चरणजीत सिंह चन्नी पंजाब के नए मुख्यमंत्री होंगे, कांग्रेस विधायक दल का फैसला

पिछले करीब 35 घंटे के पंजाब कांग्रेस के इस घटनाक्रम में यदि किसी नेता ने सबसे ज्यादा खोया है, वह पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टेन अमरिंदर सिंह हैं। इतने वरिष्ठ और अनुभवी नेता कैप्टेन ने नवजोत सिंह सिद्धू को ‘देश का दुश्मन’ तक कह दिया, और हवाला दिया इमरान खान के पीएम पद ग्रहण का जिसमें सिद्धू अपने पुराने क्रिकेटर साथी इमरान खान और पाक सेना के प्रमुख कमर जावेद बाजवा से गले मिलने का। भाजपा के अलावा देश भर में शायद ही कोई और अमरिंदर के इस बेतुके आरोप का समर्थन करेगा। आम लोगों ने भी अमरिंदर के इस ब्यान को ‘मुख्यमंत्री का पद छिनने की निराशा’ माना है। खुद अमरिंदर पर पाकिस्तान की पत्रकार अरुषा से रिश्तों को लेकर ढेरों आरोप लगते रहे हैं। एक दलित सिख को मुख्यमंत्री बनाकर कांग्रेस ने मास्टर स्ट्रोक चला है और इस से भाजपा सहित अकाली दल के लिए भी। ‘आप’ भी इस मामले में कांग्रेस से मार खा बैठी है।

इसके अलावा आलाकमान ने जिन चन्नी को अब मुख्यमंत्री बनाया है, वे अब सिद्धू के समर्थक हुए हैं। शनिवार को कांग्रेस विधायक दल की बैठक में पार्टी के 80 में से 78 विधायक उपस्थित थे। कैप्टेन के लिए बहुत मुश्किल होगा कि वे इनमें से कुछ विधायकों को साथ जोड़े रखें। एक बार सरकार बनने के बाद अमरिंदर पंजाब की राजनीति में अकेले पड़ सकते हैं। वैसे भी पंजाब में अभी भी कांग्रेस के लिए चुनाव के बाद दोबारा सत्ता में लौटने की अन्य दलों के मुकाबले सबसे संभावनाएं हैं, यह बात विधायक भी अच्छी तरह समझते हैं।

अमरिंदर सिंह ने पिछले 26 घंटे में जो ब्यान दिए हैं, उससे उन्होंने सोनिया गांधी जैसी अपनी मजबूत समर्थक की सहानुभूति भी खोने का रिस्क ले लिया है। जब उनपर भाजपा में जाने की बातें मीडिया में आ रही थीं, उन्होंने एक बार भी इनका खंडन नहीं किया। उलटे जलियांवाला बाग़ के नवीकरण पर जब राहुल गांधी ने मोदी सरकार के खिलाफ बोला तो कैप्टेन ने एक तरह से पीएम मोदी का पक्ष लिया जो इसका उद्घाटन करने आये थे, जबकि पंजाब में जलियांवाला बाग़ के नवीकरण के खिलाफ माहौल था।

अमरिंदर के साथ यदि विधायक नहीं रहते हैं तो उन्हें कांग्रेस से बाहर जाना भी मुश्किल होगा। बिना विधायकों के भाजपा या कोई और पार्टी 80 साल की उम्र में उन्हें क्यों साथ लेगी। क्या सिर्फ नेतृत्व देने के लिए ?

कैप्टेन अमरिंदर के हटने से यह बात साबित हो गयी है कांग्रेस आलाकमान अब मजबूत फैसले लेने लगी है। पंजाब से निपटने के बाद वह राजस्थान और छत्तीसगढ़ में पार्टी की जंग को लेकर फैसले कर सकती है।