दुस्साहस की हद

सर्वोच्च न्यायालय ने फटकारा

लखीमपुर खीरी हत्याकांड पर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश सरकार को जमकर फटकार लगायी। सर्वोच्च न्यायालय ने पूछा कि आरोप 302 (हत्या) का है, तो आप उससे वैसा ही वर्ताव करें, जैसे बाक़ी हत्या के मामलों में आरोपी के साथ किया जाता है। सर्वोच्च न्यायालय में 8 अक्टूबर को सुनवाई से पहले उत्तर प्रदेश पुलिस ने मुख्य आरोपी आशीष मिश्रा को पूछताछ के लिए बुलाया था। पुलिस के सामने आरोपी के पेश होने पर सर्वोच्च न्यायालय ने दो-टूक कहा कि 302 के आरोप में ये नहीं होता कि ‘प्लीज आ जाएँ’। नोटिस किया गया है कि प्लीज आइए! प्रधान न्यायाधीश एन.वी. रमना ने कहा कि मौक़े पर चश्मदीद गवाह हैं। हमारा मत है कि जहाँ 302 का आरोप है, वह गम्भीर मामला है और आरोपी के साथ वैसा ही व्यवहार होना चाहिए जैसे बाक़ी मामलों में ऐसे आरोपी के साथ होता है। क्या बाक़ी मामलों में आरोपी को नोटिस जारी किया जाता है कि आप प्लीज आ जाइए? उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे ने कहा कि एक आरोपी को समन (नोटिस) दिया गया है और कल बुलाया गया है। साल्वे ने कहा कि आरोप लगाया गया था कि गोली मारी गयी है; लेकिन गोली की बात पोस्टमॉर्टम में नहीं है। इस पर न्यायाधीश ने कहा कि क्या ये ग्राउंड है कि आरोपी को न पकड़ा जाए? साल्वे बोले कि नहीं मामला गम्भीर है। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि गम्भीर मामला है। लेकिन मामले को वैसे नहीं देखा जा रहा है। हम समझते हैं कि इस तरह से कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। कथनी और करनी में फ़र्क़ नज़र आ रहा है। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि साधारण स्थिति में 302 यानी हत्या मामलों में पुलिस क्या करती है? वह आरोपी को गिरफ़्तार करती है। न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि आरोपी कोई भी हो, क़ानून को अपना काम करना चाहिए। साल्वे ने इस पर कहा कि जो भी कमी है, कल तक ठीक हो जाएगा। मुख्य न्यायाधीश ने उत्तर प्रदेश सरकार को अपने डीजीपी से यह सुनिश्चित करने के लिए भी कहा कि जब तक कोई अन्य संस्था इसे सँभालती है, तब तक मामले के सुबूत सुरक्षित रहें। अब 20 अक्टूबर को इस मामले की अगली सुनवाई के बाद ही कोई कार्रवाई होगी।

 

क्या भाजपा से नाराज़ हैं वरुण?

‘दु:ख भरे दिन बीते रे भइया, सुख भरे दिन आयो रे…’ प्रयागराज में लगे कांग्रेस नेताओं के इस पोस्टर में सोनिया गाँधी के साथ वरुण गाँधी की भी फोटो और उपरोक्त पंक्तियाँ लिखी दिखीं। वरुण वैसे कांग्रेस में जाने की ख़बरों को अफ़वाह बता रहे हैं; लेकिन उत्तर प्रदेश की राजनीति में इसकी चर्चा जबरदस्त है।

भाजपा से उनकी नाराज़गी कुछ समय से साफ़ दिख रही है। उनके कई ट्वीट, ख़ासकर लखीमपुर खीरी घटना के बाद उनकी टिप्पणियाँ भाजपा को असहज करने वाली हैं। भाजपा ने हाल में वरुण और उनकी माता मेनका गाँधी को राष्ट्रीय कार्यकारणी से बाहर कर दिया है। जानकारों के मुताबिक, वरुण प्रियंका गाँधी के क़रीब रहे हैं और उनसे प्रियंका की पारिवारिक बातें होती रहती हैं। हालाँकि उत्तर प्रदेश की राजनीति में क्या वरुण और प्रियंका साथ आएँगे? इस पर अभी कुछ कहना कठिन कठिन है। हालाँकि कांग्रेस के नेताओं ने प्रयागराज में उनके स्वागत के जो पोस्टर अचानक 12 अक्टूबर को लगाये, उससे चर्चाएँ तो शुरू हो ही गयी हैं। इसमें वरुण गाँधी के साथ-साथ कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी और नीचे इरशाद उल्ला और बाबा अभय अवस्थी की तस्वीर लगी थी। उनके नाम के साथ वरिष्ठ कांग्रेस नेता लिखा गया था। वरुण पहले ही अपने ट्विटर बायो से ‘भाजपा’ हटा चुके हैं। वरुण बदले तेवर के साथ लखीमपुर की घटना में भाजपा सरकार को लगातार कटघरे में खड़ा करते रहे हैं। गन्ने का भाव 400 रुपये घोषित करने की माँग के अलावा किसानों के मुद्दे उठाने वाले वरुण ने 5 सितंबर की मुज़फ़्फ़रनगर महापंचायत को लेकर किसानों का समर्थन किया था।

लखीमपुर खीरी हिंसा को हिन्दू बनाम सिख की लड़ाई में बदलने की कोशिश की जा रही है। यह न केवल एक अनैतिक, बल्कि झूठा आख्यान है। उन घावों को फिर से कुरेदना ख़तरनाक है, जिसको ठीक होने में पूरी एक पीढ़ी लगी है। हमें राजनीतिक लाभ को राष्ट्रीय एकता से ऊपर नहीं रखना चाहिए। सामने आये वीडियो से बिल्कुल साफ़ है, हत्या के ज़रिये प्रदर्शनकारियों को चुप नहीं कराया जा सकता। निर्दोष किसानों के ख़ून का हिसाब होना चाहिए, जवाबदेही होनी चाहिए। उन्हें न्याय दिया जाना चाहिए, इससे पहले की हर किसान के दिमाग़ में यह बात बैठ जाए कि सत्ता अहंकारी और क्रूर है।

वरुण गाँधी

भाजपा सांसद

 

प्रियंका गाँधी के तेवर से उत्तर प्रदेश की राजनीति में हलचल

माथे पर तिलक और नवरात्रि के चौथे दिन की देवी प्रार्थना। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकसभा क्षेत्र वाराणसी में 10 अक्टूबर को उत्तर प्रदेश की प्रभारी महासचिव प्रियंका गाँधी वाड्रा का यह रूप शुद्ध राजनीतिक था; लेकिन फिर भी भाजपा ने इससे बेचैनी महसूस की। उसने इसे प्रियंका का राजनीतिक पर्यटन बताया। हालाँकि उत्तर प्रदेश के कांग्रेस काडर में प्रियंका की इस सक्रियता से अद्भुत जोश है। प्रियंका गाँधी की इस सक्रियता और तेवर ने निश्चित ही उत्तर प्रदेश की राजनीति में खलबली मचा दी है। इसके बाद प्रियंका लखनऊ में कांग्रेस के देशव्यापी मौन व्रत कार्यक्रम में बैठीं और तिकुनिया में शहीद किसानों की अन्तिम अरदास में भी पहुँचीं।

अगले साल के विधानसभा चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश में प्रियंका गाँधी ने जिस तरह से मोर्चा सँभाला है, उसने प्रदेश की राजनीति को अचानक गरमा दिया है। राज्य में कांग्रेस का संगठन भले कमज़ोर हो, चुनाव से कुछ ही महीने पहले प्रियंका गाँधी ने एक सधी हुई रणनीति के तहत धावा बोलकर भाजपा और उसके विरोध वाले दलों सपा और बसपा को भी हैरान कर दिया है।

भीड़ वोट में बदलेगी या नहीं यह तो पता नहीं; लेकिन वाराणसी में प्रियंका की किसान न्याय रैली में जुटी बड़ी भीड़ बताती है कि उन्हें राज्य में गम्भीरता से लिया जा रहा है। इसे पहले प्रतिज्ञा यात्रा का नाम दिया गया था; लेकिन लखीमपुर खीरी में किसानों की हत्यायों से देश में उपजे ग़ुस्से के बाद इसे किसान न्याय यात्रा का नाम दे दिया गया। अब कम-से-कम जनता की प्रतिक्रिया से तो यही लगता है कि प्रियंका गाँधी चुनाव से पहले भाजपा से लेकर सपा, बसपा सब के लिए चुनौती बन सकती हैं।

बाराणसी की रैली में प्रियंका के हाव-भाव देखें, तो उन्होंने दादी इंदिरा गाँधी का अंदाज़ अपनाने की पूरी कोशिश की और इसमें सफल भी दिखीं। मुद्दों पर जिस तरह से ज़ोर देकर उन्होंने बात की, वह पूरा तरीक़ा इंदिरा गाँधी वाला था। जनता भी तालियाँ बजाकर उनका उत्साह बढ़ाती दिखी। भाजपा के लिए परेशान करने वाली बात यह है कि प्रियंका उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक अलग छवि गढऩे में सफल होती दिख रही हैं। उनके मुद्दे उठाने के तरीक़े के पीछे गम्भीरता झलक रही है और वे इस बार मैदान में मज़बूती से टिककर भाजपा और अन्य विरोधियों से टक्कर लेने के मूड में हैं।

बाराणसी में जब प्रियंका ने भाषण की शुरुआत में कहा कि आज नवरात्र का चौथा दिन है और वे व्रत कर रही हैं, तो ख़ूब ताली बजी। उत्तर प्रदेश के मिजाज़ को पकड़कर जब प्रियंका ने माँ की स्तुति ‘या देवी सर्वभूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता…नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै’ की तो उपस्थित जनता ने इसका स्वागत किया। बाराणसी में जुटी बड़ी भीड़ देखकर प्रियंका भी गदगद दिखीं। कांग्रेस ने हाल में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को उत्तर प्रदेश में ज़िम्मा दिया है और वह प्रियंका गाँधी के साथ रहे। कांग्रेस के तमाम प्रमुख नेता प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू, आराधना मिश्रा मोना, दीपेंद्र हुड्डा, प्रमोद तिवारी, सलमान ख़ुर्शीद, पी.एल. पुनिया, राजेश मिश्रा, अजय राय, इमरान प्रतापगढ़ी, प्रदीप माथुर, विवेक बंसल, प्रदीप जैन, दीपक सिंह एमएलसी, सुप्रिया श्रीनेत, सोहेल अंसारी, जफ़र अली नक़वी और कई अन्य इस मौक़े पर उपस्थित रहे। ज़ाहिर है उत्तर प्रदेश में कांग्रेस का काडर निराशा की धूल झाड़कर चुनाव के लिए सक्रिय हो रहा है। बघेल के अलावा पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को साथ रखकर प्रियंका ने बड़ा राजनीतिक सन्देश दिया। पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू अलग से लखीमपुर पहुँचे और घटना के प्रभावित सभी परिवारों से मिले। इसका भी बहुत बड़ा सन्देश गया।

भाषण में प्रियंका ने बहुत ही चतुराई से उत्तर प्रदेश के हर मुद्दे को छुआ। उन्होंने सोनभद्र में आदिवासियों की हत्या से लेकर, महँगाई, रोज़गार, लखीमपुर घटना और मुख्यमंत्री योगी की उन (प्रियंका गाँधी) पर झाड़ू लगाने को लेकर की विवादित टिप्पणी तक हर बिन्दु को राजनीतिक लहज़े में पकड़ा और योगी से लेकर प्रधानमंत्री मोदी तक पर हमला किया। कांग्रेस के पास राज्य में बहुत मज़बूत संगठन नहीं है। प्रियंका इस कमज़ोरी को बखूबी समझती हैं। वह माहौल बनाने पर फोकस कर रही हैं। उन्हें पता है कि संगठन भले कमज़ोर हो, प्रदेश में कांग्रेस का पुराना जनाधार है जिसे पुनर्जीवित माहौल बनाकर किया जा सकता है। सन् 2009 में लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को उत्तर प्रदेश में मिलीं 23 सीटें इसका प्रमाण हैं। सिर्फ़ 12 साल पहले यदि कांग्रेस कमोवेश इसी संगठन के बूते माहौल बनने पर 23 लोकसभा सीटें जीत सकती है, तो इससे साबित होता है कि कांग्रेस का पुराना जनाधार कभी भी पुनर्जीवित हो सकता है।

प्रियंका गाँधी ने वाराणसी की जनसभा में यह भी साफ़ कह दिया कि वह यहाँ टिकने के लिए आयी हैं और जब तक भाजपा को सत्ता से उखाड़ नहीं देतीं, यहीं रहेंगी। इससे कांग्रेस कार्यकर्ताओं में जोश बढ़ा है। यह पहली बार हुआ कि प्रियंका गाँधी और बाद में राहुल गाँधी की ज़िद के आगे योगी सरकार को झुकना पड़ा और उन्हें पीडि़त परिवारों से मिलने की इजाज़त देनी पड़ी।

गाँधी ने जब किसानों के अलावा घटना में जान गँवाने वाले दूसरे लोगों (भाजपा ने जिन्हें अपना कार्यकर्ता बताया है) के परिजनों से भी मिलने की इच्छा जतायी, तो भाजपा के हाथ-पाँव फूल गये। आनन-फानन अधिकारियों के ज़रिये कहलवाया गया कि वह प्रियंका से नहीं मिलना चाहते। देखें, तो प्रियंका गाँधी उत्तर प्रदेश में महासचिव का ज़िम्मा मिलने के बाद से ही सक्रिय हैं। वह कमोवेश हरेक बड़ी घटना पर वहाँ लोगों के परिजनों से मिली हैं। इसके अलावा उन्होंने संगठन से जुड़े दौरे भी ख़ूब किये हैं।

अगले साल के पहले महीनों में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले प्रियंका गाँधी की इस सक्रियता ने उन्हें जबरदस्त मीडिया कवरेज दी है। लखीमपुर खीरी घटना के समय वह लगातार तीन दिन टीवी चैनलों पर छायी रहीं। प्रदेश में लोग भी उनकी चर्चा करते दिखे। इसके तुरन्त बाद उन्होंने वाराणसी में धावा बोलकर जाता दिया कि वह ख़ामोश नहीं बैठने वाली हैं। प्रियंका की सक्रियता का ही दबाव था कि मुख्यमंत्री योगी को अपने मंत्रियों को टीवी चैनलों में कांग्रेस के ख़िलाफ़ बोलने के लिए तैनात करना पड़ा; लेकिन इस सबके बावजूद प्रियंका हरेक पर भारी पड़ती दिखीं।

 

उत्तर प्रदेश के बड़े मामले और प्रियंका

 2019 में आदिवासियों की हत्या पर सोनभद्र गयीं।

 2020 में हाथरस रेप-हत्या की शिकार लड़की के परिवार से मिलीं।

 2020 और 2021 में आधा दर्ज़न बड़े मामलों में पीडि़तों से मिलीं।

 2021 में पसगंवा में उत्पीडऩ की शिकार महिला से मिलीं।

 2021 में लखीमपुर खीरी हत्याकांड पर जबरदस्त सक्रियता दिखायी और पीडि़त परिवारों से मिलीं।