दूरसंचार क्षेत्र के लिए मुफ़्त सुविधाएँ ठोस समाधान नहीं!

इसमें कोई सन्देह नहीं है कि पैकेज में कई उपाय शामिल हैं, जिनमें से सबसे महत्त्वपूर्ण समायोजित सकल राजस्व (एजीआर) बक़ाया पर चार साल की मोहलत है। इसके अलावा एजीआर को युक्तिसंगत बनाया गया है। ग़ैर-दूरसंचार राजस्व को एजीआर की परिभाषा से सम्भावित आधार पर बाहर रखा जाना है।

एजीआर, सरकार और दूरसंचार कम्पनियों के बीच एक शुल्क-साझाकरण तंत्र है, जो लम्बे समय से एक विवादास्पद मुद्दा रहा है। सरकार ने दावा किया है कि एजीआर में दूरसंचार और ग़ैर-दूरसंचार सेवाओं दोनों से सभी राजस्व शामिल होना चाहिए, जबकि कम्पनियों का कहना है कि एजीआर केवल मुख्य सेवाओं से सम्बन्धित होना चाहिए। इसने वोडाफोन आइडिया पर लगभग 59,000 करोड़ रुपये और भारती एयरटेल पर लगभग 44,000 करोड़ रुपये का बोझ डाला है।

एकत्र की गयी जानकारी से पता चलता है कि वोडाफोन आइडिया पर बैंकों का 23,000 करोड़ रुपये से अधिक का बक़ाया है। उसे स्पेक्ट्रम शुल्क पर सरकार को 94,000 करोड़ रुपये का भुगतान भी करना होगा। फिर एजीआर बक़ाया अलग से है। अगर कम्पनी बन्द हो जाती है, तो बैंकों और सरकार को उनके देय राशि का एक अंश ही मिलेगा। कम्पनी आंशिक रूप से सरकार द्वारा लगाये गये कई शुल्कों और कर्तव्यों के कारण। बड़े पैमाने पर क़र्ज़ के कारण दिवालिया होने की ओर बढ़ रही थी। वोडाफोन आइडिया के पतन ने भारत का एकाधिकार कमज़ोर ही किया है।

कुछ महीने पहले कुमार मंगलम बिड़ला ने वोडाफोन आइडिया से ग़ैर-कार्यकारी निदेशक और ग़ैर-कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में इस्तीफ़ा दे दिया था। वेंचर में बिड़ला के पार्टनर वोडाफोन ग्रुप पीएलसी ने भी भारत में अपने ज्वाइंट वेंचर में कोई इक्विटी लगाने से इन्कार कर दिया। नतीजतन कम्पनी को दिवालियेपन का सामना करना पड़ा। वास्तव में अधिस्थगन दूरसंचार क्षेत्र को जीवन का एक नया अवसर देता है; लेकिन इसका लाभ उठाने वाली दूरसंचार कम्पनियों को भुगतान की अवधि के लिए ब्याज का भुगतान करना पड़ता है। उनके पास स्थगन के कारण होने वाले ब्याज भुगतान को इक्विटी में बदलने का विकल्प भी होगा, जिसे सरकार को सौंप दिया जाएगा। इससे पहले विभिन्न लाइसेंस प्राप्त सेवा क्षेत्रों या एलएसए में कई बैंक गारंटियों की आवश्यकता होती थी। अब एक ही बीजी काफ़ी होगा। इसके अलावा लाइसेंस शुल्क और स्पेक्ट्रम उपयोग शुल्क के विलंबित भुगतान के लिए दूरसंचार कम्पनियों को अभी भुगतान की तुलना में दो फ़ीसदी कम ब्याज दर का भुगतान करना होगा। जुर्माने पर ब्याज हटा दिया गया है। अब से आयोजित नीलामी के लिए क़िश्त भुगतान सुरक्षित करने के लिए किसी बीज की आवश्यकता नहीं होगी। उधर भविष्य की नीलामी के लिए स्पेक्ट्रम की अवधि 20 से बढ़ाकर 30 साल कर दी गयी है। भविष्य की नीलामी में हासिल किये गये स्पेक्ट्रम के लिए 10 साल बाद स्पेक्ट्रम के समर्पण की अनुमति दी जाएगी। निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए दूरसंचार क्षेत्र में स्वचालित मार्ग के तहत 100 फ़ीसदी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की अनुमति दी गयी है। कैबिनेट ने इस क्षेत्र में व्यापार करने में आसानी को बेहतर बनाने के उपायों को भी मंज़ूरी दी है।

क्या कहती है सरकार?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने दूरसंचार क्षेत्र में कई संरचनात्मक और प्रक्रिया सुधारों को मंज़ूरी दी। सरकार कहती है कि उसका निर्णय रोज़गार के अवसरों की रक्षा और सृजन करने, स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने, उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करने, लिक्विडिटी को बढ़ावा देने, निवेश को प्रोत्साहित करने और दूरसंचार कम्पनियों पर नियामक बोझ को कम करने के लिए है। अपेक्षा ठीक है। लेकिन यह आर्थिक प्रमुखों के क दृष्टिकोण परिवर्तन पर निर्भर है। यह बेहतर होगा कि सरकारी अधिकारियों से इंडिया इंक को वह सम्मान वाला व्यवहार मिले, जिसके वो हक़दार हैं और नये विचारों पर ध्यान केंद्रित करते हैं। यह दूरसंचार जैसे बीमार क्षेत्रों को फिर से सक्रिय करने में मदद करेगा। कैबिनेट का फ़ैसला एक मज़बूत दूरसंचार क्षेत्र के प्रधानमंत्री के दृष्टिकोण को पुष्ट करता है। प्रतिस्पर्धा और ग्राहकों की पसन्द के साथ समावेशी विकास के लिए अंत्योदय और असम्बद्ध को जोडऩे के लिए हाशिये के क्षेत्रों को मुख्यधारा और सार्वभौमिक ब्रॉडबैंड पहुँच में लाना अहम है। इस पैकेज से 4जी प्रसार को बढ़ावा देने, तरलता बढ़ाने और 5जी नेटवर्क में निवेश के लिए अनुकूल माहौल तैयार करने की भी उम्मीद है।