झारखण्ड की युवा प्रतिभा को कुन्द कर रहा जेपीएससी!

जेपीएससी पीटी का रिजल्ट निकलने के बाद से छात्र आन्दलोनरत हैं। वे सड़कों पर उतरे हुए हैं। पिछले एक महीने से लगातार धरना प्रदर्शन चल रहा है। विपक्षी दल उन्हें समर्थन दे रहा है। इस बीच झारखण्ड विधानसभा का शीतकाली सत्र 16 से 22 दिसंबर तक चला।

इस सत्र में विपक्षी भाजपा ने जेपीएससी का मुद्दा ज़ोर-शोर से उठाया। सदन के बाहर और अन्दर प्रदशर्न किया। पाँच दिन की बैठकों में चार दिन जेपीएससी मुद्दे पर सदन की कायर्वाही सुचारू रूप से नहीं चल सकी। मुख्यमंत्री हेमंत सोरने ने विधानसभा में जवाब दिया। उन्होंने विपक्ष पर प्रहार किया और जेपीएससी परीक्षा में सरकारी हस्तक्षेप नहीं करने की बात कही। उनके जवाब से सदस्य सन्तुष्ट नहीं हुए। इसके बाद मामला बयानबाज़ी तक ही सीमित रह गया। इस चार दिन के के विपक्षी हंगामे और छात्रों के आन्दोलन का फ़िलहाल तो कोई हल निकलता नहीं दिख रहा।

कैसे धुलेंगे दाग़?

देश में सम्भवत: झारखण्ड ही एक ऐसा राज्य है, जहाँ युवाओं को रोज़गार मुहैया कराने वाली सबसे बड़ी संवैधानिक संस्थान पर इतने दाग हैं कि उन्हें धोना आसान नहीं है। युवाओं को जेपीएससी पर से भरोसा ख़त्म हो गया है। पूरे देश में झारखण्ड बदनाम हो रहा है। सवाल है कि आख़िर दाग़ धुलेंगे कैसे? इस गड़बड़ी के लिए ज़िम्मेदार कौन है? उसके ख़िलाफ़ क्या कार्रवाई हो रही है? इस पर न ही आयोग ने अब तक कोई जवाब दिया और न ही विधानसभा सदन में सरकार की ओर से कोई सन्तुष्टिपूर्ण जवाब आया। शिक्षाविदों और जानकारों की मानें तो जेपीएससी को ठीक करने के लिए इसके संगठनात्मक ढाँचे में पूरी तरह बदलाव किये जाने की ज़रूरत है। यहाँ ऐसे अधिकारियों और विद्वानों को लाया जाना चाहिए, जिनकी निष्ठा पर कभी भी सन्देह नहीं किया गया हो। साथ ही जेपीएससी को राजनीति और नेताओं के चंगुल से भी पूरी तरह आज़ाद करना होगा। ऐसा नहीं होगा, तो जेपीएससी पर लगे दाग़ न ही कभी धुलेंगे और न ही भविष्य में स्थिति सुधरेगी। यहाँ के प्रतिभावान छात्रों की इसी तरह हत्या होती रहेगी।

 

“जेपीएससी परीक्षा में भारी पैमाने में अभ्यर्थी शामिल हुए हैं। पहली बार इतने बड़े पैमाने पर नियुक्ति हो रही है। सामान्य कोटा में भी आदिवासी, दलित और पिछड़े वर्ग के लोग आये हैं। कमज़ोर, दलित और ओबीसी के बच्चे आगे आ रहे हैं, तो मनुवादी लोगों के पेट में दर्द हो रहा है। जेपीएससी स्वतंत्र एजेंसी है। पहले जेपीएससी के निर्णय पर सरकार के हस्तक्षेप की वजह से प्रश्नचिह्न लगा है। इस परीक्षा में सरकार को कोई हस्तक्षेप नहीं है। कोई भी पुष्टि करा दे कि सरकार ने परीक्षा से कोई छेड़छाड़ की हो या कोई हस्तक्षेप किया है, तो समझें।“

हेमंत सोरेन,

मुख्यमंत्री (विधानसभा में जवाब)

 

“जेपीएससी के मामले पर अपनी नाकामी और भ्रष्टाचार को छिपाने के लिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अब अनर्गल और बेतुका बयान दे रहे हैं। जब इनके नियुक्ति वर्ष और नौकरियों के वादे फुस्स हो गये, भ्रष्टाचार उजागर हो गया, तो विरोध करने वालों को मनुवादी और विहिप के लोग बता बैठे। जबकि सच यह है कि सरकार छात्र आन्दोलनों को दबाने के लिए तरह-तरह के षड्यंत्रों में जुटी है। अपनी विफलताओं पर पर्दा डालने और जेपीएससी के भ्रष्ट अध्यक्ष को बचाने में जुटी है। जब सब कुछ साफ़ और पारदर्शी है, तो सीबीआई जाँच से डर कैसा?”

बाबूलाल मरांडी,

नेता विधायक दल, भाजपा