जाँच की आँच से खलबली

जाँच की प्रतीक्षा करें : कस्वां


राजाराम प्रकरण में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्रीय प्रचारक निंबाराम को आरोपी बनाये जाने के मामले में प्रतिकार की भाषा बोलने वाले नेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ पर हमलावर होते हुए प्रदेश कांग्रेस के उप सचिव रामसिंह कस्वां का कहना है कि निंबाराम की मौज़ूदगी में रिश्वत माँगे जाने का वीडियो जारी होने के बाद कहने को क्या रह जाता है? बावजूद इसके राठौड़ इसे राष्ट्रवादी संगठन के ख़िलाफ़ साज़िश क़रार दे रहे हैं। क्या यह हैरानी की बात नहीं है? रामसिंह कहते हैं कि एफएसएल रिपोर्ट में वीडियो की प्रमाणिकता की पुष्टि हो जाने के बावजूद इसे सियासी बैर-भाव बताने की कोशिश करना तो चोरी और सीनाजोरी जैसा हुआ। रामसिंह कहते हैं कि एक तरफ़ संघ द्वारा कहा जाता है कि उनका संगठन रचनात्मक कार्यों को लोकतांत्रिक आवाज़ देने का काम करता है। तो क्या संघ के पदाधिकारियों को इस मामले की गहराई नापने का काम नहीं करना चाहिए? कस्वां का कहना है कि फ़िलहाल तो इस प्रकरण में निंबाराम की भूमिका की जाँच हो रही है। इसलिए इसमें भाजपा नेताओं की उछल-कूद उचित नहीं है। यह कोरा सतही आलोचना का क़िस्सा नहीं है, बल्कि पड़ताल का विषय है कि आख़िर घूसख़ोरी के लेन-देन में निंबाराम क्यों नज़र आ रहे हैं? उनकी इस प्रकरण में क्या भूमिका है? उन्होंने वसुंधरा राजे के इस बयान पर कि अशोक गहलोत सत्ता का दुरुपयोग कर रहे हैं; पलटवार करते हुए कहा कि कोई भी व्यक्ति या संगठन अपने काम से ख्यात और कुख्यात होता है। इसलिए जाँच की प्रतीक्षा तो करें। उन्होंने एक कविता ‘सत्य क्या है’ पढ़ी-
‘सूर्य छिपे अदरी-बदरी और चंद्र छिपे जो अमावस आये
पानी की बूँद पतंग छिपे और मीन छिपे इच्छा जल पाये
भोर भये जब चोर छिपे और मोर छिपे रितु सावन आये
कोटि प्रयास करे कित कोई, सत्य का दीप बुझे न बुझाये’