छोटे फिल्मकारों की बड़ी उड़ान

0
258

1नई दिल्ली स्थित मधुबाला इंस्टीट्यूट ऑफ कम्युनिकेशंस ऐंड इलेक्ट्रॉनिक मीडिया द्वारा आयोजित समारोह का यह छठा संस्करण कई मायनों में न केवल पूर्ववर्ती संस्करणों से अलग था बल्कि खास भी था. एक तो इस समारोह में पहली बार बड़े पैमाने पर अंतरराष्ट्रीय भागीदारी सुनिश्चित की गई वहीं दूसरी ओर कोलंबो अंतरराष्ट्रीय छात्र फिल्म महोत्सव इस समारोह का फेस्टिवल पार्टनर बना. इसके तहत दोनों देशों के फिल्म प्रेमियों को लगातार पांच दिनों तक दिल्ली और कोलंबों में फिल्मों का एकसाथ लुत्फ लेने का मौका मिला. इसके अलावा फर्स्ट फ्रेम देश का पहला ऐसा छात्र फिल्म महोत्सव बन गया जिसे क्राउडफंड (आम जनता से पैसे जुटाकर आयोजन) किया गया. फिल्मोत्सव के छठे संस्करण की यूट्यूब पर लाइव स्ट्रीमिंग भी की गई. इतना ही नहीं फर्स्ट फ्रेम लाईव सर्किल और टॉक-शाप जैसे नए प्रयोग भी किए गए. इस वर्ष निर्णायक मंडल में एम्मी तथा बाफ्टा अवार्ड के निर्णायक मंडल के सदस्य रह चुके माइक बेरी जैसे दिग्गज शामिल थे, जिनके अनुभव युवा फिल्मकारों के लिए खासी अहमियत रखते हैं.

फर्स्ट फ्रेम 2014 में बेस्ट नेशनल फिक्शन श्रेणी में क्रिस्टो टॉमी की फिल्म कनयाका को पहला पुरस्कार दिया गया. वहीं कचरा बीनने वालों के जीवन पर केंद्रित स्मृति सिंह की फिल्म दिस फिल्थी लाइफ को सर्वश्रेष्ठ राष्ट्रीय वृत्तचित्र का पुरस्कार दिया गया.

इस फिल्म महोत्सव की निदेशिका प्रोफेसर एम बी जुल्का ने समारोह के महत्व को रेखांकित करते हुए बताया कि अब तक आयोजित कुल छह संस्करणों के दौरान 500 से अधिक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय फिल्मों का मंचन किया जा चुका है. इस तरह यह उभरते फिल्मकारों के लिए अपनी क्षमताओं को दुनिया के समाने लाने का एक विशिष्ट अवसर है.

इसमें कोई दो राय नहीं कि फर्स्ट फ्रेम जैसे फिल्म महोत्सव युवाओं को अपने हुनर को उजागर करने का अवसर देते हैं. यही नहीं, इनके जरिए वे प्रतिष्ठित फिल्मकारों तथा अन्य हस्तियों के संपर्क में भी आते हैं जो उनके अनुभव के दायरे को वह आयाम देते हैं जो भविष्य में उनके काम आता है.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here