घातक होते जा रहे कुत्ते-बिल्ली

कुत्तों के काटने के मामले बढ़े
सन् 2021 के अनुमानित आँकड़ों की मानें, तो देश में आवारा कुत्तों की संख्या 6.2 करोड़ एवं आवारा बिल्लियों की संख्या लगभग 2.1 करोड़ हो सकती है। पशुधन संगणना के अनुमान से पता चलता है कि सन् 2019 में आवारा कुत्तों की संख्या लगभग 1.53 करोड़ एवं आवारा बिल्लियों की संख्या लगभग 91 लाख थी। इसके अतिरिक्त सन् 2018 में देश में 1.69 करोड़ से अधिक पालतू कुत्ते एवं लगभग 13.4 लाख पालतू बिल्लियाँ थीं। सन् 2014 में 1.18 करोड़ से अधिक पालतू कुत्ते एवं 11 लाख के लगभग पालतू बिल्लियाँ थीं। इसका तात्पर्य यह है कि आवारा पशुओं की संख्या के अतिरिक्त पालतू पशुओं की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है।

द स्टेट ऑफ पेट होमलेसनेस इंडेक्स डाटा फॉर इंडिया की रिपोर्ट की मानें, तो संसार के सभी देशों के लगभग 24 फ़ीसदी आवारा पशु हमारे देश में हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि हमारे देश में कुत्ते व बिल्लियों की कुल संख्या में से 85 फ़ीसदी कुत्ते एवं बिल्लियाँ आवारा हैं।

पालतुओं को नहीं लगवाते टीके
पशुओं के डॉक्टर रूम सिंह कहते हैं कि पालतू कुत्ते व बिल्लियों को रेबीज का टीका लगवाना अनिवार्य है। सरकारी पशु विभागों का दायित्व बनता है कि वो कुत्ता व बिल्ली पालने वालों को रेबीज के टीकाकरण के लिए विवश करे, टीकाकरण न कराने वालों का चालान करे एवं आवारा कुत्ते व बिल्लयों का टीकाकरण भी करे। विदित हो कुत्तों के काटने से रेबीज नामक बीमारी हो जाता है। जिसे भी कुत्ता काट लेता है, अगर उसको रेबीज का टीका न लगे, तो वो पागल भी हो सकता है। बिल्ली के काटने से रेबीज, सार्कोमा एवं घातक ट्यूमर भी हो सकता है।

रेबीज से होने वाली मौतें
हमारे देश में प्रत्येक वर्ष रेबीज से लगभग 20,000 लोग मर जाते हैं। विश्व में हर वर्ष लगभग 59,000 लोग रेबीज से मरते हैं। रेबीज के प्रति जागरूकता की कमी एवं आवारा व पालतू कुत्ते व बिल्लियों को रेबीज का टीका न लगने के कारण लोग असमय मर रहे हैं। अगर लोगों को जागरूक किया जाए एवं कुत्ते व बिल्लियों को समय-समय पर रेबीज का टीका लगाया जाए, तो लाखों लोगों की जान बच सकती है। हमारे देश में कुत्तों के काटने से सबसे अधिक 97 फ़ीसदी लोग मरते हैं, जबकि तीन फ़ीसदी लोग बिल्लियों व अन्य विषैले स्तनधारियों के काटने से मरते हैं। आज सरकार के लिए आवारा कुत्ते व बिल्ली एक चुनौती बने हुए हैं, मगर इस ओर न के बराबर ध्यान दिया जा रहा है। कुत्ते व बिल्लियों के काटने से रोग होने का कारण इन पशुओं का गंदी एवं सड़े-गले मांस को भोजन बनाना है।

शून्य रेबीज मामलों का प्रयास
केंद्र सरकार का लक्ष्य है कि सन् 2030 तक रेबीज के मामले शून्य हो जाएँ। मगर समस्या यह है कि रेबीज के वार्षिक आँकड़े और देश में कुत्ते व बिल्लियों की सही संख्या के सही आँकड़े आज तक उपलब्ध नहीं हैं। केंद्र सरकार के पास भी इसका सटीक विवरण नहीं है। केंद्र सरकार ने इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सितंबर, 2021 में रेबीज उन्मूलन के लिए राष्ट्रीय कार्य योजना (एनएपीआरई) की घोषणा की थी। मगर केंद्र सरकार के लिए रेबीज के शून्य लक्ष्य को प्राप्त करना भी आसान नहीं है। इसका कारण स्वास्थ्य मंत्रालय व स्वाथ्य विभागों की उदासीनता है।

डॉक्टर रूम सिंह का कहना है कि इस बड़े व आवश्यक लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय को रेबीज व कुत्ते व बिल्लियों का सर्वे कराकर उस पर काम करना चाहिए। इसके बाद कुत्ता और बिल्ली पालने वालों पर पशुपालन के सख़्त नियम लागू होने चाहिए, ताकि उनके पालतू पशु किसी और के लिए प्राणघातक साबित न हो सकें।

सख़्ती आवश्यक
ग़ाज़ियाबाद के राजनगर एक्सटेंशन में घटना से सरकारों के अतिरिक्त पशु विभागों व पुलिस विभाग को सीख लेने की आवश्यकता है। इन सभी को चाहिए कि कुत्ते व बिल्ली पालने वालों के प्रति नरम रवैया न बरतें। अगर किसी का कुत्ता अथवा बिल्ली किसी को काट लेता है, तो उस मालिक को दण्डित किया जाना अति आवश्यक होना चाहिए। इस सख़्ती से सम्भव है कि कुत्ते व बिल्ली पालने वाले सतर्क रहें और दण्डित होने के डर से अपने पशुओं को दूसरे लोगों के सम्पर्क से दूर रखें।

धारणा यह है कि जिस घर में कुत्ता या बिल्ली होते हैं, उस घर में कोई अनजान व्यक्ति किसी अपराध की नीयत से प्रवेश नहीं करता। मगर सच्चाई यह है कि पालतू कुत्ते व बिल्लियाँ उन लोगों को भी काट लेते हैं, जो इन पशुओं के पालने वालों के जानकार होते हैं। कई बार तो घर के सदस्यों को भी ये पशु काट लेते हैं। पशुओं से लोगों का प्यार होना उचित है, मगर इन पशुओं को अति से अधिक प्यार और छूट देना भी ठीक नहीं है। अगर सरकारी प्रयासों को कुत्ते व बिल्ली पालने वाले पशु प्रेमी भी इस बात का ध्यान रखें, तो इन पशुओं के काटने के मामले कम होने लगेंगे एवं वर्ष 2030 के रेबीज शून्य के केंद्र सरकार के लक्ष्य को छूने में मददगार साबित होंगे।