चिली

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विश्व रैंकिंग: 42
सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन : तीसरे स्थान पर  (1962)

खास बात
कोच साम्पाउली की योजना किसी परंपरागत स्ट्राइकर की बजाय दो चपल खिलाड़ियों के इस्तेमाल की है. अगर यह रणनीति कारगर होती है तो विपक्षी खेमे में इन खिलाड़ियों को रोकने को लेकर दुविधा और भ्रम पैदा हो जाएगा

जब तक यह टीम मैदान में होती है तब तक कुछ न कुछ घटित होता रहता है. 2010 के विश्व कप में इस टीम ने दुनिया-भर का ध्यान अपनी तरफ खींचा था. हालांकि टीम तब भी वांछित नतीजा नहीं पा सकी थी. दूसरे राउंड में ब्राजील के हाथों उसे 3-0 की हार का सामना करना पड़ा था. उस टूर्नामेंट में एलेक्सिस सांचेज बड़े खिलाड़ी बनकर उभरे थे. इसका ईनाम उन्हें बार्सिलोना के साथ जुड़कर मिला. वे अपनी टीम की तरफ से अहम खिलाड़ी बने रहे. क्वालीफायर राउंड में चिली ने 29 गोल दागे थे. 2014 की दौड़ में शामिल टीमों में यह दूसरा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन था. लेकिन इसका दूसरा पक्ष भी है. टीम ने इस दौरान खुद भी 25 गोल खाए. चिलियन टीम का सबसे बड़ा सिरदर्द है उनका डिफेंस. इस कमी को कोच जॉर्ज साम्पाउली खुलकर स्वीकारते हैं. इस बीच आर्टुरो वीडल ने टीम को काफी राहत पहुंचाई है. यह खिलाड़ी किसी भी पोजीशन पर खेलने में सक्षम है. वीडल के आने से मिडफील्ड में नई जान आ गई है. हालांकि उनकी फिटनेस को लेकर संदेह बना हुआ है.

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