क्या कोहली को छोड़ देनी चाहिए कप्तानी?

शतकों की जो गति कोहली ने बना रखी थी, यदि वह बरक़रार रहती, तो वह अब तक रिकी पोंटिंग को पीछे छोड़ चुके होते। इस दौरान कोहली ने 50 से ज़्यादा पारियाँ खेली हैं; लेकिन शतक नहीं जड़ पाये। कोहली के अंतरराष्ट्रीय करियर में ऐसा पहली बार ही हुआ है, जब वह इतनी पारियों के बाद भी शतक नहीं जड़ सके हैं।

ख़राब प्रदर्शन से जूझ रहे कोहली ने आख़िरी बार टेस्ट में नवंबर, 2019 में बांग्लादेश के ख़िलाफ़ शतक लगाया था। इसके बाद से टेस्ट में उनका औसत 25 के आसपास ही रहा है। हालाँकि वनडे में उनका प्रदर्शन थोड़ा बेहतर है और उनका औसत 43 से ऊपर है। यहाँ बता दें कोहली सचिन तेंदुलकर के 49 वनडे शतक से छ: क़दम दूर हैं। नवंबर, 2019 में आख़िरी बार टेस्ट शतक लगाने के बाद कोहली ने आठ टेस्ट मैचों में चार अर्धशतक लगाये हैं। टेस्ट की तुलना में कोहली वनडे में थोड़े बेहतर रहे हैं और उन्होंने आठ अर्धशतक लगाये हैं।

कप्तान बनने योग्य खिलाड़ी

भारत में ऐसे खिलाडिय़ों की कमी नहीं, जो अपने अनुभव या नेतृत्व के गुणों के कारण कप्तान बनने की क्षमता रखते हैं। अनुभवी खिलाडिय़ों में सबसे पहला नाम आता है- रोहित शर्मा का। लेकिन क्रिकेट के जानकार जिस खिलाड़ी को कप्तानी का ज़िम्मा देने की वकालत करते हैं, वह हैं- ऋषभ पंत।

श्रेयस अय्यर की अनुपस्थिति में फ़िलहाल स्थगित वर्तमान आईपीएल में दिल्ली कैपिटल्स की जैसी कप्तानी ऋषभ ने की, उससे उन्होंने क्रिकेट के कई दिग्गजों को अपना मुरीद बना लिया है। इनमें अंतर्राष्ट्रीय दिग्गज भी शामिल हैं। हाल के महीनों में पंत टीम इंडिया में तीनों फॉर्मेट में अपनी जगह पक्की कर चुके हैं। उनके अलावा शुभमन गिल को भी कप्तानी के दिमाग़ वाला खिलाड़ी माना जाता है। गिल के करियर की शुरुआत भारत के ऑस्ट्रेलिया दौरे की टेस्ट सीरीज से हुई थी। गिल ने तब पैट कमिंस जैसे गेंदबाज़ के विपरीत बहुत बेहतर तरीक़े से खेला था।  इस क्रम में तीसरा नाम श्रेयस अय्यर का है। आईपीएल-2018 में दिल्ली डेयरडेविल्स के कप्तान बने अय्यर के नेतृत्व में आईपीएल-2020 में अब दिल्ली कैपिटल्स की टीम फाइनल में पहुँची थी।