जनता का जायका

अब आलू क्या करेगा, भाई साहब! आलू ने एक बार फिर टमाटर की टीस कम करने की कोशिश की. ‘अच्छा हमारे यहां का सबसे बड़ा लतीफा कौन-सा है?’ टमाटर चुप. आलू ने कहा, ‘जब कोई नेता नैतिकता के नाम पर दूसरे नेता का इस्तीफा मांगता है’. फिर भी टमाटर पर कोई असर न हुआ. आगे आलू ने कहा, ‘दुनिया का सबसे बड़ा अचरज- जब कोई भारतीय नेता नैतिकता के नाम पर इस्तीफा दे.’ मगर टमाटर का मूड अब भी उखड़ा रहा. उसके मूड को ठीक करने की कोई तरकीब नहीं बैठ रही थी.

इसी बीच एक बात हुई. टमाटर बस चुने जाने वाला ही था कि उसके दागी होने का पता चल गया, और एक झटके से उसे बाहर पटक दिया गया. वह दोबारा वहीं आ गिरा, जहां से उठा था.

अरे..रेरे… बहुत बुरा हुआ. मगर अब टमाटर क्या करेगा, भाई साहब! इस बार आलू ने सोचा दो टूक बात करते हैं भले ही टमाटर का दिल टूट जाए, घुट-घुट के जीने से तो अच्छा ही होगा.

आलू ने हौल जमाते हुए टमाटर से कहा, ‘देख, ये न चुने जाने की अपनी टेक छोड़! जो हमें-तुम्हें चुनने में सौ नखरे कर रहे हैं न, इनकी सच्चाई मैं बताता हूं. जो जनता घंटों बाद भी अपने लिए दागी फल-सब्जी तक नहीं चुनती, वही जनता यहां अपने और अपने देश के लिए झट से दागी प्रतिनिधि चुन लेती है. और तू इनसे अपने चुने जाने की उम्मीद कर रहा है, बेवकूफ!’

अनूप मणि त्रिपाठी

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here