देश के करोड़ों घरों में अब रातों में भी उजाला

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तहलका ब्यूरो

 

 

‘सौभाग्यÓ योजना पूरी तौर पर मुफ्त नहीं है। इसके तहत, ‘इस्तेमाल पहले, पैसा बाद में,Ó प्रणाली रखी गई है जिससे अंधेरे में डूबे घरों में मुफ्त में बिजली कनेक्शन पहुंचे बाद में बिजली प्रसार देखने वाली निजी कंपनियां आसान किश्तों पर बिजली के इस्तेमाल में होने वाले खर्च को वसूलती रहेंगी। राज्यों में विभिन्न नगरों में कटियां डाल कर बिजली का अवैध इस्तेमाल करने वालों पर कुछ रोक लगेगी। आमतौर पर इसे राज्य का विषय मान कर अफसरशाही ध्यान नहीं देती थी। साथ ही हर पार्टी बिजली-पानी को मुद्दा बना कर वोट बैंक की तलाश किया करती थी।

अब मोदी के इस फैसले को यदि ईमानदारी से अफसरशाही अमल में लाती है तो हर गरीब -दलित- आदिवासी परिवार के बेहद करीब होगी भारतीय जनता पार्टी जो दूसरी तमाम राजनीतिक पार्टियों की तुलना में। उधर गरीबी की रेखा के नीचे रहने वाले और समाज के निचले तबकों में बिजली की ज़रूरत के अनुरूप उपयोग और उसके बिल को अदा करने की नीयत बना सकेगी।

देश में कोयला और लिग्नाइट के बिजली उत्पादन केंद्रों में उत्पादन को बढ़ाने और सप्लाई। का सिलसिला भी दुरूस्त करना चाहिए जिससे उत्पादन बर्बाद न हो। यदि आंकड़ों की बात करें तो 2016-17 में 59.88 फीसद ही उत्पादन रहा जबकि 2009-10 में यह 77.5 फीसद था। सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी का यह आंकड़ा गौर करने लायक है। यह कमी राज्य वितरण कंपनियों की मांग कम होते जाने के कारण हुई है। दो साल पहले उज्जवल डिस्कॉम एशोएरेंस योजना (उदय) शुरू हुई थी। इसे बनाने का इरादा इसलिए हुआ क्योंकि राज्य बिजली वितरण एजेंसियों पर बढ़ती देनदारी कम हो। चूंंिक वितरण एजेंसियां अपनी ओर से लाभ की गुंजायश नहीं रख सकतीं इसलिए वे भी खासे आर्थिक दबाव में हैंैै। पार्टी कार्यकत्र्ताओं और नेताओं को भारतीय जनता पार्टी की कार्यकारिणी की बैठक में वंशवाद और भ्रष्टाचार से बचने और जनता के बीच सक्रिय होने का मंत्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिया। उन्होंने इनसे होने वाली परेशानियों के प्रति भी आगाह किया और लगभग चेतावनी देते हुए यह भी याद दिलाया कि खुद उनके पास परिवार नहीं है। हालांकि यह कठिन ही है कि भाई- भतीजावाद, जातिवाद, वंशवाद और भ्रष्टाचार के जरिए लाभ कमाने में कमी आए। हालांकि देश की जनता में अब खासी निराशा दिखने लगी हैं।

प्रधानमंत्री ने बिजली की समस्या के समाधान हेतु समय के अंदर काम करने का प्रण लिया है वह चुनौतीपूर्ण है। केंद्र मेें आई तमाम सरकारें दूरदराज के गांवों, दलितों कें यहां बिजली का कनेक्शन देने और उत्पादित बिजली में कमी होने पर सौर ऊर्जा के भरपूर उपयोग का प्लान बनाती रही हैं। लेकिन यह कभी कामयाब नहीं दिखता। हालांकि इस बार प्रधानमंत्री ने खुद कमर कसी है। वे चाहते हैं कि प्रधानमंत्री सहज बिजली हर घर योजना या’सौभाग्यÓ योजनाओं के तहत दिसंबर 2018 तक हर दलित – आदिवासी घर में बिजली का कनेक्शन हो और रात में वहां हमेशा रोशनी जले। इस योजना के लिए रुपए16 हजार करोड़ मात्र से कुछ ज़्यादा राशि लग सकती है लेकिन बिना खर्च के बिजली घर-घर होगी।

यह योजना 2015 में शुरू हुई पंडित दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना और राजीव गांधी ग्रामीण बिजलीकरण योजना पर आधारित है जो 2005 में शुरू हुई थी। इन दोनों ही योजनाओं के तहत गरीब को मुफ्त बिजली दी जाती थी। अब शायद उन योजनाओं पर ध्यान देते हुए उन गांवों में बिजली कनेक्शन पहुंचा दिया जाए जहां सत्तर साल में बिजली का तार और खंभे तो हैं लेकिन न बिजली आती है और न बिजली कनेक्शन ही हैं।