ख़ून से सनी पहलवानी

वह कहते हैं- ‘14 साल की उम्र में सागर को छत्रसाल स्टेडियम में महाबली के नाम के विख्यात गुरु सतपाल के पास भेजा था।’ स्टेडियम से कई अंतर्राष्ट्रीय पहलवान निकले हैं। जब सागर ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रौशन किया, तो उन्हें भी सुशील की तरह बेटे के बड़ी उपलब्धि हासिल करने का भरोसा था। दोनों में गुरु-शिष्य का नाता था पर इस गुरु ने क्या किया? उसने यह क्यों किया। सुशील ने ही सागर को स्टेडियम के पास अपना फ्लैट किराये पर दिया था। फिर ख़ाली भी करा लिया, हमें कारण नहीं पता पर यह सामान्य बात है। एक या दो माह का किराया अदा न करने को लेकर दोनों में कुछ कहासुनी की बातें सामने आ रही है लेकिन इतनी बड़ी घटना हो जाए, इस पर भरोसा नहीं होता।

सागर के चाचा मनिंदर धनखड़ के अनुसार, छत्रसाल स्टेडियम अब सुशील की दंबगई का केंद्र्र बन चुका है। इसी वजह से कई पहलवान अन्य अखाड़ों में जाने को मजबूर हुए। कुछ समय पहले कोच वीरेंद्र सिंह यहाँ से अलग हुए, तो बहुत से पहलवान उनके अखाड़े में चले गये। यह भी सुशील को अच्छा नहीं लगा। दबंगई, गुटबाज़ी और राजनीति के अलावा स्टेडियम में बहुत कुछ होता है, जो पुलिस जाँच में सामने आएगा। हम लोग इंसाफ़ चाहते हैं और इसके लिए पूरा संघर्ष करेंगे। सुशील प्रभावशाली है, बचने के लिए हर हथकंडा अपनाएगा। लेकिन हमें पुलिस और न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है कि हमें न्याय मिलेगा।

तिरंगे से तौलिए का सफ़र
दिल्ली के गाँव बपरोला से निकले सुशील ने कुश्ती में जबरदस्त उपलब्धियाँ हासिल कीं। वह महाबली सतपाल के शिष्य हैं, जिन्होंने अपने दौर में ख़ूब नाम कमाया। सन् 1952 में सी. जाधव ने ओलंपिक में पदक जीता था। पाँच दशक से ज़्यादा के लम्बे सूखे के बाद सुशील ने सन् 2008 के बिजिंग ओलंपिक में कांस्य पदक जीता। सन् 2012 के लंदन ओलंपिक में उन्होंने श्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए रजत जीता था। कुश्ती में दो ओलंपिक में पदक जीतने वाले पहले पहलवान हैं। सन् 2010 और 2014 के राष्ट्र मण्डल खेलों में उन्होंने स्वर्ण पदक जीते। पद्मश्री से सम्मानित सुशील अर्जुन अवॉर्ड के अलावा देश के सबसे बड़े खेल पुरस्कार राजीव गाँधी खेल रत्न से भी सम्मानित हो चुके हैं। अन्य राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बेशुमार सम्मान उनके नाम हैं। 4 मई से पहले तक कुश्ती में आदर्श रहे सुशील की अब उस छवि नहीं रख सकेंगे। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जीत हासिल करने के बाद देश का तिरंगा लेकर शान से स्टेडियम के चक्कर काटने वाले सुशील तौलिए से मुँह छिपाने को मजबूर हो गये हैं।

आपराधिक तालमेल
घटना में दिल्ली के कुख्यात बदमाशों नीरज बवाना और काला जठेड़ी गिरोह के नाम भी सामने आ रहे हैं। सुशील और उसके साथियों ने 4 मई की रात को सागर के साथ सोनू, भगत और अमित को भी बुरी तरह से पीटा था। इनमें सागर के सिर में ज़्यादा चोटों लगने से उसकी मौत हो गयी, जबकि बाक़ी तीन भी घायल हुए हैं। घटना में गोलियाँ भी चलीं। घायल सोनू काला जठेड़ी का क़रीबी है, जिसने पिटाई पर प्रतिक्रिया भी दी है। अंजाम कुछ भी हो सकता है। अवैध सम्पत्तियों पर क़ब्ज़ेकरना, विवादित सम्पत्तियों के समझौते की एवज़ में मोटी रक़म वसूलना, अपहरण, फ़िरौती लूट और हत्या जैसी संगीन वारदात में शामिल रहे अंडर वल्र्ड के कई लोग घटना में शामिल हो सकते हैं। सवाल यह है कि तो क्या सुशील के आपराधिक लोगों से तालमेल थे?