देवभूमि भी सुरक्षित नहीं महिलाओं के लिए

0
299

21 फरवरी को नाहन पुलिस थाना रेणुका में एक व्यक्ति की शिकायत पर दो युवकों के खिलाफ  युवती से छेड़छाड़ और जान से मारने की धमकी देने का मामला दर्ज किया गया। शिकायत के आधार पर रेणुका पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी। जानकारी के अनुसार रेणुका थाने में युवती के पिता ने शिकायत दर्ज करवाई कि कोटीधिमान इलाके के भवाई बलीच गांव के दो भाइयों ने उसकी बेटी के साथ छेड़छाड़ की है। साथ ही यह बात किसी दूसरे को बताने पर जान से मारने की धमकी भी दी। शिकायत के बाद पुलिस ने वीरेंद्र सिंह व प्रकाश के खिलाफ  मामला दर्ज कर लिया है। मामले की पुष्टि एएसपी मोनिका ने की है।

छानबीन से जाहिर होता है कि महिलाओं के खिलाफ अपराध (दुष्कर्म) की सबसे ज्यादा घटनाएं कांगड़ा जिले में हुई हैं। 2015 में इस जिले में 46, 2016 में 41 और 2017 में 37 घटनाएं हुईं। इसी तरह शिमला में इन वर्षों में क्रमश 24, 28 और 29, कुल्लू में 23, 17 और 19 चम्बा में 26, 15 और 10, मंडी में 29, 30 और 37 जबकि सिरमौर में क्रमश 31, 34 और 23 दुष्कर्म की घटनाएं हुईं।

सीएम भी चिंतित

मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर भी इन आंकड़ों से विचलित दिखते हैं। ”तहलका’ से बातचीत में उन्होंने कहा कि वे दूसरे प्रदेशों से आंकड़ों की तुलना करके मामले की गंभीरता कम नहीं करना चाहते। ठाकुर ने बताया कि मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने 26 जनवरी को ”शक्ति बटन ऐप्प” की शुरुआत की जिसमें संकट में फंसी महिला या लड़की को तुरंत मदद पहुँचाने और अपराधी को पकडऩे की सुविधा है। इसमें संकट में फंसी महिला या लड़की जैेसे ही अपने मोबाइल में इस ऐप्प पर लाल बटन दबाएगी, 20 सेकण्ड में इसकी सूचना पुलिस तक उसके फोन नंबर, नाम, लोकेशन समेत पहुँच जाएगी। पुलिस तुरंत हरकत में आकर अपराधी को दबोच सकती और महिला की मदद कर सकती है। इसके अलावा प्रदेश सरकार ने ”गुडिय़ा हेल्पलाइन” भी लांच की है। मुख्यमंत्री का कहना था कि इस मामले में उनकी सरकार बेहद संवेदनशील है और महिलाओं के खिलाफ अपराध पर सख्ती बरती जाएगी।

मजऱ् बढ़ता गया ज्यों – ज्यों दवा की

राष्ट्रीय क्राइम ब्यूरो के अनुसार 2011 से 2016  तक के छह सालों में देश भर में बलात्कार के 1,93,169 मामले दर्ज किए गए। ज़ाहिर है ये आंकडे पूरा सच बयान नहीं कर रहे क्योंकि ज़्यादातर मामलों में लोग पुलिस के पास नहीं जाते। बलात्कार के सर्वाधिक मामले 2016 के हैं। 2016 में 38,947 केस दर्ज किए गए।  ध्यान रहे कि 2017 के आकड़े अभी उपलब्ध नहीं है। बलात्कार के अपराध में मौत की सज़ा का प्रावधान हो जाने के बावजुद इनमें किसी प्रकार  की कोई कमी नहीं देखी गई है।2011 के 24,206 मामलों की बढ़ती यह गिनती 2016 में 38,947 तक पहुंच गई।

इसके अलावा 2012 में 24,923, 2013 में 33,707, 2014 में 36,735 और 2015 में 34,651मामले दर्ज किए गए।

2016 के आंकड़ों का अगर राज्यवार ब्यौरा देखा जाए तो बलात्कार के सर्वाधिक मामले मध्यप्रदेश (4,882) उत्तरप्रदेश (4816) और महाराष्ट्र (4,189) के हैं। 2015 में भी इस मामले में मध्यप्रदेश (4,391) नंबर एक पर था। इनके अलावा राजस्थान (3616) और दिल्ली (2155) भी महिलाओं के लिए सुरक्षित नहीं माने जा सकते। हिमाचल प्रदेश में 2016 में 252 महिलाओं से बलात्कार होना इस राज्य की संस्कृति को देखते हुए चिंता का विषय है।