जर्मनी

खास बात

जर्मनी की टीम में ज्यादातर आक्रामक मिडफील्डर होने की वजह से कोच जोशिम लो ने सिर्फ दो स्ट्राइकरों को टीम में लिया है. जाहिर है टीम का आक्रमण विभाग काफी तगड़ा है इस विश्व कप के पहले जर्मनी के मार्को रॉयस को सबसे संभावनाशील खिलाड़ियों में शुमार किया जा रहा था. लेकिन अपनी स्पीड और तकनीक के लिए पहचाने जाने वाला यह युवा खिलाड़ी टूर्नामेंट के ठीक पहले चोटिल हो गया और टीम में शामिल नहीं हो पाया. क्या यह जर्मन टीम के लिए बड़ा झटका है? ऐसा नहीं कहा जा सकता. इस टीम में प्रतिभावान मिडफील्डरों की कमी नहीं है. थॉमस म्यूलर, टोनी क्रूस और मारियो गोत्जे जैसे खिलाड़ी विश्व की हर टीम के लिए चुनौती हैं. 2010 के विश्व कप में म्यूलर को गोल्डन बूट मिला था. तब उन्हें सर्वश्रेष्ठ युवा खिलाड़ी के तौर पर भी चुना गया. वे इस समय अपने सर्वश्रेष्ठ दौर में हैं. हालांकि मेसुट ओजील ने इंग्लिश प्रीमियर लीग के पिछले सत्र में अच्छा प्रदर्शन नहीं किया लेकिन वे और उनके साथ ही इसी लीग के सदस्य आंद्रे स्करल कोच जोशिम लो की रणनीति में खास भूमिका निभाने वाले हैं. मिडफील्डर जूलियन ड्रेक्सलर एक और खिलाड़ी हैं जो इस समय अपनी सर्वश्रेष्ठ फॉर्म में दिख रहे हैं. गोलकीपर मैन्यूएल न्यूएर और फिलिप लाम के साथ पिछली पंक्ति भी काफी ताकतवर है. मिडफील्डरों में बास्टियन स्वाइंस्टीगर की फॉर्म जरूर इस समय चिंता का विषय है, लेकिन मिरोस्लाव क्लोसे और ल्यूकार पोडोल्सकी जैसे वरिष्ठ खिलाड़ी आसानी से यह खामी भर सकते हैं.

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