तस्करों के निशाने पर बेटियाँ

दुनिया का तीसरा बड़ा अपराध
ड्रग्स और हथियारों की तस्करी के बाद मानव तस्करी दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा संगठित अपराध है। आज क़रीब 80 फ़ीसदी मानव तस्करी जिस्मफ़रोशी के लिए होती है। नई दिल्ली के पश्चिमी इलाक़ों में घरेलू नौकर उपलब्ध कराने वाली 500 एजेंसियाँ हैं। इनके ज़रिये छोटी बच्चियों को बेचा जाता है। इनसे ज़्यादातर को घरेलू काम के बजाय जिस्मफ़रोशी करने वालों को बेच दिया जाता है। राजस्थान के अलवर में खैरथल और गाजूकी सरीखे ऐसे ठौर-ठिकाने हैं, जहाँ इन लड़कियों को जल्दी से जवान बनाने के लिए ऑक्सीटोसीन नामक इंजेक्शन दिये जाते हैं।

एक प्रतिष्ठित पत्रिका ने बड़े मार्मिक शब्दों में इस ह$कीक़त का मुजाहिरा किया है कि ‘यहाँ न सपनों की दुनिया है, न ख़्वाबों का हमसफ़र, अन्धे हैं तमाम रास्ते, जहाँ रूह को बेचकर हर बात होती है। यहाँ इशारों में जिस्मों को ख़रीदा जाता है। लड़कियों को बहला-फुसलाकर ले जाने में स्थानीय एजेंट काम करते हैं। ऐसे एजेंट गाँवों में बेहद ग़रीब परिवारों की कम उम्र की बच्चियों पर नज़र रखकर उनके परिवारों को शहरों में अच्छी नौकरी का झाँसा देते हैं। कहीं-कहीं लड़कियों को प्रेमजाल में फँसाकर भगा लिया जाता है।

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की रिपोर्ट बताती है कि सन् 2021 में 6,533 मानव तस्करी के मामले सामने आये। रिपोर्ट में स्पष्ट उल्लेख है कि इसमें केवल मानव तस्करी-रोधी इकाइयों में दर्ज मानव तस्करी के मामले हैं। ज़ाहिर है कि और भी कई मामले ऐसे हो सकते हैं, जो इन इकाइयों तक पहुँचे ही नहीं। ज़्यादातर मामले वेश्यावृत्ति करवाने और चाइल्ड पोर्नोग्राफी के हैं। सबसे ज़्यादा बाल वेश्यावृत्ति के लिए राजस्थान में मानव तस्करी हो रही है। मानव के बढ़ते मामल राजस्थान पुलिस के लिए चुनौती बने हुए हैं। नेशनल क्राइम ब्यूरो रिकॉर्ड के आँकड़ों की मानें, तो मानव तस्करी में राजस्थान देश में दूसरे नंबर पर है।

प्रयास नाकाफ़ी
हालाँकि कई संस्थाओं के सहयोग से पुलिस लगातार बाल-वेश्यालयों और बाल-मज़दूरी के मामलों की धरपकड़ के अभियान चलाती है। लेकिन इसे पर्याप्त नहीं कहा जा सकता है। अलवर के खैरथल गाजूकी और बूँदी के रामगढ़ आदि इलाक़ों की बात करें, तो वहाँ के लोगों पर खेलाबड़ी के नाम से इस धन्धे से जुड़े हुए हैं। इसकी आड़ में यहाँ मर्द आस-पास के गाँवों से बच्चियों को उड़ाने और बेचने के कारोबार से भी जुड़े हुए हैं। स्कूलों में ग़रीब लड़कियों को पढ़ाने के नाम से भी कई धन्धेबाज़ जुड़े हुए हैं। लेकिन इनकी पोल बेनक़ाब होने पर ही खुलती है। मसलन केरल के जिस स्कूल मे बच्चियों को पढ़ाने के नाम से ले जाया जा रहा था। असल में वो स्कूल था ही नहीं। राजस्थान पुलिस ने वहाँ से बाल-वेश्यवृत्ति में फँसी एक दर्ज़न लड़कियों को मुक्त करवाया। आदिवासी इलाक़ों से लड़कियों की तस्करी के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। राजस्थान पुलिस ने बदहवास हालत में मिलीं छत्तीसगढ़ से बाँसवाड़ा की एक दर्ज़न लड़कियों को मुक्त करवाया।

मानव तस्करी बहुत बड़े पैमाने पर की जा रही है, जिसमें कम उम्र के बच्चों, ख़ासतौर से लड़कियों को निशाना बनाया जा रहा है। भारत में कई संस्थाएँ हैं, जो यौन तस्करी (सेक्स ट्रैफिकिंग) से पीडि़त लोगों के लिए काम करती है। इसकी प्रमुख डॉ. सुनीता कृष्णन का प्रज्ज्वला नाम का एनजीओ है। डॉ. सुनीता ख़ुद एक दुष्कर्म पीडि़ता रह चुकी हैं। उनकी यह संस्था तस्करी की शिकार महिलाओं और बच्चियों के लिए पुनर्वास कराने का काम करती है। प्रज्ज्वला जिस्मफ़रोशी में लिप्त महिलाओं के बच्चों उज्ज्वल भविष्य के लिए भी काम करती है, ताकि वे एक बेहतर जीवन जी सकें। सुनीता कहती है कि चकला घरों से महिलाओं को बचाकर लाना बेहद मुश्किल काम होता है। इस दौरान अक्सर उन पर हमले भी किये गये हैं।