गागर में सागर भरने की कोशिश

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कविताओं को भरपूर स्थान दिया गया है लेकिन उनसे गुजरते हुए इस बात का अहसास तीव्रता से होता है कि यहां गुणवत्ता के बजाय मात्रा को ध्यान में रखा गया है. नए और पुराने दोनों कवियों को अधिकाधिक संख्या में शामिल करने की हड़बड़ाहट ने कविता वाले हिस्से के स्तर को प्रभावित किया है. जाहिर है इस साहित्य वार्षिकी के अन्य पठनीय व समृद्ध हिस्सों से गुजरता हुआ पाठक जब कविताओं तक आता है तो उसे कमोबेश निराशा हाथ लगती है. एक कवि संपादक के नेतृत्व में निकले साहित्य विशेषांक में ऐसा होना थोड़ा चकित भी करता है. हिंदी की साहित्यिक पत्रिकाओं तथा विशेषांकों में यदि अन्य भाषाओं के अनुवादों को भी स्थान दिया जाए तो पाठकों का हासिल बढ़ेगा. शुक्रवार की इस साहित्य वार्षिकी का मूल्य 80 रुपये रखा गया है जो थोड़ा अधिक प्रतीत होता ह,ै लेकिन केवल तभी तक जब तक आप अंदर प्रकाशित सामग्री पर एक नजर डाल नहीं लेते.

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