जनादेश के मायने

कांग्रेस के लिए दीवार पर लिखी इबारत यह है कि वह लुप्त होती जा रही है। सबसे पुरानी पार्टी इस तथ्य से कुछ सांत्वना ज़रूर ले सकती है कि चुनाव परिणामों ने भाजपा को उसके लक्ष्य से पीछे रखा है। राहुल गाँधी के नेतृत्व और बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की बजाय कांग्रेस पार्टी के वामपंथी दलों के साथ गठबन्धन करने की चुनावी रणनीति पर फिर से सवाल उठाये जाएँगे। तमिलनाडु को छोड़कर कांग्रेस नेतृत्व अपने विरोधियों को मापने में विफल रहा। जो भी हो, केंद्र शासित प्रदेश समेत पाँच राज्यों के चुनाव परिणामों को एक ऐसे समय में मोदी और शाह के लिए एक राजनीतिक झटके के रूप के रूप में देखा जा सकता है, जब कोरोना वायरस की दूसरी लहर से निपटने के लिए केंद्र सरकार की कड़ी आलोचना हो रही है। हालाँकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के व्यक्तिगत करिश्मे को इससे कम आँकना भी भूल होगी। क्योंकि उनकी अभी भी काफ़ी लोकप्रियता है। लेकिन अब समय है कि भाजपा नेतृत्व अपने अहंकार को $खत्म करके आन्दोलनकारी किसानों की बात सुने और कृषि क़ानूनों में ऐसे संशोधन करे, जो किसानों के हित में हों। साथ ही महामारी के प्रसार को रोकने के लिए प्रभावी क़दम उठाये, जिससे लोगों की जान बचे और वे फिर से सरकार पर भरोसा कर सकें।

चरणजीत आहुजा