पार्टी के लोग इस बात में ही खुश हैं कि भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनी और इसके लिए वे सबसे ज्यादा अगर किसी को श्रेय दे रहे हैं तो वे हैं नरेंद्र मोदी.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here