खोखलेपन का महिमामंडन

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हम लोग ज्यादा भेंट और तैयारी के साथ अगली रात पहुंचे तो उसने चेले को मदिरा की बोतलों के साथ गुप्त पूजा के लिए नदी की ओर भेज दिया. वह थोड़ी देर बाद भीगी धोती में लौटा तब उन्माद से भभकती देहभाषा और मंत्रों के साथ आगे की कार्रवाई शुरू हुई. उसने झूमते हुए हम तीनों को एक-एक सादा कागज थमाया जिस पर हमें नाम, जन्मतिथि और जन्म स्थान लिखकर वापस कर देना था. औघड़ ने कागज हाथ में आते ही तेजी से घसीटकर लिखना शुरू किया.

पुतलियों को छोड़कर हमारा बाकी शरीर हिल रहा था, हम उसकी ओर दम साधे उत्कंठा में ताक रहे थे. वहां होल्डर से झूलते इकलौते बल्ब की रोशनी में अपने अज्ञात मानस और आगत को काफी देर तक पढ़ने के बाद हमने तय योजना के मुताबिक कागज आपस में बदल लिए. हमने पाया कि हम सभी एक ही भयावह पैटर्न पर घसीटे गए थे और हमारा उद्धार उन तांत्रिक अनुष्ठानों से होना था जो वही कर सकता था. थोड़ी-सी बहस के बाद तीन औघड़ों से हमारी मारपीट शुरू हो गई. पटका-पटकी से उठे धूल धक्कड़ और कुत्तों की गुर्राहट के बीच हम लोग औघड़ को भाग जाने की चेतावनी देते हुए वहां रखी एक खोपड़ी, हड्डियों, मालाओं और इकलौते बल्ब के साथ मोटरसाइकिलों से वापस लौट आए.

उस रात मैंने बहुत दुख के साथ महसूस किया कि औघड़ भी नकली होने लगे हैं. उनके गिर्द भय और रहस्य का सिर्फ एक पुरातन घेरा बचा है जिसे वे मार्केटिंग कंपनियों जैसे कौशल से बचाए रखते हैं.

यह समय जैसे उस रात का ही विस्तार है जिसमें फरेब और सस्तेपन को एक खास नीयत से ग्लैमराइज किया जा रहा है. यह खोखलेपन के महिमामंडन का समय है. जो नहीं है उसका घटाटोप प्रचार करते हुए तथाकथित पौष्टिक पावरोटी से लेकर एक प्रतापी प्रधानमंत्री तक कुछ भी बनाया जा सकता है. छवियों के खालिस प्रबंधन से विचारक, संत, लेखक, दार्शनिक, सुंदरियां और किसिम-किसिम के महानायक तैयार करनेवाले जानते हैं कि जो जितना लुंजपुंज और सारहीन होगा उतना ही पूंजी निर्भर प्रचारजीवी होगा. उसे बनाकर मुनाफा खींचना और घाटे का सौदा साबित होने पर मिटा देना आसान होगा… इस सस्तेपन को महसूसकर जो खुजली मचती है वह बहुत कीमती है.

उसकी खरोंच ही योग्य मनुष्यों को उनकी सही जगह तक ले जाने वाला यात्रापथ बनेगी.

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