दुनिया के 4.50 करोड़ लोग भुखमरी के कगार पर

कोरोना का असर

कई रिपोट्र्स से ज़ाहिर होता है कि कोरोना महामारी ने भी दुनिया भर में भुखमरी पैदा की है। संयुक्त राष्ट्र महासभा की मानवाधिकार समिति की रिपोर्ट के मुताबिक, कोरोना महामारी की रोकथाम के लिए उठाये गये क़दमों और बिगड़ते वैश्विक सम्बन्धों के कारण उत्तर कोरिया भी गम्भीर भुखमरी के कगार पर है। वहाँ भुखमरी के चलते लोग आत्महत्या करने को मजबूर हो चुके हैं। संयुक्त राष्ट्र की इस रिपोर्ट में दावा है कि उत्तर कोरिया वैश्विक समुदाय से जितना अलग-थलग नज़र आ रहा है, उतना पहले कभी नहीं था। इसके मुताबिक, उत्तर कोरिया में भोजन का गम्भीर संकट है। लोगों की आजीविका मुश्किल दौर में है। बच्चे और बुज़ुर्ग भुखमरी का सामना कर रहे हैं। राजनीतिक क़ैदियों के शिविरों तक में खाद्यान्न की कमी बेहद चिन्ताजनक स्तर पर है। याद रहे डेमोक्रेटिक पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ कोरिया (डीपीआरके) ने महामारी रोकने के इरादे से देश की सीमाएँ सील कर दी थीं। इसका असर यह हुआ कि उत्तर कोरिया के लोगों के स्वास्थ्य पर गम्भीर असर पड़ा। इससे देश के बुनियादी स्वास्थ्य ढाँचे में निवेश की गम्भीर कमी हो गयी। सरकार के सीमाएँ सील करने के क़दम को विशेषज्ञों ने आत्मघाती बताया है। इसका नतीजा लोगों के आत्महत्या करने के रूप में सामने आया है। यही नहीं, लोग देश से पलायन कर रहे हैं। देश में मानवाधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र के विशेष जाँचकर्ता की आख़िरी रिपोर्ट में कहा गया है कि आवाजाही पर पाबंदी और राष्ट्रीय सीमाओं को सील करने से बाज़ार शिथिल पड़ गये हैं। लोगों के लिए भोजन सहित बुनियादी ज़रूरतें पहुँचाने में बाधा से कई संकट पैदा हुए हैं।

15 करोड़ बच्चे स्कूली आहार से वंचित

संयुक्त राष्ट्र की जानकारी कहती है कि एक अनुमान के मुताबिक, दुनिया भर में 15 करोड़ बच्चे अब भी स्कूलों में मिलने वाले आहार और बुनियादी स्वास्थ्य और पोषण सेवाओं से वंचित हैं। कोई 60 से ज़्यादा देशों ने स्कूलों में हर बच्चे के लिए साल 2030 तक पोषक आहार सुनिश्चित करने के उद्देश्य से स्कूली आहार गठबन्धन की स्थापना की है। यूएन एजेंसियों ने स्कूली बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य व उनकी शिक्षा में बेहतरी लाने पर केंद्रित एक अंतरराष्ट्रीय गठबन्धन को समर्थन देने की प्रतिबद्धता जतायी है। साल 2020-21 में कोविड-19 महामारी के कारण विश्व भर में शिक्षण कार्य में उत्पन्न हुए व्यवधान और व्यापक पैमाने पर तालाबन्दी लागू होने से स्कूलों में मिलने वाले आहार सहित अन्य कार्यक्रम प्रभावित हुए। कोरोना-काल के दौरान बड़ी संख्या में विद्यार्थियों के लिए स्कूलों में सेहतमंद आहार या स्कूल-आधारित स्वास्थ्य और पोषण सेवाओं में रुकावटें खड़ी हुई हैं। खाद्य और कृषि संगठन, संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन, संयुक्त राष्ट्र बाल कोष, विश्व खाद्य कार्यक्रम और विश्व स्वास्थ्य संगठन का एक साझा वक्तव्य कहता है कि उनकी पहल में शामिल हर यूएन एजेंसी इस गठबन्धन के लिए आवश्यक विशेषज्ञताएँ मुहैया कराएगी। इसमें ग़ैर-सरकारी, नागरिक समाज संगठनों और संस्थाओं से 50 से ज़्यादा साझीदार शामिल हैं।

“भुखमरी के मुहाने पर बैठे करोड़ों लोग अपना सब कुछ लुटा चुके हैं। अब उनके पास कोई दूसरा संसाधन या विकल्प भी नहीं बचा है। 43 देशों में हालात की समीक्षा के दौरान ये जानकारी सामने आयी है कि कुछ लोगों को हर रोज़ खाना तक नहीं मिल पा रहा है।”

डेविड बीजली

कार्यकारी निदेशक, डब्ल्यूएफपी