गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश

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पैराशूट प्रत्याशी होने की जो चुनौती भाजपा और आप की है, कांग्रेस प्रत्याशी राज बब्बर की भी पहली चुनौती वही है. उनकी दूसरी है अपना ही दिया हुआ एक बयान. पिछले साल गरीबी रेखा पर बहस के दौरान बब्बर ने कहा था कि ‘भरपेट भोजन तो 12 रुपये में ही मिल जाता है.’ अब विपक्षी उन्हें इस बयान पर घेर रहे हैं. वैसे जनरल सिंह और शाजिया के मुकाबले राज बब्बर फिल्मी सितारा होने के कारण एक जाना पहचाना चेहरा जरूर हैं. 45 प्रतिशत ग्रामीण आबादी वाले इस संसदीय क्षेत्र में यह तथ्य उनको फायदा पहुंचा सकता है. देश की पांच सबसे बड़ी सीटों (मतदाताओं की संख्या के अनुसार) में से एक इस सीट पर लगभग 15 प्रतिशत मुस्लिम हैं. लेकिन कांग्रेस के इन पारंपरिक वोटों का इस बार इल्मी और फिल्मी में बंटवारा तय है.

भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह की वर्तमान सीट होने के कारण यह भाजपा की नाक का भी सवाल मानी जा रही है. परंपरागत तौर से भाजपा और कांग्रेस की इस सीट पर पिछले 52 साल से कोई भी महिला जीत दर्ज करने में नाकाम रही है. इस तथ्य के बावजूद भी आप ने इल्मी को यहां से मैदान में उतार कर लड़ाई को त्रिकोणीय बना दिया है. सोशल मीडिया की भाषा पर ही लौटें तो यह फौजी, मौजी और भौजी की दिलचस्प लड़ाई है.

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