झारखंड:फरारी का खेल!

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बहरहाल, इन प्रमुख प्रतिनिधियों के फरार होने की घटना से राज्य के राजनीतिक प्रहसन में एक नया अध्याय जरूर जुड़ा है. कहा जा रहा है कि राज्यसभा चुनाव में नोट फॉर वोट मामले में कुछ और प्रतिनिधि फरारी को तैयार हैं. वे प्रतीक्षा में हैं कि उनके खिलाफ मुकदमा खुले और वे अदृश्य हो जाएं.

झारखंड की राजनीति में यह कोई नई बात नहीं है. गत वर्ष कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सावना लकड़ा भी एक हत्याकांड में कई माह फरार थे. भाजपा के नेता व पूर्व मंत्री सत्यानंद भोक्ता की फरारी भी चर्चा में रही है. स्वास्थ्य मंत्री रह चुके भानुप्रताप देहाती भी एक वक्त फरार होकर खूब चर्चित हुए थे.

भाकपा माले विधायक विनोद सिंह कहते हैं, ‘न्यायालय ने भले ही राहत की बात की हो लेकिन जहां तक सरकार की बात है तो वह इतनी कमजोर नहीं है कि विधायक या किसी अन्य को गिरफ्तार न कर सके. यह सब सरकार और पुलिस की मिलीभगत से हो रहा है. सरकार सख्त हो तो वारंट निकलने के बाद लोगों को दुनिया के किसी कोने से खोजा जा सकता है. रमा खलखो के यहां जब छापा पड़ा तो रमा और सुबोधकांत भी थे पर उन्हें भगा दिया गया.’

वहीं विधायक बंधु तिर्की कहते हैं, ‘ये सब फरार कहां हैं? नलिन सोरेन रोज चश्मा लगाकर घूमते दिखते हैं. रमा भी घर के पास ही रहती हैं और रोज सुबह घर आती हैं. यह कहना सही होगा कि सरकार इन्हें गिरफ्तार नहीं करना चाहती.’

आशा थी कि पुलिस अधिकारी इन मामलों पर कुछ रोशनी डालेंगे लेकिन वे कुछ भी स्पष्ट कहने से कतराते नजर आए, आईजी (प्रोविजन) आरके मल्लिक ने प्रक्रिया की जानकारी देते हुए कहा कि जो भी व्यक्ति फरार होता है उसके घर एक माह का नोटिस लगाकर एक माह के अंदर कुर्की होती है. फिर उसकी समीक्षा होती है और उसके बाद उनकी संपत्ति को जब्त किया जाता है या कानूनी कार्रवाई की जाती है. उन्होंने भी इन मामलों के बारे में कोई खास मालूमात होने से इनकार किया. वहीं पुलिस प्रवक्ता रिचर्ड लाकड़ा से तमाम कोशिशों के बावजूद संपर्क नहीं हो सका.

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