देखते हैं किस करवट बैठता है बुंदेलखंड में ऊंट

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार केन-बेतवा के साथ अर्जुन सहायक परियोजनाओं को पूरा करेगी, खनन के पट्टे किये जा रहे हैं इससे खनिज के दाम काफी कम होंगे और लोगों को अपने मकान को बनवाने में सहूलियत होगी। उन्होंने कहा कि पानी और अन्ना प्रथा का समाधान करने के लिये प्रदेश की सरकार कटिबद्ध है। बुंदेलखंड की धरती को प्यासा नहीं रहने दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली सरकारों की नीतियों की वजह से बुन्देलखण्ड उपेक्षित व पिछड़ा रहा है लेकिन अब गांव, $गरीब, नौजवान और किसान का हम विकास करेंगे।

बुंदेलखंड के ललितपुर, झांसी, जालौन और बांदा के लोगों का कहना है कि जब केन्द्र और प्रदेश में भाजपा की ही सरकार है तो किसानों की मांगों और उनके कर्ज को क्यों माफ नहीं किया जा रहा और जो माफ किये जा रहे है उनके क्रियान्वयन विलम्ब क्यों हो रहा है। जब हमीरपुर में मुख्यमंत्री लोकार्पण और शिलान्यास कर रहे थे तभी कबरई के किसानों ने बताया कि जब भी देश में प्रदेश में और स्थानीय स्तर पर चुनाव आते है तभी नेताओं की दौरे और लुभावने भाषण सुनाई देते हंै पर इससे कुछ होता नहीं है।

किसान बृजकिशोर ने बताया कि जब प्रदेश में पूर्ण बहुमत की योगी सरकार बनी थी तब लगा था कि किसानों और गरीबों की सुनवाई होगी पर ऐसा कुछ नहीं हुआ काम करने का वही तरीका जो पहली की सरकारों में रहा है। ललितपुर के किसान व सामाजिक कार्यकर्ता प्रकाश गोसाई का कहना है कि माना कि सब कुछ सरकार नहीं कर पाती पर वह तो कर सकती है जो वह चुनाव के दौरान वोट बटोरने के लिये बोलती है। पर इस सरकार ने तो अभी तक कोशिश भी नहीं की है। दीपावली के दिन कई कस्बों और मुहल्लों में बिजली तक नहीं थी।

बांदा के युवा भाजपा नेता व बुंदेलखंड डिग्री कॉलेज के पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष राजेश श्ुाक्ला का कहना कि बुंदेलखंड सहित पूरे उत्तर प्रदेश में नगर निकाय चुनाव में भाजपा का परचम लहराएगा क्योंकि जिस तरीके से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की जनहित वाली योजनाओं को प्रदेश के मुख्यमंत्री योग आदित्य नाथ एक क्रमबद्ध तरीके से चला रहे हैं उससे प्रदेश में काफी विकास हो रहा है। उन्होंने कहा कि सपा और बसपा के दिन लद गये हैं कांग्रेस तो चुनाव अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिये ही चुनाव लड़ रही है।

चिरगांव निवासी पूरन लाल का कहना है नगर निकाय का चुनाव स्थानीय स्तर पर होता है जिसमें लोकल मुद्दे और समस्यायें होती हैं, इस लिहाज से इस चुनाव में समाज का प्रतिष्ठित नागरिक हर चुनाव जीतता है जो जन सरोकार में सदैव भागीदारी रखता हो। रहा सवाल राजनीतिक पार्टियों का उसका उतना महत्व नहीं होता जितना कि स्थानीय स्तर के लोकप्रिय लोगों का होता है और जनता उसका ही समर्थन करती है।

समाजवादी पार्टी के नेता राज किशोर का कहना है कि सात महीने की योगी सरकार में छह महीनों तक अधिकारियों का इस कदर बोलबाला रहा कि विधायकों तक की नहीं सुनी गई जिससे अधिकारियों ने जमकर जनता को लूटा है अब चुनाव पास देखकर विधायकों का अधिकार दिये गये है तो जनता समझ चुकी है सब दिखावा और जनता को गुमराह रकने वाली बात सरकार कर रही है भाजपा के नेता विनोद कुमार का कहना है कि भाजपा की स्थिति में सुधार तब होगा जब वह ज़मीन से जुड़े ईमानदार नेता को टिकट दें। उन्होंने कहा कि बसपा, सपा और कांग्रेस पार्टी के पास इस समय चुनाव में जीतने के लिये मुद्दे तक नहीं है वह जातीय आधार पर चुनाव लड़ेगी जिससे कुछ होना वाला नहीं है। चुनाव नवंबर में और मतगणना दिसम्बर में होनी है।

उल्लेखनीय है कि बुंदेलखंड पिछड़ता ही क्यों जा रहा इस पर न सियासतदान कोई ध्यान दे रहे हैं और न ही नौकरशाही। बस बात अटक कर रह जाती है। चुनाव के दौरान बुंदेलखंडवासी देखते रह जाते हैं। राजनीतिक पार्टियों के जातीय, धार्मिक और आर्थिक समीकरण को। ऐसे में बचा रह जाता है वो संघर्ष जो दो दशक से ज्य़ादा समय से वे कर रहे हैं।